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छिंदवाड़ा में दूधी परियोजना के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, आदिवासी परिवारों को किस बात का डर?

Chhindwara News: तामिया ब्लॉक के चावलपानी गांव में दूधी नदी पर प्रस्तावित बांध से प्रभावित ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है. लगभग 107 गांवों के निवासियों ने राष्ट्रपति और राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य रोकने की मांग की है.

छिंदवाड़ा में दूधी परियोजना के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, आदिवासी परिवारों को किस बात का डर?
Image Credit: छिंदवाड़ा में दूधी परियोजना के खिलाफ आर-पार की लड़ाई

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया ब्लॉक के चावलपानी गांव में दूधी नदी पर प्रस्तावित बांध परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है. बांध से प्रभावित होने वाले लगभग 107 गांवों के निवासी एकजुट हो गए हैं और उन्होंने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है. उन्होंने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तुरंत रोकने की मांग करते हुए तहसीलदार को राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा है. ग्रामीणों का कहना है कि इस बांध से 30 से 40 गांवों के आदिवासी परिवारों पर असर पड़ेगा और उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.

आदिवासी परिवारों को किस बात का डर?
ग्रामीणों का कहना है कि वे बरसों से अपनी खेती और जंगल की जमीन पर काम कर रहे हैं. विस्थापन के डर से उन्होंने मांग की है कि बांध का काम तुरंत रोका जाए और ऐसा फैसला लिया जाए जिससे प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा हो सके. इस बीच, जी मीडिया की एक टीम ने उस जगह का दौरा किया और गांव वालों से बात की. गांव वालों का कहना है कि सरकार या प्रशासन चाहे कितना भी मुआवजा दे, वे बांध के लिए अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे. इस जमीन से उनके बच्चों के बचपन, उनके माता-पिता और उनके बनाए घरों की प्यारी यादें जुड़ी हैं.

ग्रामीणों में काफी भ्रम की स्थिति- तहसीलदार
तहसीलदार संजय मशराम ने बताया कि डूब क्षेत्र में 11 गांव आते हैं और सभी गांवों को आंशिक रूप से विस्थापित किया जा रहा है. इनमें से 5 गांव विस्थापित हो रहे हैं. 2 गांवों में आंशिक विस्थापन हो रहा है, जहां केवल 1 या 2 घर बने हैं. 3 गांवों में नदी के किनारे 6 ढाणियां हैं, जिन्हें विस्थापित किया जा रहा है. ग्रामीणों में काफी भ्रम की स्थिति है, जिसे जल्द ही दूर कर दिया जाएगा.

ग्रामीणों में गहरी चिंता 
इस बांध के बनने से छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम और नरसिंहपुर जिलों पर असर पड़ेगा. घोघरा वॉटरफॉल और वहां आने वाले पर्यटकों से स्थानीय युवाओं को मिलने वाला रोजगार भी खतरे में पड़ सकता है, जिससे ग्रामीणों में गहरी चिंता और नाराजगी है.

छिंदवाड़ा में दूधी परियोजना को लेकर पनप रहा असंतोष, एक तरफ विकास और जल संरक्षण, और दूसरी तरफ जल-जंगल-जमीन से जुड़े रोजगार और भावनात्मक अधिकारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे टकराव को उजागर करता है. जहां ग्रामीण अपने पुश्तैनी घरों, संस्कृति और पर्यटन से जुड़े रोजगार को बचाने के लिए निर्णायक आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि स्थिति केवल गलतफहमियों की वजह से बिगड़ी है. अब यह देखना बाकी है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन बातचीत के जरिए जनता के इस आक्रोश को कैसे शांत करते हैं और प्रभावित आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित करते हैं.
 

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Ranjana Kahar

Ranjana Kahar

रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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