)
उज्जैन में शाही मस्जिद का एक हिस्सा तोड़े जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इसकी वजह से तनाव इतना बढ़ गया कि इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल को तैनात करना पड़ा. अब यह मामला राजनीतिक तूल भी पकड़ता जा रहा है. मस्जिद के अवैध हिस्से को हटाए जाने के विरोध में स्थानीय लोग सड़क पर आ गए. इन लोगों के समर्थन में कई राजनेता और राजनीतिक दल भी सामने आ गए हैं. आइए इस विवाद में धर्म के अलावा कानूनी पहलुओं के बारे में भी जानते हैं, कि भूमि अधिग्रहण कानून क्या कहता है?
इस मस्जिद के अवैध हिस्से को तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए मुस्लिम पक्ष ने एमपी हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की थी. लेकिन इस पर एमपी हाईकोर्ट की इंदौर डबल बेंच ने रोक लगाने से इनकार करते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया है. बताया जा रहा है कि कोर्ट के आदेश के बाद इस हिस्से पर फिर से कार्रवाई होगी.
क्यों हो रहा सड़क चौड़ीकरण?
दरअसल, साल 2028 में उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होने जा रहा है. इसी के चलते पूरे शहर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं के चलते उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है. इस अभियान के तहत शहर के कंठाल, तेलियावाड़ा और सराफा जैसे इलाकों में चौड़ीकरण का काम पहले ही हो चुका है.
21 सितबर से सर्वे-मार्किंग जारी
वहीं खजूर वाली मस्जिद से लेकर गणेश चौक तक 900 मीटर लंबी सड़क को भी 15 मीटर चौड़ा किया जाना है. इसके लिए 21 सितंबर 2026 से चौड़ीकरण को लेकर सर्वे और मार्किंग का काम शुरू हो गया था. करीब 272 भवन इसकी जद में आ रहे हैं. इनमें से कई घरों और इमारतों को तोड़ा जा चुका है. यहां तक कि मुख्यमंत्री मोहन यादव का पुश्तैनी घर भी इसकी जद में आ गया है.
जद में सीएम का भी घर आया
27 सितंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव अब्दालपुरा स्थित अपने पुश्तैनी घर पहुंचे. यहां उन्होंने पैतृक घर के बाहर पूजा-अर्चना की. इसके बाद खुद गैंती चलाकर विकास कार्य की शुरुआत की. इसी सर्वे के दौरान शाही मस्जिद का एक हिस्सा भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आया है. इसी को लेकर अब विवाद की स्थिति बन गई है.
ये भी पढ़ेंः जिस घर में बीता बचपन, उसी पर चलानी पड़ी गैंती, आंखों में आंसू लिए बोले CM मोहन, 'पिताजी ने मेहनत से बनवाया था मकान'
शाही मस्जिद का हिस्सा आया
इस अभियान के तहत कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक 900 मीटर लंबी सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है. इस अलाइनमेंट में शाही मस्जिद का एक हिस्सा आ रहा है, जिसमें 120 फीट ऊंची मीनार और नमाज अदा करने वाला हिस्सा शामिल है. इसे हटाने को लेकर रविवार रात प्रशासन और शहर काजी के बीच सहमति बनने की बात सामने आई थी. तय हुआ था कि मस्जिद कमेटी खुद इस निर्माण को हटाएगी.
फिर कैसे बिगड़े हालात?
लेकिन सोमवार सुबह जैसे ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची, हालात बिगड़ गए. शाही मस्जिद के बाहर भीड़ जमा हो गई. तनाव इतना बढ़ गया कि शरारती तत्वों ने पुलिस के ऊपर पथराव भी किया. स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस की तरफ से आंसू गैस छोड़ी गई और हल्का बल का भी प्रयोग किया गया. वहीं मौके पर लगभग 2000 पुलिसकर्मियों को तैनात भी किया गया. हालांकि, नमाज के समय इसे रोक दिया गया. इसके बाद मामला शांत हो गया. पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लिया है. इसके अलावा, 7 लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है. इनमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शामिल हैं. इन पर माहौल बिगाड़ने का आरोप है.
रात में सहमति से सुलझ गया
इसको लेकर शहर काजी खलीलुर्रहमान ने कहा कि, मस्जिद का मामला रात में ही आपसी सहमति से सुलझ गया था. ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिसके लिए किसी को वहां जाने की आवश्यकता हो. जिस कार्य को पूरा करने का संकल्प लिया गया है, उसे पूरा किया जा रहा है. सभी से अपील है कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और अफवाहों के कारण घर से बाहर निकलकर अनावश्यक रूप से मौके पर न जाएं.
उज्जैन शहर काजी खलीलुर्रहमान ने जारी किया वीडियो संदेश, शाही मस्जिद कमेटी खुद अपने हाथों से मस्जिद तोड़ रहे हैं, कुछ लोग सोशल मीडिया पर फिजूल माहौल बना रहे हैं शहर अपना है इसकी हिफाजत भी हमें करना है... । @CMMadhyaPradesh https://t.co/B8CePgSQuE
— Collector Ujjain (@collectorUJN) September 28, 2026
कलेक्टर की लोगों से अपील
वहीं कलेक्टर रोशन सिंह ने भी लोगों से अपील की है कि किसी अफवाह पर ध्यान न दें. उन्होंने कहा कि 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने जा रहा है, इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है. इनकी सुविधाओं के लिए मास्टर प्लान के अनुरूप सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है. इसके अलावा, अन्य विकास कार्य भी किए जा रहे हैं. उन्होंने सभी धर्मों और समाजों के लोगों से स्वेच्छा से सहयोग की अपील की है.
किसी भी अफवाहों पर ध्यान न दें
उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले मकान, दुकानें, धार्मिक स्थलों को समाजजनों द्वारा स्वेच्छा से हटाया जा रहा है. इसी क्रम में छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद का हिस्सा भी हटाया जा रहा है. यह सभी समाजों के सहयोग और समन्वय की सकारात्मक मिसाल है. उन्होंने लोगों से कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें. इसके अलावा, शांति और सद्भाव बनाए रखें.
ये भी पढ़ेंः उज्जैन शाही मस्जिद पर कैसे बिगड़े हालात? रात में शहर काजी ने दी रजामंदी, फिर अचानक कहां से आई बेकाबू भीड़, जानिए पूरी कहानी
समाज के लोगों को मत भड़काईए
मध्य प्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि, उज्जैन की शाही मस्जिद को ना तो शहीद किया जा रहा है और ना ही विस्थापित किया जा रहा है. मस्जिद का जो हिस्सा चौड़ीकरण के रास्ते में आ रहा है, सिर्फ उसे समाज और मस्जिद कमेटी द्वारा खुद तोड़ा जा रहा है. उन्होंने बताया कि प्रशासन के साथ बैठक में शहर काजी और मुस्लिम समाज के तमाम वरिष्ठ लोगों ने मिलकर रविवार को यह तय किया था कि समाज के लोग ही मस्जिद के उसे हिस्से को हटाएंगे. प्रशासन इसे नहीं हटाएगा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग भड़काने का काम कर रहे हैं, तो ऐसे लोगों से कहना चाहता हूं, कि समाज के लोगों को मत भड़काईए.
असदुद्दीन ओवैसी पर क्या बोले?
उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर कहा कि, ओवैसी साहब शाही मस्जिद नहीं हट रही है. आप लोगों को भड़काने का काम मत कीजिए. इसमें वक्फ कानून कहां से आ गया? कानून में कहीं भी नहीं है कि आप अपने हक के लिए आवाज ना उठाये या न्यायालय ना जाएं. इस मामले में भी मस्जिद से जुड़ी हुई कमेटी और पंच मोचीयान समाज न्यायालय में गए. अंत में शहर और समाज के हित में मस्जिद का कुछ हिस्सा जिसमें कुछ दुकाने हैं, मीनार है उसे हटाने के लिए समाज के लोगों ने प्रशासन के साथ बैठकर तय किया है. आप लोगों को भड़काना बंद कीजिए.
मैं उज्जैन की अवाम को सलाम करता हूँ, जो Shahi Masjid बचाने के लिए Peaceful Protest कर रही है। https://t.co/2UR6y2CtT8
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) September 27, 2026
असदुद्दीन ओवैसी ने क्या कहा ?
वहीं इस मामले पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि, 'मैं उज्जैन की अवाम को सलाम करता हूं, जो शाही मस्जिद बचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रही है. आप इस तरीके से मस्जिदों को शहीद नहीं कर सकते, नया वक्फ संशोधन कानून है, उसके जरिए कलेक्टर, सरकार को पावर दिए जा रहे हैं. इसका मकसद एक ही कि मस्जिदों और दरगाहों को मुसलमानों से छीन लिया जाए. संशोधन का मकसद वक्फ को बचाना नहीं था.'
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर उज्जैन शाही मस्जिद को तोड़ने की प्रशासनिक कवायद को थोड़ा संवेदनशील होना चाहिये। 600 साल पुरानी धरोहर को सिर्फ सड़क चौड़ीकरण और विकास के नाम पर ध्वस्त कर देना तो नफ़रत की पराकाष्ठा है। मेरे संज्ञान में आया है कि मामला जब न्यायालय में लंबित है तो फिर प्रशासन बार बार मस्जिद की घेराबंदी करके आख़िर क्या संदेशा देना चाहता है ? उज्जैन के हज़ारों युवा लगातार इस मुद्दे पर आवाज़ उठा रहे हैं। उज्जैन प्रशासन से मेरा अनुरोध है कि जन भावनाओं का सम्मान करिये और सड़क चौड़ीकरण के लिये आवश्यक ज़मीन दूसरी साइड से ले लीजिये। इतनी एैतिहासिक धरोहर को तोड़ा जाना कहीं से भी सामान्य घटना नहीं मानी जायेगी। @DrMohanYadav51
— Imran Pratapgarhi (@ShayarImran) September 28, 2026
इमरान प्रतापगढ़ी की भी प्रतिक्रिया
इतना ही नहीं, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर उज्जैन शाही मस्जिद को तोड़ने की प्रशासनिक कवायद को थोड़ा संवेदनशील होना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि 600 साल पुरानी धरोहर को सिर्फ सड़क चौड़ीकरण और विकास के नाम पर ध्वस्त कर देना तो नफरत की पराकाष्ठा है. उनका कहना है कि जब यह मामला मेरे संज्ञान में आया है कि मामला कोर्ट में लंबित है, तो फिर प्रशासन बार-बार मस्जिद की घेराबंदी करके क्या संदेश देना चाहता है?
आखिर विरोध क्यों हो रहा?
दरअसल, यह विरोध मस्जिद के करीब 11 फीट हिस्से को हटाने को लेकर हो रहा है. शाही मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम का कहना है कि मस्जिद का ढांचा बहुत ही पुराना है. यह पूरा नाजुक है, इसलिए इसे नुकसान पहुंचने का खतरा है. वहीं मस्जिद कमेटी के भीतर भी अलग-अलग रुख सामने आए हैं. एक पक्ष कार्रवाई का विरोध कर रहा है, जबकि दूसरा प्रभावित हिस्सा हटाने को तैयार है.
इस मस्जिद का इतिहास
मस्जिद प्रबंधन का कहना है कि इस मस्जिद से जुड़े 17 मार्च 1925 के दस्तावेजों में भूमि अधिग्रहण के बाद मस्जिद के बाकी हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख है. यह लगभग 636 साल पुरानी शाही मस्जिद है. इस मस्जिद को उज्जैन की ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है. उनका कहना है कि मौजूदा सड़क चौड़ीकरण में पूरी मस्जिद नहीं, बल्कि करीब 11 फीट हिस्सा प्रभावित हो रहा है. इसी सड़क के अलाइनमेंट में खड़े हनुमान मंदिर से गोपाल मंदिर के बीच एक मजार भी आ रही है.