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उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है. इसी के चलते बीच में आ रही शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई सोमवार सुबह 8:45 बजे शुरू हुई, जो शाम 7 बजे तक जारी रही. दरअसल, देर रात पुलिस और प्रशासन ने मुस्लिम धर्मगुरुओं और मस्जिद कमेटी के साथ बैठक की थी. इसमें तय हुआ था कि कमेटी के लोग आपसी सहमति से मस्जिद का हिस्सा खुद हटाएंगे. लेकिन इस दौरान कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैला दी कि पूरी मस्जिद पर बुलडोजर चल रहा है. इससे माहौल बिगड़ गया. कुछ उपद्रवियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी और 3 से 4 बार पथराव किया. हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा.
शहर काजी ने जारी किया वीडियो
वहीं, दूसरी भ्रामक जानकारियों को लेकर शहर काजा ने एक वीडियो जारी कर साफ किया कि पुलिस प्रशासन हमारी सहमति से काम कर रहा है. कोई अफवाह न फैलाएं. शहर काजी के इस बयान के बाद कुछ उपद्रवी लोग उनके घर पहुंचे और नारेबाजी की. साथ ही, उन्होंने पत्थरबाजी भी शुरू कर दी. तुरंत ही भारी पुलिस बल ने शहर काजी के घर की सुरक्षा अपने हाथों में ले ली और उपद्रवियों पर लाठीचार्ज किया. दोपहर से ही इलाके में शांति का माहौल बना हुआ था.
शाही मस्जिद पर बड़ा एक्शन
घटनाक्रम के बारे में SP प्रदीप शर्मा ने बताया कि शाही मस्जिद कमेटी के सदस्य आपसी सहमति से सुबह 8:45 बजे से शाम 7:00 बजे के बीच मस्जिद का एक हिस्सा गिराया. यह कार्रवाई लगातार जारी है. हालांकि कुछ नाराज लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण स्थिति को काबू में कर लिया गया. लगभग 2,500 पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात किए गए हैं. इस मामले में कुल आठ FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें से एक शहर काजी ने दर्ज कराई है. काजी के घर के बाहर नारेबाज़ी और हंगामा हुआ था. इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है जिसमें से 3 नामजद है व बाकी अन्य हैं.
5 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर केस
अशांति फैलाने में कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका भी सामने आई है. ऐसे पांच अकाउंट्स के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं और 100 से ज़्यादा कंटेंट हटाए गए हैं. FIR में कुल 20 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से 15 को गिरफ्तार कर लिया गया है.
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की
जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि सड़क चौड़ी करने का काम मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है. समिति के सदस्य खुद ही मस्जिद का हिस्सा हटा रहे हैं. सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और ऐसे लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. लोगों को सोशल मीडिया पर मिलने वाली गलत जानकारी को न तो सच मानना चाहिए और न ही उसे आगे फैलाना चाहिए. हाई कोर्ट ने शाही मस्जिद से जुड़ी एक याचिका खारिज कर दी और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के पक्ष में फैसला सुनाया.