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मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा की एक रिक्त सीट को लेकर हलचल तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट के लिए मतदान 12 नवंबर 2026 को होना है. बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास केवल 65 हैं. इस सीट को जीतने के लिए 116 वोटों की जरूरत है, जिससे बीजेपी काफी मजबूत स्थिति में है. इसके बावजूद कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार उतारने के संकेत दिए हैं. हालांकि आंकड़ों के हिसाब से सत्ताधारी पार्टी का पलड़ा भारी है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने और कांग्रेस के रुख ने इस चुनाव को चर्चा का विषय बना दिया है. ऐसे में जब गणित साफ तौर पर बीजेपी के पक्ष में है, तो कांग्रेस मैदान में उतरने के बारे में क्यों सोच रही है? क्या कोई उलटफेर हो सकता है? राज्य की राजनीति पर इस चुनाव का क्या असर पड़ेगा?
निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस उपचुनाव के लिए अधिसूचना 26 अक्टूबर को जारी की जाएगी. उम्मीदवार 2 नवंबर तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे. नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर को होगी और उम्मीदवार 5 नवंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे. मतदान 12 नवंबर को होगा और उसी दिन शाम 5:00 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी, जिसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे.
जहां तक एल. मुरुगन की बात है, वे सितंबर 2021 में तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद बने और बाद में 3 अप्रैल 2024 को मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने. उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक चलना था, लेकिन उन्होंने 14 अक्टूबर 2026 को अपनी राज्यसभा सीट और केंद्रीय मंत्री के पद दोनों से इस्तीफा दे दिया, जिससे वह सीट खाली हो गई. वर्तमान में मध्य प्रदेश की 11 राज्यसभा सीटों में से 7 पर भाजपा और 3 पर कांग्रेस का कब्जा है, जबकि एक सीट खाली है.
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं. इनमें से 164 विधायक भाजपा के हैं, 65 कांग्रेस के हैं और 1 विधायक भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का है. अगर सभी 230 विधायक वोट डालते हैं और सभी वोट वैध माने जाते हैं, तो एक सीट जीतने के लिए 116 वोटों के कोटे की जरूरत होगी. इस हिसाब से देखें तो भाजपा के पास जरूरी कोटे से 48 विधायक ज्यादा हैं. वहीं दूसरी ओर अगर सभी विधायक वोट डालते हैं और जीत के लिए 116 वोटों का कोटा बना रहता है, तो कांग्रेस को अपने 65 विधायकों के अलावा कम से कम 51 और वोटों की जरूरत होगी. यही वजह है कि भाजपा की जीत की संभावना बहुत मजबूत मानी जा रही है.
कम विधायक होने के बावजूद कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले ने दावा किया है कि इस बात की संभावना ज्यादा है कि कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारेगी. इसके साथ ही राहुल गांधी द्वारा उठाए गए 'वोट चोरी' के मुद्दे को लेकर कांग्रेस एक महीने तक चलने वाला घर-घर जाकर मतदाता सूची के सत्यापन का अभियान भी चला रही है. दूसरी ओर बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने कांग्रेस के इस दावे का कड़ा खंडन किया है और इसे 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' करार दिया है. बीजेपी का कहना है कि यह सीट बीजेपी की थी और बीजेपी के पास ही रहेगी. साथ ही बीजेपी ने विपक्ष को घेरने के लिए अपनी रणनीति भी तैयार कर ली है.
बीजेपी के पास 164 विधायक हैं और सामान्य परिस्थितियों में ऐसे विशाल समर्थन वाली पार्टी को हराना या उसमें सेंध लगाना नामुमकिन सा होता है, लेकिन राजनीति में 'असंभव' शब्द के लिए बहुत गुंजाइश नहीं होती. अंदरखाने में असंतोष या फूट की स्थिति में उलटफेर की गुंजाइश बनती है. हालांकि, बीजेपी और कांग्रेस के विधायकों की संख्या देखें तो दोनों के बीच 99 का अंतर है और इतने बड़े अंतर को पाटकर जीत दर्ज करना सामान्य तौर पर मुमकिन नहीं होता. इसके लिए भारी-भरकम सेंधमारी की जरूरत पड़ती है.
27 फरवरी 2024 को हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हर्ष महाजन की जीत की थी. चुनाव में कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को मैदान में उतारा था. तब हिमाचल प्रदेश के 68 में से 40 विधायक कांग्रेस के पास थे और BJP के पास 25 विधायक थे. वोटिंग के बाद बीजेपी-कांग्रेस उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले थे और टाई होने के बाद लॉटरी के जरिए विजेता का फैसला किया गया, जिसमें हर्ष महाजन विजयी रहे थे. तब कांग्रेस के 6 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर क्रॉस वोटिंग की थी और 3 निर्दलीय विधायकों ने भी BJP का समर्थन किया था.