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राजधानी भोपाल के रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले पर मंगलवार, 15 सितंबर को एक अहम सुनवाई होनी थी. लेकिन जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण आज यह सुनवाई नहीं हो सकी. अब सुनवाई कब होगी, इसके लिए अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है. शहर भर के हजारों व्यापारी और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारी बेसब्री से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. इससे पहले 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद नगर निगम ने 8,264 नोटिस जारी किए थे और लगभग 100 दुकानों को सील कर दिया था.
नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई पर उठे सवाल
सीलिंग कार्रवाई से नाराज कोलार समेत शहर भर के बाजार बंद हो गए थे और व्यापारी सड़कों पर उतर आए थे. हालांकि, व्यापारियों के भारी विरोध और कई बाजारों के बंद होने के बाद नगर निगम की कार्रवाई पिछले 14 दिनों से पूरी तरह रुकी हुई है और कोई नया नोटिस जारी नहीं किया गया है. इस बीच, याचिकाकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने नगर निगम के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं. अरेरा कॉलोनी के E-4 और E-7 सेक्टर का हवाला देते हुए शिकायतें की गई हैं कि निगम द्वारा सील की गई दुकानें रात होते ही फिर से खुल रही हैं.
सीलिंग के बाद भी खुल रहीं दुकानें
आरोप है कि नगर निगम जिन जगहों को बंद या सील करने का दावा करता है, वे शाम होते ही फिर से चालू हो जाती हैं. निवासियों ने कॉर्पोरेशन से शिकायत की है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है. वहीं नगर निगम आज कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा. इसके अलावा, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बड़ा तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) तय करने से जुड़े मामले की सुनवाई करेगा.
सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई
बता दें कि इससे पहले 6 अगस्त को सुनवाई हुई थी. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ 1,000 दुकानों का सर्वे करने के लिए नगर निगम और सरकार को फटकार लगाई और उन्हें कार्रवाई करने की पूरी छूट दी थी. इसके बाद निगम ने 8,264 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए और उनमें से लगभग 195 के खिलाफ सीलिंग या औपचारिक निरीक्षण की कार्रवाई की गई. रिहायशी इलाकों में 62,000 प्रतिष्ठान चल रहे हैं जिनकी पहचान की गई है. इस स्थिति को देखते हुए, आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को बहुत अहम माना जा रहा है.
उधर, नगर निगम ने नीलबड रोड पर एक ढाबे को पहले सील कर दिया था, लेकिन 13 सितंबर को खाद्य विभाग की टीम को वह खुला मिला. इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने समिति ने कमिश्नर से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच की मांग की है.