भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नाम 'कांग्रेस' कैसे पड़ा? क्या इसके पीछे अमेरिका की parliament कांग्रेस का प्रभाव था?
यूएस कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों के लिए हुए चुनावों के लिए नतीजे सामने आने शुरू हो गए हैं. जिसमे डेमोक्रेट्स आगे निकलते दिख रही हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि इस US election के साथ एक इंडियन कनेक्शन भी है.
असल में वर्ष 1787 में Philadelphia में Constitutional Convention हुई, जिसने अमेरिकी संविधान को तैयार किया था. इसके बाद वर्ष 1789 में अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) ने विधायी संस्था के रूप में काम शुरू किया. इस तरह 1885 तक 'Congress' शब्द अमेरिका में प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय सभा और राजनीतिक विचार-विमर्श के मंच के रूप में स्थापित हो चुका था.
28 दिसंबर 1885 को मुंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई थी. इसके पहले अधिवेशन में 72 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था. ए.ओ. ह्यूम इस संगठन के गठन के प्रमुख सूत्रधार थे और व्योमेश चंद्र बनर्जी इसके पहले अध्यक्ष बने थे.
कांग्रेस का शुरुआत नाम क्या रखा गया था?
लेकिन कांग्रेस की स्थापना से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य इसके नाम को लेकर है. शुरुआत में इस संगठन का नाम 'Indian National Union' रखने की योजना थी. बाद में इसे बदलकर 'Indian National Congress' कर दिया गया.
इतिहासकारों और कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, 'Congress' शब्द अपनाने के पीछे अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था का प्रभाव था. अमेरिका में 1774 से प्रतिनिधियों की सभाओं के लिए इस शब्द का इस्तेमाल होता रहा था. 1789 में अमेरिकी कांग्रेस ने विधायी संस्था के रूप में काम शुरू किया. बताया जाता है कि कलकत्ता के एक अखबार के संपादक के सुझाव पर ए.ओ. ह्यूम ने 'Union' की जगह 'Congress' शब्द अपनाया. हालांकि, नाम बदलने के पीछे किस व्यक्ति की निर्णायक भूमिका थी, इस पर ऐतिहासिक विवरण एकमत नहीं हैं.
कांग्रेस का शुरुआती मकसद अंग्रेजी शासन के खिलाफ आजादी की लड़ाई शुरू करना नहीं, बल्कि भारतीयों को प्रशासन और शासन में अधिक भागीदारी दिलाना था. धीरे-धीरे यही संगठन देश के स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा राजनीतिक मंच बना. आज इतिहास के झरोखे से हम कांग्रेस शब्द से जुड़ी दिलचस्प घटनाएं विस्तार से बताते हैं.
1. Indian National Congress का शुरुआती नाम Indian National Union क्यों रखा गया था? बाद में इसे बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
यह बात वर्ष 1884 की है, जब एलन ऑक्टेवियन ह्यूम ब्रिटिश सिविल सर्विस से रिटायर हुए थे. भारत के विभिन्न प्रांतों के शिक्षित नेताओं और बुद्धिजीवियों को एक साथ लाने के मकसद से उन्होंने 'Indian National Union' स्थापना की थी. ऐसा करके वे बिखरी हुई प्रांतीय संस्थाओं को एक सूत्र में पिरोना चाहते थे. अपने शुरुआती दौर में यह एक ढीला ढाला संघ रहा, जिसमें शामिल प्रतिनिधि साल में एक बार मिलकर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करते थे.
इस पहला अधिवेशन दिसंबर 1885 को बॉम्बे (अब मुंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुआ. अधिवेशन से ठीक पहले इसके नेताओं में संघ के नाम को लेकर गहन चर्चा हुई. इसकी वजह ये थी कि 'Union' शब्द से केवल एक संगठन या क्लब जैसा बोध होता था, जो किसी राष्ट्रीय स्तर की जन-प्रतिनिधित्व संस्था का एहसास नहीं कराता था. संघ में शामिल नेता चाहते थे कि ऐसा नाम रखा जाए, जो उसे देश के हर हिस्से से आए प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय सभा के रूप में दर्शाए.
2. 'Congress' नाम रखने का सुझाव किसने दिया था? इसमें एओ ह्यूम, दादाभाई नौरोजी और कलकत्ता के अखबार के संपादक की क्या भूमिका थी?
'Indian National Union' का नाम बदलकर 'Indian National Congress' करने का विचार अचानक नहीं आया था. इसके पीछे कई प्रमुख विचारकों का योगदान था. ऐतिहासिक अभिलेखों और इतिहासकारों के मुताबिक, दादाभाई नौरोजी ने 28 दिसंबर 1885 के अधिवेशन में 'Union' शब्द हटाकर 'Congress' शब्द जोड़ने का प्रस्ताव रखा था. असल में, नौरोजी ब्रिटेन और अमेरिका की राजनीतिक शब्दावली को बेहतर तरीके से जानते थे.
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उनका मानना था कि 'Congress' शब्द जनप्रतिनिधियों की उस संस्था को बेहतर ढंग से परिभाषित करता है, जो जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाने का काम करता है. नौरोजी और दूसरे भारतीय नेताओं ने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में प्रतिनिधियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को 'Congress' कहा जाता है, लिहाजा यहां से यूनियन शब्द हटाया जाए. इस तर्क को ह्यूम ने स्वीकार कर लिया.
इस नामकरण में कलकत्ता के अखबार के संपादक सुरेंद्रनाथ बनर्जी की भी अहम भूमिका थी. वे 'द बंगाली' समाचार पत्र के संपादक थे. कलकत्ता प्रेस में अक्सर अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम और वहां की राजनीति से जुड़े लेख छपते रहते थे. संपादकीय लेखों में सुझाव दिया गया था कि भारतीय प्रतिनिधियों की इस राष्ट्रीय बैठक को अमेरिका की तर्ज पर 'Congress' कहना अधिक प्रभावशाली और ऐतिहासिक होगा. इस तर्क ने कांग्रेस के नामकरण को मजबूत किया.
3. क्या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नाम अमेरिकी कांग्रेस से प्रेरित था? इसके समर्थन में कौन-से ऐतिहासिक दस्तावेज और प्रमाण उपलब्ध हैं?
इसका जवाब हां है. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नाम अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था से सीधे तौर पर प्रेरित था. असल में 19वीं सदी में अमेरिका में भिन्न राज्यों/क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों के राष्ट्रीय विचार-विमर्श मंच के लिए 'Congress' शब्द का इस्तेमाल किया जाता था. वहीं से भारत के तत्कालीन बुद्धिजीवियों और नेताओं को भी इस बारे में आइडिया आया.
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ए.ओ. ह्यूम के जीवनीकार और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सर विलियम वेडरबर्न ने अपने कई लेखों में भी इस बारे में बताया कि कांग्रेस की संरचना और नामकरण के पीछे अमेरिकी प्रतिनिधि प्रणाली की झलक थी. यही नहीं, वर्ष 1880 के दशक में छपने वाले द हिंदू, अमृता बाजार पत्रिका, द बंगाली जैसे अखबारों में छपे लेखों से भी साबित होता है कि भारतीय राष्ट्रवादी नेता अमेरिकी क्रांति और 'Continental Congress' के इतिहास से बहुत गहराई से प्रेरित थे. लिहाजा, उन्होंने भारत को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए इ शब्द को संस्था में जोड़ने पर दबाव डाला.
4. वर्ष 1774 की अमेरिकी Continental Congress और 1885 की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठन के उद्देश्यों में क्या अंतर था?
हालांकि, दोनों संस्थाओं ने ही 'Congress' शब्द अपनाया था, लेकिन उनके गठन के उद्देश्यों और परिस्थितियों में बड़ा अंतर था. असल में, 1774 की अमेरिकी Continental Congress का मकसद ब्रिटिश क्राउन के दमनकारी कानूनों व करों का सीधा विरोध करना और 13 अमेरिकी उपनिवेशों को एकजुट करना था.इसका रुख ब्रिटिश सत्ता के प्रति आक्रामक और विद्रोही था. गठन के दो साल के भीतर ही उसने वर्ष 1776 में पूर्ण स्वतंत्रता का ऐलान कर दिया. यह एक क्रांतिकारी संगठन की तरह था. आजादी के आंदोलन के दौरान इसने युद्धकालीन अंतरिम सरकार की तरह काम किया.
आजादी के बाद वर्ष 1787 में फिलाडेल्फिया में संवैधानिक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें आधुनिक अमेरिकी संविधान का ढांचा तैयार हुआ. अमेरिकी संविधान लागू होने के साथ ही 'US Congress' ने एक स्थायी द्वि-सदनीय विधायी संस्था के रूप में काम करना शुरू कर दिया. जिसमें एक हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और दूसरा सीनेट था.
वहीं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उद्देश्य ब्रिटिश शासन के ढांचे के भीतर भारतीयों के लिए प्रशासनिक, विधायी और नागरिक अधिकारों की मांग करना था. उसने अपने शुरुआती सालों में ब्रिटिश शासन के प्रति निष्ठा जताते हुए संवैधानिक सुधारों और याचिकाएं देने का रास्ता अपनाया. इसने अपने आपको राजनीतिक जागरूकता फैलाने वाला संगठन की तरह आगे बढ़ाया, जो विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए साल में एक बार सम्मेलन करता था.
भारत के आजाद होने के बाद कांग्रेस एक राजनीतिक पार्टी के रूप में तब्दील हो गई. जिसने देश में करीब 70 वर्षों तक राज किया. इस दौरान देश को आगे बढ़ाने के लिए उसने कई अहम काम किए तो कई नाकामियों के लिए उसकी आलोचना भी खूब होती रही है. फिलहाल, कांग्रेस पिछले 12 साल से केंद्र की सत्ता से दूर है और अब उसके नेताओं में यह वनवास खत्म करने छटपटाहट बढ़ती जा रही है.