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सतना की केंद्रीय जेल में जेल प्रशासन ने मानवता की मिसाल पेश की है. गांधी जयंती के मौके पर 7 कैदियों की रिहाई की गई है. इनमें से दो कैदी जेल से लखपति बनकर निकले हैं. इन दोनों कैदियों को 1-1 लाख से ज्यादा रुपए देकर जेल से छोड़ा गया है. आइए आपको दोनों कैदियों की कहानी के बारे में बताते हैं, कि इन्हें इतने रुपए क्यों दिए गए हैं.
दरअसल, सतना जेल में गुनाहों की सजा काट रहे कैदियों के आजीवन कारावास की सजा पूरी होने पर उन्हें जेल से आजादी दी गई है. इसी के तहत गांधी जयंती के खास मौके पर रिहा कर दिया गया है. यह सभी कैदी 302 हत्या के जैसे बड़े अपराध में जेल में आजीवन कारावास की सजा पूरी कर चुके हैं. बताया जा रहा है कि इन कैदियों के जेल के अंदर अच्छे आचरण और किए गए अच्छे काम को लेकर उन्हें जेल से आजादी मिली है.
कहां के रहने वाले कैदी ?
इसमें सबसे खास बात यह है कि जेल रहकर पारिश्रमिक रूप से अपनी सेवाएं देने पर दो बंदियों को लाख रुपए से ज्यादा राशि दी गई है. रिहाई होने वाले कैदी पूरी की लिस्ट इस प्रकार है.
1. संतोष चौधरी, मैहर
2. धर्मेंद्र उर्फ धम्मू मिश्रा, छतरपुर
3. बंदिनी शहनाज खान पिता मान खान, पन्ना
4. लाल उर्फ विरोचन लोधी, पन्ना
5. मुन्नू प्रजापति, पन्ना
6. गिरधारी प्रजापति, पन्ना
7. लोकेन्द्र सिंह, पन्ना
दो कैदियों को 1 - 1 लाख
इनमें से दो कैदी ऐसे हैं, जिन्हें 1-1 लाख रुपए से ज्यादा राशि देकर जेल से रिहा किया गया है. पहला पन्ना जिले के रहने वाले लोकेंद्र सिंह ने जेल में रहकर पारिश्रमिक के रूप में 1 लाख 11 हजार 524 रुपए का काम किया है.
सभी कैदियों को 1-1 पौधा
वहीं दूसरा कैदी मैहर जिले के रहने वाला संतोष चौधरी 1 लाख 11 हजार 972 रुपए दिए गए हैं. इतना ही नहीं जेल अधीक्षक लीना कोष्टा ने सभी कैदियों को 1-1 फलदार पौधा भी दिया. उन्होंने कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जुड़कर जीवन में अच्छे काम करने की प्रेरणा दी है.
जेल अधीक्षक ने क्या कहा?
इस मौके पर जेल अधीक्षक लीना कोष्टा ने कहा कि आज 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर सात कैदियों को रिहा किया गया है. उन्होंने बताया कि इनमें एक महिला बंदी और 4 खुली जेल के कैदी थे, जो आज रिहा किए गए हैं. उन्होंने कहा कि सभी कैदी 302 में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे, जिनकी आज रिहाई हुई है.
महिला कैदी को 57000 रु.
जेल अधीक्षक ने आगे कहा कि दो कैदियों लोकेंद्र और संतोष को 1,11000 रुपए के आसपास पारिश्रमिक राशि देकर रिहा किया गया है. उनको एक-एक पौधा दिया गया, उनके कहा कि एक-एक पौधा अपने घर में लगाना है. वहीं उन्होंने बताया कि एक महिला कैदी शहनाज को भी 57000 रुपए की पारिश्रमिक राशि देकर छोड़ा गया है. (रिपोर्टः संजय लोहानी, सतना)