अपनी कार, अपने शेफ और अपने डॉक्टर! ‘चाइनीज बबल’ में भारत आए जिनपिंग, चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा का खास इंतजाम
दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंच रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा काफी सख्त है. चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जमीन से लेकर आसमान और डिजिटल नेटवर्क तक कई स्तरों पर निगरानी और सुरक्षा इंतजाम हैं.
भारत 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजना कर रहा है. इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत दुनिया के कई बड़े नेता दिल्ली पहुंच गए हैं. इसी क्रम में अब पड़ोसी मुल्क चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी भारत पहुंच गए हैं. जिनपिंग का यह 2019 के बाद उनका पहला भारत दौरा है. उनके दौरे को सिर्फ कूटनीतिक लिहाज से ही खास नहीं माना जा रहा है, बल्कि जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा का विषय बनी हुई है. चीन के राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए दिल्ली में भारतीय एजेंसियों के साथ चीनी सुरक्षा टीमों ने भी मोर्चा संभाल लिया है.
होटल से लेकर रास्ते तक हाई-सिक्योरिटी कवर
चीनी राष्ट्रपित शी जिनपिंग के लिए दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में खास सुरक्षा व्यवस्था की गई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन और रूस की सुरक्षा टीमें नेताओं के पहुंचने से पहले ही वहां पहुंच जाती हैं. होटल के उन हिस्सों से लेकर छत और ग्राउंड फ्लोर तक सुरक्षा तैनाती की जाती है, जहां विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की ठहरने की व्यवस्था होती है.
इस बार भी होटल के कर्मचारियों का भी वेरिफिकेशन कराया गया है. रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है. समिट के दौरान एयरपोर्ट, होटल, कार्यक्रम स्थल और काफिले के रास्तों को एक बड़े मल्टी-लेयर सिक्योरिटी ग्रिड में रखा गया है.
डिजिटल ब्लैकआउट और जैमिंग शील्ड
जिनपिंग की सुरक्षा का सबसे बड़ा हिस्सा जैमिंग और ब्लैकआउट है. जिनपिंग के काफिले के आसपास एडवांस्ड सिग्नल जैमर्स का पहरा रहता है. यह तकनीक एक निश्चित दायरे में मोबाइल नेटवर्क, ड्रोन सिग्नल्स, सैटेलाइट कम्युनिकेशन्स और रिमोट कंट्रोल फ्रीक्वेंसी को पूरी तरह ब्लॉक कर देती है, जिससे किसी भी प्रकार का डिजिटल हमला या रिमोट ब्लास्ट असंभव हो जाता है.
अपनी कार भी चीन से लेकर आए जिनपिंग
शी जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे दिलचस्प हिस्सा उनकी सरकारी कार है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने जिनपिंग की यात्रा से पहले ही N 20 जैसे मालवाहक विमानों के जरिए उनकी सरकारी कार Hongqi N701 स्टेट लिमोजिन, बैकअप कार और कम्युनिकेशन से जुड़े उपकरण भारत भेज दिए थे. यानी राष्ट्रपति की आवाजाही के लिए चीन ने स्थानीय वाहनों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपनी व्यवस्था को प्राथमिकता दी है.
Hongqi N701 कोई नार्मल मार्केट में बिकने वाली कार नहीं है. यह चीन के शीर्ष नेतृत्व के लिए तैयार की गई विशेष स्टेट लिमोजिन है और जिनपिंग की कई विदेशी यात्राओं में इसका इस्तेमाल हो चुका है. भारत दौर पर जिनपिंग के पहुंचने से पहले ही कार पहुंच चुकी है.
सिर्फ बंदूकें नहीं, ड्रोन और हवा से आने वाले खतरे पर भी नजर
जिनपिंग की सुरक्षा में सिर्फ जमीन पर मौजूद खतरे ही नहीं, बल्कि छोटे ड्रोन और दूसरे लो-एल्टीट्यूड एरियल ऑब्जेक्ट्स को भी ध्यान में रखा गया है. चीन की ओर से ड्रोन, गुब्बारे, बैनर और लाउडस्पीकर जैसे संभावित माध्यमों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भारतीय एजेंसियों के सामने रखे जाने की रिपोर्ट है. भारत की अपनी BRICS सुरक्षा व्यवस्था में भी एंटी-ड्रोन सिस्टम और कई स्तर की निगरानी शामिल है. दिल्ली में हजारों पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ कई रूट और होटल हाई-सिक्योरिटी जोन में रखे गए हैं.
होटल की सुरक्षा सिर्फ दरवाजे तक सीमित नहीं
शी जिनपिंग के होटल को लेकर सुरक्षा जांच भी बेहद व्यापक रखी गई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार होटल में संभावित CBRN यानी केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर खतरों को लेकर जांच की गई है. साथ ही अंडरग्राउंड पाइपलाइन नेटवर्क की भी जांच की गई है. चीनी सुरक्षा एजेंसियां होटल के कमरों की खिड़कियों के शीशों की बुलेटप्रूफ कोटिंग, एयर वेंटिलेशन सिस्टम, जिससे कोई जहरीली गैस न छोड़ सके को भी चेक करती हैं.
खाने को लेकर भी चीन की अपनी निगरानी
जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ हथियारों और वाहनों तक सीमित नहीं रहती. चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के भोजन की सामग्री से लेकर उन्हें तैयार करने वाले शेफ और खाना परोसने वाले लोग तक चीन से ही आते हैं. यहां तक कि किसी भी इमरजेंसी के लिए चीनी डॉक्टरों की एक विशेष टीम और उनके खास ब्लड ग्रुप का पर्याप्त स्टॉक हमेशा उनके काफिले के साथ चलता है.
जीरो-कॉन्टैक्ट पॉलिसी
जीरो-कॉन्टैक्ट पॉलिसी के तहत आम जनता या अनधिकृत अधिकारियों को जिनपिंग के शारीरिक दायरे के पास भी आने की भी परमिशन नहीं होती है. उनके ठहरने वाले होटल के पूरे फ्लोर या पूरे कैंपस को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया जाता है.
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जिनपिंग का यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि गलवान घाटी में 2020 के संघर्ष के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है. BRICS के मंच पर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात भी प्रस्तावित है, जिससे इस यात्रा की कूटनीतिक अहमियत और बढ़ गई है.
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