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मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के ग्राम पंचायत ओड़नी में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी की शिकायत की गई है. शिकायतकर्ता अनिल सिंह का आरोप है कि पंचायत के रिकॉर्ड में मृत व्यक्ति के नाम पर मजदूरी का भुगतान किया गया. वहीं स्कूलों में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों के नाम पर भी मनरेगा की राशि निकाली गई. मामले में शिकायत के बाद जिला पंचायत सीईओ ने जांच के निर्देश दिए हैं.
शिकायतकर्ता अनिल सिंह के मुताबिक, केकराव निवासी बड़का कोल की मौत 10 अप्रैल 2022 को हो गई थी, लेकिन 13 जनवरी 2024 के मस्टर रोल में उनका नाम दर्ज कर मजदूरी की राशि निकाल ली गई. इसके अलावा, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि केकरांव के रहने वाले कमला प्रसाद प्रजापति, जो सिलगुड़ी के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में अतिथि शिक्षक के रूप में काम करते हैं. इसके बावजूद, उनका नाम मस्टर रोल में मजदूर के तौर पर दर्ज है. उन्हें मजदूर बताकर 29 फरवरी से 2 मार्च और 7 मार्च से 13 मार्च 2024 की अवधि के लिए मनरेगा योजना के तहत मजदूरी का भुगतान किया गया है.
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खटाई के अतिथि शिक्षक लाल बहादुर सिंह के नाम पर भी मनरेगा भुगतान में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है. वहीं बरका कोल पिता देशवंत कोल और कमला प्रसाद प्रजापति को 10-10 दिनों का काम मस्टर रोल में दर्ज किया गया. इसके आधार पर हर व्यक्ति के नाम पर 2,330-2,330 रुपए की मजदूरी निकाली गई.

मामला प्रधानमंत्री आवास योजना से भी जुड़ा है. शिकायतकर्ता अनिल सिंह का आरोप है कि अविवाहित अजय कुमार सिंह की समग्र आईडी में कथित तौर पर फर्जी पत्नी का नाम जोड़कर नया परिवार बनाया गया और उन्हें आवास योजना का लाभ दिलाया गया. रोजगार सहायक अभिमन्यु सिंह पर अपने चचेरे भाई अजीत कुमार सिंह को भी नियमों के विरुद्ध आवास योजना का लाभ दिलाने का आरोप लगाया गया है.

शिकायतकर्ता अनिल सिंह का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अनिल सिंह ने 25 मई 2026 को उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की. उन्होंने बताया कि अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है. हालांकि अब नवंबर में सुनवाई की तारीख तय होने की उम्मीद है.
वहीं जिला पंचायत सिंगरौली के सीईओ संघप्रिय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए चितरंगी जनपद पंचायत के सीईओ को जांच के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि जांच में गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित रोजगार सहायक से राशि की वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.