'प्रेम-प्रसंग का दावा बिल्कुल झूठा, 2 साल से मिलने नहीं दिया'— प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की मौत पर परिजनों का बड़ा खुलासा
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी उर्फ दीपक पटेल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अब तक FIR नहीं हुई है, क्योंकि पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. इस बीच उनके परिजनों ने कथित तौर पर फैलाए जा रहे 'प्रेम-प्रसंग' के दावों को भी पूरी तरह खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी उर्फ दीपक पटेल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मामला लगातार गहराता जा रहा है. एक तरफ जहां इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं किया है, वहीं दूसरी ओर रसिक दुलारी के परिजनों ने आश्रम प्रशासन और सुरक्षा गार्ड्स पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. परिजनों ने कथित तौर पर फैलाए जा रहे 'प्रेम-प्रसंग' के दावों को भी पूरी तरह खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है. परिजनों ने पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस मामले में किसी के दबाव में आए बिना निष्पक्ष जांच की जाए. उन्होंने मांग की है कि आश्रम के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं और घटना के वक्त मौजूद सेवादारों और सुरक्षाकर्मियों से सख्ती से पूछताछ हो.
रसिक दुलारी के परिजनों का कहना है कि वे पिछले दो सालों से उनसे मिलने की लगातार कोशिश कर रहे थे, लेकिन आश्रम के सेवादार और सुरक्षाकर्मी उन्हें मिलने नहीं देते थे. परिजनों का कहना है कि हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें लौटा दिया जाता था. परिजनों ने सवाल उठाया है कि आखिर एक साधु को उसके परिवार से दूर रखने के पीछे क्या मंशा थी? आश्रम परिसर की चौथी मंजिल से गिरकर हुई मौत की बात परिजनों के गले नहीं उतर रही है. उनका साफ कहना है कि रसिक दुलारी कभी ऐसा कदम नहीं उठा सकते थे. परिजनों ने इस बात पर भी कड़ा एतराज जताया है कि उनकी मौत को 'प्रेम-प्रसंग' से जोड़कर पेश करने की कोशिश की जा रही है.
पुलिस ने अब तक क्यों दर्ज किया FIR?
रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत के मामले में अब तक FIR नहीं हुई है. पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. रिपोर्ट आने में समय लग सकता है. रसिक दुलारी की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत में सीबीआई जांच की भी मांग उठ रही है. उनके परिजनों के अलावा वृंदावन के कई संतों का कहना है कि सीबीआई जांच से ही सच सामने आएगा.
सीसीटीवी में दिख रहा दूसरा शख्स कौन?
इस बीच रसिक दुलारी के चौथी मंजिल से कूदने का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें वो बाउंड्री वॉल पर बैठे और फिर फर्श पर लेटे नजर आ रहे हैं. इसके बाद अचानक उठते हैं और बाउंड्री पर चढ़कर छलांग लगा देते हैं. फुटेज में एक दूसरा शिष्य भागकर दौड़ता आता दिख रहा है, जो बाद में नीचे झांककर देखता है. सीसीटीवी में नजर आ रहा दूसरा साधक भी इसी बिल्डिंग में रहता था. इसकी पहचान हो चुकी है, लेकिन डिटेल्ड मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी, क्योंकि शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वहज एक्सेस ब्लीडिंग थी.
प्रेम-प्रसंग का दावा बिल्कुल झूठा...
रसिक दुलारी उर्फ दीपक का किसी लड़की से अफेयर या प्रेम-प्रसंग की परिजनों ने अफवाह बताया है. उनके रिश्तेदार रोहिणी प्रसाद ने कहा, 'ये सब अफवाह है. इसमें किसी की सांठगांठ चल रही है, जो आश्रम को बदनाम करने के चक्कर में है. दीपक ऐसा लड़का नहीं था, क्योंकि जब से हमारे बच्चे की शादी हुई है, तब से हम उसके साले को बहुत अच्छे से जानते हैं. इस चीज का उसका विचार था ही नहीं. भैया जी सरकार के साथ वो एक बार परिक्रमा किया है और इसके बाद में फिर घर में भी रहा है. भजन-पूजन में उसकी बहुत ज्यादा रुचि थी.'
उन्होंने आगे बताया, 'जब वो आश्रम में अंदर रहते थे, तो गार्ड के अलावा किसी को जाने की अनुमति ही नहीं थी. अगर अनुमति मिलती तो मां-बाप या परिजन जाकर मिलते. एक बार भी 2 साल के पीरियड में मुलाकात तो होती, या कहीं से भी कोई भी अगर बाहर निकलता तो बात होती या कहीं से भी वो बात करता. और ऐसी कोई बात होती, तो उसकी शादी करने के लिए हम लोग सब सहमत थे. वो शादी करने से बिल्कुल इंकार कर दिया था और जाके साधु बन गया.'
2 साल से मिलने नहीं दे रहे थे सेवादार
रसिक दुलारी से मुलाकात के सवाल पर उनके भाई मनीष पटेल ने बताया कि 2 साल में कई बार मिलने गए, लेकिन एक बार भी मिलने नहीं दिया गया. आश्रम में जाकर पता किए, तो बताया गया कि अभी सेवा में हैं, अभी नहीं मिल सकते. मिलने से कौन रोकता था, इस सवाल पर उन्होंने बताया कि आश्रम के बाहर लगे कर्मचारी रोक देते थे और बोलते थे कि सेवा में हैं. कल आना.
रसिक दुलारी के भाई ने आगे बताया कि कई बाद ऐसा भी बोले कि थोड़ी देर इंतजार करो, हम अभी बता रहे हैं. फिर बहुत देर बार इंतजार करने के बाद उन लोगों ने बताया कि वो गुरुजी की सेवा में हैं, अभी नहीं मिल पाएंगे, आप लोग कल आना. दूसरे दिन गए तो भी नहीं मिल पाए. बाहर खड़े गार्ड्स आश्रम के अंदर नहीं जाने देते थे. 2 साल से हमारा कोई संपर्क नहीं हुआ था.
परिवार की मौजूदगी में हुई थी दीक्षा
दीपक के नाना प्रेम लाल पटेल बताते हैं कि शुरू से ही दीपक की आध्यात्म में रुचि रही और यही कारण है कि वह लगातार पूजा पाठ भी करते रहे. इसके बाद उन्होंने वृंदावन जाने की ठान ली. नाना के मुताबिक, दीपक के दीक्षा लेने के वक्त आश्रम के नियमों के तहत खुद उनके माता-पिता वहां मौजूद थे और उनकी उपस्थिति तथा लिखा-पढ़ी के बाद ही दीक्षा की प्रक्रिया पूरी की गई थी. इसके अलावा, नाना ने यह भी स्पष्ट किया कि आश्रम से दीपक के मोबाइल नंबरों का विवरण दर्ज किया गया था और उन नंबरों के जरिए परिजनों का लगातार संपर्क और जानकारी बनी हुई थी. हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि पिछले करीब डेढ़ साल से उनकी दीपक से कोई सीधी मुलाकात नहीं हो सकी थी.
26 सितंबर को हुई थी मौत
मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले दीपक पटेल ने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी और इसके बाद उनका नाम रसिक दुलारी शरण मिला था. वो पिछले 2 साल से वृंदावन में केली कुंज आश्रम में रह रहे थे और 26 सितंबर को उनकी वृंदावन में आश्रम की एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरकर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. इस पूरे घटनाक्रम के बाद उनके गांव परसवाड़ा में मातम पसरा हुआ है.
(रिपोर्ट- कुलदीप बबेले)