हर नगरपालिकाओं की जिम्मेदारी जन्म-मृत्यु के रिकॉर्ड रखने की होती है. साथ ही शहर की व्यवस्थाएं संभालने में भी अहम भूमिका निभाती है. लेकिन बैतूल जिले में नगरपालिका ने इससे आगे बढ़कर एक मानवता की मिसाल पेश की है. शहर में जिन 13 लोगों की मौत के बाद उनके अपनों ने भी उनकी सुध नहीं ली, जिनके शवों पर दावा करने वाला कोई सामने नहीं आया. उन लावारिस मृतकों की आत्मा की शांति के लिए नगरपालिका ने विधि-विधान से तर्पण कराया है. बैतूल की माचना नदी के घाट पर हुई इस पहन ने समाज को एक भावुक संदेश दिया है.
दरअसल, बैतूल जिले में इंसानियत की ऐसी तस्वीर सामने आई है. जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देगी. सड़क किनारे लावारिस हालत में 13 लोग मृत मिले, जिनके न तो कोई परिजन सामने आया. न ही कोई उनकी पहचान कर सका. नगरपालिका ने इन सभी का अंतिम संस्कार कराया था, लेकिन अब पितृ पक्ष के अंतिम दिन इन मृतकों को याद करते हुए उनके नाम से तर्पण भी कराया गया.
मोक्ष की कामना की गई
नगरपालिका परिषद के अधिकारियों ने माचना नदी के घाट पर विधि-विधान के साथ तर्पण की रस्म पूरी की. इस दौरान अज्ञात मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की गई.
शवों पर किसी ने दावा नहीं किया
मिली जानकारी के मुताबिक, बीते एक साल में बैतूल नगरपालिका इलाके में 13 अज्ञात शव मिले थे. इन शवों पर किसी ने दावा नहीं किया, जिसके बाद नगरपालिका ने उनका अंतिम संस्कार कराया. अब नगरपालिका ने इन मृतकों के लिए तर्पण कर एक ऐसी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई, जो सरकारी कामकाज से आगे बढ़कर मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी है.
तर्पण कराने का प्रयास
नगरपालिका के सीएमओ नवनीत पांडे ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं और पुराणों में भी अज्ञात लोगों का तर्पण करने के पुण्य का उल्लेख मिलता है. इसी भावना के साथ अब हर साल अज्ञात मृतकों का तर्पण कराने का प्रयास किया जाएगा.
अपनत्व का भाव दिखाया
उन्होंने बताया कि जिन लोगों को अंतिम विदाई देने के लिए अपना कोई सामने नहीं आया, उनके लिए बैतूल नगरपालिका ने अपनत्व का भाव दिखाया. यह पहल सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश भी है. इंसान की पहचान भले ही दुनिया से मिट जाए, लेकिन उसके प्रति मानवता का कर्तव्य कभी खत्म नहीं होना चाहिए.
(रिपोर्टः रूपेश कुमार, बैतूल)