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मध्य प्रदेश का मालवा-निमाड़ अंचल राजनीति का वो केंद्र है, जहां से राज्य का सियासी नैरेटिव तय होता है. मध्य प्रदेश में कहावत है, 'जिसका मालवा, उसकी सत्ता'. इंदौर और उज्जैन मालवा-निमाड़ अंचल की रीढ़ हैं. शायद यही वजह है कि 17 से 19 सितंबर के दौरान इस क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और कांग्रेस के तीन शीर्ष नेताओं का महाजमावड़ा होने जा रहा है. 19 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए युवाओं से जुड़ने आ रहे हैं. राहुल के इंदौर पहुंचने से ठीक दो दिन पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत भी उज्जैन-मालवा क्षेत्र पहुंच रहे हैं.
राहुल गांधी से लेकर नितिन नवीन और मोहन भागवत तक के कार्यक्रमों के केंद्र में युवा यानी Gen Z हैं. राहुल गांधी शिक्षा और छात्रों की समस्याओं को लेकर बात करेंगे. बीजेपी अध्यक्ष सेवा संकल्प और धार्मिक आयोजन के जरिए, जबकि संघ प्रमुख युवा धर्म संसद के जरिए युवाओं से जुड़ेंगे. 17, 18 और 19 सितंबर... यानी तीन दिनों तक फोकस में सिर्फ युवा रहेंगे, लेकिन क्या ये महज संयोग है कि तीन बड़े नेता MP पहुंच रहे हैं या Gen Z और फर्स्ट टाइम वोटर्स को अपने पाले में लाने की सोची-समझी घेराबंदी है.
राहुल गांधी, नितिन नवीन और मोहन भागवत के कार्यक्रम?
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन 17 सितंबर को पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर मध्य प्रदेश पहुंचेंगे और मंदसौर, इंदौर के अलावा उज्जैन में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का यह पहला मध्य प्रदेश दौरा होगा. पीएम मोदी के जन्मदिन पर बीजेपी उज्जैन में सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत करेगी, जिसमें नितिन नवीन शामिल होंगे. इस दौरान महाकाल मंदिर और शिप्रा तट पर 25 लाख दीप जलेंगे. स्वामित्व योजना कार्यक्रम में भी शामिल होंगे, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूमि के अधिकारों को दर्ज कर ग्रामीणों को संपत्ति के दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं. नितिन नवीन गांधी सागर सेंचुरी भी जाएंगे, जहां कूनों से लाए जाने वाले चीतों को रिलीज करेंगे.
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 17 सितंबर को इंदौर होते हुए उज्जैन पहुंचेंगे. उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक गीता भवन में सेवायज्ञ संस्थानम द्वारा 'युवा धर्म संसद' का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र शामिल होंगे. मोहन भागवत युवा धर्म संसद कार्यक्रम के दौरान युवाओं से संवाद करेंगे. आयोजन में युवाओं को संतों, शिक्षाविदों और अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने का भी अवसर मिलेगा.
कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में रहेंगे और अपने कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' के जरिए युवाओं से सीधा संवाद करेंगे. इस दौरान राहुल गांधी पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के संघर्ष और अन्य स्थानीय समस्याओं पर छात्रों से बात करेंगे.
इसी बीच 19 सितंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7,500 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को ई-स्कूटी वितरित करेंगे.
राहुल के आने से पहले बीजेपी-संघ की घेराबंदी क्यों?
मालवा रीजन में बीजेपी लंबे समय से काफी मजबूत स्थिति में है और इसे बीजेपी का अभेद्य किला माना जाता है. इंदौर में राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का फोकस युवाओं पर है. सियासी हलकों में माना जा रहा है कि राहुल गांधी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का नैरेटिव सेट कर पाएं, उससे पहले ही भारतीय जनता पार्टी और संघ ने मालवा में युवाओं के बीच अपनी पहुंच बनाकर माहौल को संतुलित करने की योजना बनाई है.
Gen Z पर ही बीजेपी-कांग्रेस की नजर क्यों?
मध्य प्रदेश में साल 2028 में विधानसभा चुनाव और इसके एक साल बाद 2029 में लोकसभा चुनाव होंगे, तब साल 2010 और उससे पैदा हुए युवा (Gen Z) 18 साल के हो चुके होंगे और पहली बार वोट डालेंगे. ऐसे में Gen Z चुनाव में 'निर्णायक फैक्टर' बन सकते हैं और यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस के फोकस में जेन-जी हैं. यह पीढ़ी पारंपरिक या पारिवारिक जुड़ाव के आधार पर वोट नहीं देती, बल्कि इनका फोकस क्लियर तौर पर क्विक रिजल्ट, मॉडर्न एजुकेशन, जॉब और पर्सनल फ्रीडम पर होता है.
Gen Z के लिए क्यों बदल रही हैं राजनीतिक पार्टियां?
Gen Z इंटरनेट पर काफी एक्टिव हैं और सोशल मीडिया पर माहौल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं. अगर युवा वर्ग में किसी मुद्दे को लेकर नाराजगी होती है, तो उसका प्रभाव तुरंत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई देता है. इंदौर मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा एजुकेशन हब है, जहां राज्य के साथ-साथ देश भर के लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी या उच्च शिक्षा के लिए रहते हैं. इसलिए, यहा से उठने वाली बात का असर पूरे प्रदेश के युवाओं पर पड़ता है. यही वजह है कि राहुल गांधी पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर युवाओं को आकर्षित करना चाहते हैं, जबकि बीजेपी और आरएसएस की रणनीति यह सुनिश्चित करना है कि युवाओं का असंतोष किसी बड़े राजनीतिक आंदोलन में न बदले.