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'जल्द कर लेंगे कनाडा पर कब्जा, हमारे पास 5 हजार से ज्यादा मेंबर', लॉरेंस बिश्नोई गैंग का बड़ा दावा

कनाडा में लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने बड़ा दावा किया है. गैंग ने कनाडाई पुलिस को एक खत भेजा था, जिसमें उसने दावा किया है कि उनके पास पुलिस से भी अधिक हथियार हैं और पूरे मुल्क में 5 हजार से भी ज्यादा गैंग मेंबर्स हैं.

Written By Rachit Kumar
Published: Sep 18, 2026, 06:51 AM IST | Updated: Sep 18, 2026, 07:09 AM IST
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कनाडा में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है. CBC News को मिले दस्तावेजों के मुताबिक, पिछले साल कनाडा की एबॉट्सफोर्ड पुलिस को भेजे गए एक कथित धमकी भरे पत्र में लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने दावा किया था कि कनाडा में उसके 5 हजार से ज्यादा सदस्य हैं और उसके पास कनाडाई पुलिस से भी ज्यादा हथियार हैं.

'हमारे पास कनाडा में 5 हजार से ज्यादा गैंग मेंबर'

दस्तावेजों के मुताबिक यह कथित पत्र 'Lawrence gang from India' के नाम से साइन किया गया था. पत्र कनाडा के रक्षा मंत्री, सेना और पुलिस के लिए था. पत्र में कई स्पेलिंग की गलतियां थीं और विराम चिह्न भी नहीं थे. इसमें कनाडाई अधिकारियों को धमकी देते हुए कहा गया कि गैंग के पास कनाडा में 5 हजार से ज्यादा सदस्य हैं और ये लोग पैसे लेकर गोलीबारी कर सकते हैं. पत्र में कथित तौर पर यह भी दावा किया गया कि गैंग जल्द ही कनाडा पर कब्जा कर लेगा.

लेकिन क्या 5 हजार सदस्य होने का दावा सही है?

उपलब्ध दस्तावेजों में 5 हजार सदस्यों या पुलिस से ज्यादा हथियार होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. कनाडा की वित्तीय खुफिया एजेंसी FINTRAC ने भी इस तरह के मामलों में चेतावनी दी है कि कई बार अपराधी किसी बड़े या चर्चित गैंग का नाम लेकर धमकी को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश करते हैं. इसलिए किसी भी कथित धमकी या गैंग के नाम का इस्तेमाल अपने आप में उस संगठन से सीधे जुड़ाव का सबूत नहीं माना जा सकता.

कनाडा में बिश्नोई गैंग आतंकवादी संगठन 

दूसरी तरफ, कनाडा सरकार ने 29 सितंबर 2025 को बिश्नोई गैंग को Criminal Code के तहत आतंकवादी इकाई के तौर पर सूचीबद्ध किया था. कनाडाई सरकार के मुताबिक, यह संगठन मुख्य रूप से भारत से ऑपरेट करता है, लेकिन इसकी मौजूदगी कनाडा में भी है. सरकार ने संगठन को हत्या, गोलीबारी और आगजनी जैसी गतिविधियों से जोड़ा और कहा कि यह जबरन वसूली और धमकी के जरिए प्रवासी समुदायों में डर पैदा करता है. इस सूची में शामिल होने के बाद कनाडाई अधिकारियों को आतंकवादी फंडिंग, संपत्ति, भर्ती और इमिग्रेशन से जुड़े मामलों में अतिरिक्त कानूनी अधिकार मिलते हैं.

जबरन वसूली और गोलीबारी के नेटवर्क पर कार्रवाई

कनाडा की वित्तीय खुफिया एजेंसी FINTRAC ने भी दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बनाकर की जा रही जबरन वसूली से जुड़े नेटवर्क पर रिपोर्ट जारी की है.एजेंसी के मुताबिक, ये नेटवर्क किसी एक सीधी और पारंपरिक गैंग संरचना की तरह काम नहीं करते. इनमें स्थानीय अपराधी, विदेश में मौजूद आपराधिक नेटवर्क से संपर्क रखने वाले लोग और दूसरे बिचौलिये शामिल हो सकते हैं.

कुछ लोग गैंग के लिए ‘फुट सोल्जर’, एनफोर्सर या पैसों के लेन-देन में मदद करने वाले मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं. जबरन वसूली से मिले पैसे को अलग-अलग माध्यमों से इधर-उधर भेजने के लिए ‘मनी म्यूल’ और अन्य बिचौलियों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है.

कनाडा में डिपोर्टेशन अभियान तेज

कनाडा की बॉर्डर सर्विस एजेंसी यानी CBSA ने भी ऐसे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है, जिन पर जबरन वसूली और संगठित अपराध से जुड़े होने का संदेह है. CBSA के मुताबिक 3 सितंबर 2026 तक 188 रिमूवल ऑर्डर जारी किए गए और 111 लोगों को कनाडा से बाहर भेजा गया.

क्षेत्र के हिसाब से आंकड़े इस तरह हैं:

CBSA ने अगस्त 2025 में पैसिफिक और मैदानी क्षेत्रों में जबरन वसूली से जुड़े मामलों पर विशेष संसाधन लगाए थे. इसके बाद नवंबर 2025 में इस अभियान को GTA तक बढ़ाया गया.

चार मामलों का CBSA ने दिया उदाहरण

कनाडाई एजेंसी ने अपनी कार्रवाई के उदाहरण के तौर पर चार मामलों का जिक्र किया है. पलविंदर सिंह को 2025 में जबरन वसूली से जुड़ी गोलीबारी के मामले में लिंक किया गया था. इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड ने उसे आपराधिक संगठन की सदस्यता और हिंसा से जुड़े आधार पर कनाडा में रहने के लिए अयोग्य माना और बाद में उसे डिपोर्ट कर दिया गया.

जसमेर सिंह को कनाडा में जबरन किसी व्यक्ति को कैद रखने के मामले में दोषी ठहराया गया था. उसे गंभीर आपराधिकता के आधार पर कनाडा में रहने के लिए अयोग्य माना गया और डिपोर्ट किया गया.

अमितोज बाजवा के मामले में CBSA ने उसे ऐसे संगठन की सदस्यता से जोड़ा, जिसके बारे में एजेंसी ने कहा कि वह लगातार आपराधिक गतिविधियों में शामिल था. उसके मामले को हथियारों से जुड़ी गतिविधि और जबरन वसूली से जुड़ी गोलीबारी से भी जोड़ा गया.

साहिबजोत सिंह को भी ऐसे संगठन से जुड़े होने के आधार पर कनाडा में रहने के लिए अयोग्य माना गया. CBSA के मुताबिक उसने संगठन की आपराधिक गतिविधियों के पैटर्न का हिस्सा रहे अपराध करने की बात स्वीकार की थी. इसके बाद उसे कनाडा से हटा दिया गया.

अमेरिका में भी बिश्नोई नेटवर्क की जांच

लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े नेटवर्क की जांच का दायरा कनाडा तक ही सीमित नहीं है. अमेरिका में भी इस नेटवर्क को लेकर जांच चल रही है. अमेरिकी FBI के मुताबिक Lawrence Bishnoi Organized Crime Group एक ट्रांसनेशनल क्रिमिनल ऑर्गनाइजेशन है, जिसकी शुरुआत पंजाब से हुई और जिसने कैलिफोर्निया समेत अमेरिका के दूसरे इलाकों में भी गतिविधियां कीं.

1 जुलाई 2026 को कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत में एक आरोपी, जिसे FBI ने ‘कमल’ के नाम से पहचाना, के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था. उस पर जबरन वसूली के जरिए कारोबार में दखल देने की साजिश का आरोप है. FBI ने इस मामले को Lawrence Bishnoi Organized Crime Group से जोड़ा है.

कई एजेंसियां मिलकर कर रही हैं कार्रवाई

कनाडा में अब इस नेटवर्क और इससे जुड़े संगठित अपराध के खिलाफ कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं. इनमें RCMP, CBSA, CSIS और FINTRAC के साथ-साथ प्रांतीय और स्थानीय पुलिस एजेंसियां शामिल हैं. CBSA के मुताबिक उसकी जांच में पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियों से मिली जानकारी, अपनी जांच और आम लोगों से मिली सूचनाओं का इस्तेमाल किया जाता है.

कार्रवाई के आंकड़े लगातार बढ़े

CBSA के आंकड़ों के मुताबिक, 18 जून 2026 तक उसकी विशेष कार्रवाई में 484 इमिग्रेशन जांच, 139 रिमूवल ऑर्डर और 81 लोगों को कनाडा से हटाए जाने की जानकारी दी गई थी. 3 सितंबर तक रिमूवल ऑर्डर बढ़कर 188 और कनाडा से हटाए गए लोगों की संख्या 111 हो गई. कनाडा सरकार ने सीमा सुरक्षा और संगठित अपराध से निपटने के लिए अतिरिक्त संसाधनों का भी ऐलान किया है, जिसमें 1,000 नए CBSA अधिकारियों की भर्ती के लिए फंडिंग शामिल है.

कनाडा में कितना बड़ा है नेटवर्क?

कनाडा में सामने आए दस्तावेज एक जटिल आपराधिक नेटवर्क की तस्वीर पेश करते हैं. इसमें स्थानीय अपराधी, विदेश में मौजूद आपराधिक नेटवर्क, जबरन वसूली करने वाले लोग और पैसों के लेन-देन में मदद करने वाले बिचौलिए शामिल हो सकते हैं.

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से भेजा गया कथित धमकी पत्र इसलिए अहम है क्योंकि इसमें कनाडा के अंदर बड़े पैमाने पर नेटवर्क होने का दावा किया गया है और सीधे कनाडाई अधिकारियों को धमकी दी गई है. लेकिन 5 हजार सदस्यों और कनाडाई पुलिस से ज्यादा हथियार होने का दावा अभी सत्यापित तथ्य नहीं है.

वहीं, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य यह है कि कनाडा सरकार ने बिश्नोई गैंग को ट्रांसनेशनल क्रिमिनल ऑर्गनाइजेशन के रूप में वर्णित किया है, उसे आतंकवादी इकाई के तौर पर सूचीबद्ध किया है और जबरन वसूली और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ इमिग्रेशन और वित्तीय कार्रवाई बढ़ाई है.

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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