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मध्य प्रदेश के सिवनी से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां जिला अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. मिली जानकारी के मुताबिक, 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच यानी छह महीने में अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में करीब 80 नवजातों की मौत हुई है. मृत शिशुओं के परिजनों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं. इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब बीजेपी विधायक दिनेश राय मुनमुन ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया.
दरअसल, सिवनी विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक दिनेश राय मुनमुन एक दिन अचानक अस्पताल के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने SNCU का रिकॉर्ड चेक किया, जहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था. तब नर्सों ने SNCU के रिकॉर्ड के आधार पर 46 नवजातों की मौत की जानकारी दी. मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग की आयुक्त को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है.
80 नवजातों की मौत की पुष्टि
इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) पंकज दुबे ने SNCU का रिकॉर्ड चेक किया, तो 80 नवजातों की मौत दर्ज होने की बात सामने आई. उन्होंने भी इन मौतों की पुष्टि की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम का भी गठन किया गया है. CMHO का कहना है कि 1 अप्रैल से लेकर 30 सितंबर के बीच SNCU में कुल 1,008 नवजातों का इलाज किया गया था.
मृत्यु दर को बताया सामान्य
CMHO पंकज दुबे ने बताया कि SNCU में कम वजन, संक्रमण और सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे नवजातों को भर्ती किया जाता है. उन्होंने कहा कि SNCU में दर्ज नवजातों की मृत्यु दर करीब 8 प्रतिशत है, जबकि शासन के निर्धारित मानकों के मुताबिक 10 प्रतिशत तक की मृत्यु दर को सामान्य माना जाता है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी.
लापरवाही के आरोप
वहीं, 80 नवजातों की मौतों का मामला अब राजनीतिक तूल भी पकड़ रहा है. कांग्रेस प्रदेश सचिव राजा बघेल ने नवजातों की मौत को गंभीर मामला बताते हुए अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. उन्होंने जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है.
सख्त कार्रवाई की मांग
साथ ही, जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार खुराना ने भी मामले की बारीकी से जांच कराने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि अस्पताल से दूसरे संस्थानों में रेफर किए जाने वाले बच्चों की स्थिति का भी पूरा हिसाब सामने आना चाहिए. उन्होंने आशंका जताई कि रेफर किए गए बच्चों की स्थिति का संज्ञान लेने पर मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है. खुराना ने मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
(रिपोर्टः प्रशांत शुक्ला, सिवनी)