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मध्य प्रदेश में वर्ग-1 उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 में पदवृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. 24 अगस्त 2026 से राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में चल रहा धरना आज 43वें दिन में प्रवेश कर गया है. अभ्यर्थियों ने आज 5 अक्टूबर को सीएम हाउस के घेराव का बड़ा ऐलान किया है. हालांकि, मुख्यमंत्री मोहन यादव आज खंडवा के हरसूद दौरे पर रहेंगे, इस कारण पुलिस ने उनके आवास की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी है.
अभ्यर्थियों का कहना है कि मंजूर किए गए 8,721 पदों में से सिर्फ 2,901 नियुक्तियां ही हुई हैं, जिससे हजारों योग्य उम्मीदवार वेटिंग लिस्ट में रह गए हैं. इसलिए वे मांग कर रहे हैं कि पदों की संख्या 10,000 बढ़ाई जाए और काउंसलिंग का दूसरा दौर आयोजित किया जाए. अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जगहें खाली होने के बावजूद, बहुत कम पदों के लिए भर्ती की जा रही है. उनका आरोप है कि अक्सर विज्ञापित पदों को पूरी तरह से नहीं भरा जाता है और बची हुई खाली जगहों को अगली भर्ती प्रक्रिया में बैकलॉग के तौर पर शामिल कर लिया जाता है. अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि विभाग पदों की संख्या बढ़ाने और काउंसलिंग का दूसरा दौर आयोजित न करने के पीछे कोर्ट में चल रहे मामलों का हवाला दे रहा है.
अभ्यर्थियों की मांग
अभ्यर्थियों कहना है कि कोर्ट में चल रहा मामला EWS कैटेगरी के तहत उम्र में छूट से जुड़ा है और इसका सीधे तौर पर पोस्ट की संख्या बढ़ाने से कोई लेना-देना नहीं है. कैंडिडेट्स ने मांग की है कि सरकार पोस्ट की संख्या 10,000 बढ़ाए, काउंसलिंग का दूसरा राउंड कराए और वेटिंग लिस्ट में शामिल योग्य कैंडिडेट्स को नियुक्ति का मौका दे.
'नियुक्ति का लंबे समय से इंतजार'
वेटिंग लिस्ट में शामिल अभ्यर्थी वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में 10000 पदों की बढ़ोतरी के साथ दूसरी काउंसलिंग आयोजित करने की मांग कर रहे हैं. अभ्यर्थियों के मुताबिक, इससे पहले से ही चयन प्रकिया में शामिल योग्य अभ्यर्थीको नियुक्ति का मौका मिल सकेगा. उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को शुरू हुए लगभग चार साल बीत चुके हैं और वे लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं.
'सरकार ने हमारे साथ धोखा किया'
अभ्यर्थी का कहना है कि जब सरकार ने परीक्षा का नाम चयन रखा है, तो उन्हें हमारा चयन करना चाहिए. विज्ञापित पदों की संख्या भी पूरी तरह नहीं भरी गई है. यह धोखाधड़ी है. अगर राज्य सरकार राज्य लोकसेवा आयोग में में पदों की संख्या बढ़ा सकती है, तो डीपीआई ऐसा क्यों नहीं कर सकता?