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MP में रीलबाज पुलिसकर्मियों पर सख्ती: वर्दी में वीडियो बनाया तो होगी कार्रवाई, ChatGPT पर डाटा शेयर करना भी बैन

MP News: मध्य प्रदेश में पुलिस अधिकारियों को अब वर्दी में रहते हुए इंस्टाग्राम रील्स या वीडियो पोस्ट करने की इजाजत नहीं होगी. जो लोग ड्यूटी के दौरान या बाद में चाहे यूनिफॉर्म में हों या अशोभनीय वेशभूषा में सोशल मीडिया पर पोस्ट करेंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

MP में रीलबाज पुलिसकर्मियों पर सख्ती: वर्दी में वीडियो बनाया तो होगी कार्रवाई, ChatGPT पर डाटा शेयर करना भी बैन
Image Credit: AI जनरेटेड फोटो

मध्य प्रदेश में वर्दी का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर रील्स बनाने और कमाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने कड़ा रुख अपनाया है. महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाणा ने सभी पुलिस इकाइयों के लिए विस्तृत सोशल मीडिया गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसके तहत अब वर्दी में रील्स बनाकर लाखों रुपये कमाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

वर्दी में वीडियो बनाने और पोस्ट करने पर लगा प्रतिबंध
नियमों के मुताबिक, अब पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या बाद में वर्दी अथवा अशोभनीय वेशभूषा में सोशल मीडिया पर रील्स, फोटो या वीडियो पोस्ट नहीं कर सकेंगे. शासन की अनुमति के बिना किसी भी तरह के पेड प्रमोशन और मॉनेटाइजेशन पर प्रतिबंध रहेगा. अगर कोई पुलिस अधिकारी सोशल मीडिया से कमाई करता है, तो उसे 30 दिनों के अंदर इसकी जानकारी देनी होगी.

ChatGPT और Gemini जैसे टूल्स पर सख्ती
सुरक्षा कारणों से सरकारी गोपनीय दस्तावेजों की स्कैन की गई कॉपी या स्क्रीनशॉट शेयर करना और ChatGPT और Gemini जैसे AI टूल पर संवेदनशील जानकारी अपलोड करना मना है. संवेदनशील काम करते समय वर्कप्लेस की लोकेशन या जियो-टैग किया गया डेटा शेयर करना भी प्रतिबंधित है. इसके अलावा, जांच या सार्वजनिक सुनवाई के दौरान पीड़ितों, गवाहों, आरोपियों या नाबालिग अपराधियों के चेहरे धुंधले (ब्लर) किए बिना उनकी तस्वीरें जारी करना मना है. इन नियमों का उल्लंघन करने पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

गाइडलाइंस में क्या कहा गया
गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि सोशल मीडिया को लेकर जारी नियमों को तोड़ना भारी पड़ेगा. अगर कोई पुलिसकर्मी नियम तोड़ता है तो उस पर कार्रवाई होगी. गंभीर मामले में उसके सीनियर अफसर पर भी एक्शन लिया जा सकता है. पुलिसकर्मी गिरफ्तारी, छापे या जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर नहीं कर सकेंगे. अगर जानकारी देना बहुत जरूरी है तो सिर्फ जरूरी बातें ही बतानी होंगी. कानून-व्यवस्था या किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी बिना अनुमति के सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी.

पुलिस प्रशासन का यह सख्त कदम अनुशासन, गोपनीयता और विभाग की छवि बनाए रखने की दिशा में एक अहम कोशिश है. सोशल मीडिया के इस दौर में जहां कई पुलिसकर्मी लोकप्रियता और पैसे कमाने के चक्कर में नियमों की अनदेखी कर रहे थे, वहीं PHQ के ये साफ निर्देश वर्दी की गरिमा और सरकारी डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे. अब यह देखना बाकी है कि इस सख्त आदेश और इससे जुड़ी निगरानी व्यवस्था का ज़मीनी स्तर पर पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर कितना असर पड़ता है.
 

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Ranjana Kahar

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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