मध्य प्रदेश में इस साल कमजोर मानसून और बेरुखी की वजह से कई जिलों में कम बारिश हुई है, जिस वजह से राज्य के बड़े हिस्से पर सूखे का संकट मंडराने लगा है. प्रदेश के करीब 11 जिले ऐसे हैं, जहां में जलस्तर तेजी से नीचे गिरा है और बारिश का आंकड़ा सामान्य से बेहद कम दर्ज किया गया है. मौसम विभाग और भू-जल संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून सीजन के अंतिम दौर में भी उम्मीद के मुताबिक बारिश न होने से मालवा और निमाड़ अंचल के जिलों में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं.
मध्य प्रदेश में सबसे खराब स्थिति पश्चिमी हिस्से के जनजातीय बहुल जिले आलीराजपुर की है, जहां इस सीजन में सामान्य की तुलना में 52 प्रतिशत कम बारिश हुई है. बारिश की कमी के मामले में आलीराजपुर के साथ धार और झाबुआ जिले भी राज्य के सबसे कम वर्षा वाले 'टॉप-5' जिलों में शामिल हो चुके हैं.
11 में 9 जिले सूखाग्रस्त घोषित होने की स्थिति के बेहद करीब
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश के 11 में से 9 जिले इस समय आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित होने की स्थिति के बेहद करीब पहुंच गए हैं. इनमें इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर प्रमुख रूप से शामिल हैं. इसके अलावा शाजापुर और पांढुर्णा जिलों में भी बारिश का अंतर सामान्य से 3 फीसदी कम रह गया है, जिससे वहां भी संकट गहरा रहा है.
कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा और भयावह असर
मानसून की इस बेरुखी और बारिश की भारी कमी का सीधा और भयावह असर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिखाई पड़ सकता है. जहां एक तरफ पीने के पानी का संकट गहराने लगा है, तो दूसरी तरफ खेतों में खड़ी सोयाबीन, मूंग, उड़द और मक्का जैसी मुख्य खरीफ फसलें पानी के अभाव में दाने पकने से पहले ही सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं.
किसानों ने महंगी दरों पर बीज और खाद खरीदकर बुआई की थी, उन्हें अब लागत तक निकलने की चिंता सता रही है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खरीफ सीजन में जलाशयों और भू-जल स्तर का पुनर्भरण नहीं हुआ, तो रबी सीजन में भी सिंचाई और पानी की समस्याएं बढ़ना तय माना जा रहा है. आने वाले रबी सीजन में गेहूं और चने जैसी फसलों की सिंचाई के लिए पानी मिलना नामुमकिन हो जाएगा.
गर्मी के दिनों में स्थिति और अधिक भयावह होने की आशंका
फसलों के साथ-साथ इन 11 जिलों के ग्रामीण और शहरी इलाकों में पीने के पानी (पेयजल) का संकट भी समय से पहले दस्तक देने लगा है. कई जगहों पर तालाब, बावड़ियां और स्थानीय नदियां अक्टूबर के महीने में ही सूखने लगी हैं, जिससे आने वाले गर्मी के दिनों में स्थिति और अधिक भयावह होने की आशंका है.
MP में करीब 100 दिन एक्टिव रहा मानसून
मध्य प्रदेश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन एक्टिव रहा. आधिकारिक तौर पर मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री 24 जून को हुई थी और मानसून ने 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से विदाई ले ली है. पूरे सीजन में मध्य प्रदेश में करीब 35.8 इंच यानी 908.4 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य बारिश का 95.9 प्रतिशत है. यानी इस साल सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम हुई है, जो ओवरऑल करीब 4 प्रतिशत है.