जब कई रियासतों को पिरोकर बना था 'हृदय प्रदेश', जानिए 1 नवंबर 1956 से लेकर आज तक के सफर की पूरी कहानी
स्वतंत्रता के बाद कई रियासतों और प्रशासनिक इकाइयों के विलय से 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया. तब से यह राज्य अपनी अनूठी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए लगातार प्रगति कर रहा है.
आजादी के समय भारत में अलग-अलग आकार की कई रियासतें और प्रशासनिक क्षेत्र शामिल थे. राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश का गठन किया गया. देश के बिल्कुल मध्य में स्थित होने के कारण भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे 'हृदय प्रदेश' नाम दिया. 1 नवंबर 2026 को इसका 71वां स्थापना दिवस मनाया जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं जानिए 1 नवंबर 1956 से लेकर आज तक के सफर की पूरी कहानी.
किन-किन रियासतों और हिस्सों को मिलाकर बना राज्य?
मध्य प्रदेश का गठन चार प्रमुख क्षेत्रों को मिलाकर किया गया था. पहला था सेंट्रल प्रोविंसेस एंड बरार, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक काल का एक प्रांत था और जिसकी राजधानी नागपुर थी. इसके हिंदी भाषी क्षेत्रों, जैसे महाकौशल और छत्तीसगढ़, को नए राज्य मध्य प्रदेश में शामिल कर लिया गया, जबकि मराठी भाषी क्षेत्रों को महाराष्ट्र में मिला दिया गया. दूसरा और तीसरा क्षेत्र मध्य भारत और विंध्य प्रदेश थे. मध्य भारत का गठन 28 मई 1948 को 25 रियासतों को मिलाकर किया गया था, इनमें ग्वालियर और इंदौर प्रमुख थीं.
कुल 74 रियासतें शामिल
वहीं, विंध्य प्रदेश का गठन बुंदेलखंड और बघेलखंड क्षेत्रों की रियासतों को मिलाकर हुआ था. इन दोनों ही क्षेत्रों को पूरी तरह से मध्य प्रदेश में शामिल कर लिया गया. चौथा क्षेत्र भोपाल रियासत थी, जिस पर नवाब हमीदुल्ला खान का शासन था. यह रियासत 1 जून 1948 को भारत में शामिल हुई और बाद में 1956 में इसे नए राज्य में मिला दिया गया. इन चार क्षेत्रों के विलय के साथ 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश राज्य की स्थापना हुई, जिसकी राजधानी भोपाल बनाई गई. इसमें कुल 74 रियासतें शामिल थीं.
(नोट: 1 नवंबर 2000 को इस राज्य के दक्षिण-पूर्वी हिस्से को अलग करके एक नया राज्य छत्तीसगढ़ बनाया गया.)
भोपाल कैसे बनी राजधानी?
राजधानी को लेकर उस समय खूब खींचतान हुई थी. सब कुछ देख-समझकर जबलपुर को राजधानी बनाना लगभग तय हो गया था, फाइलें भी चलने लगी थीं. लेकिन आखिरी वक्त पर खेल पलट गया. राजनीतिक दबाव और भोपाल के नवाब से हुए विलय के वादे के कारण फैसला बदलना पड़ा और भोपाल को नई राजधानी बना दिया गया. मजेदार बात ये है कि तब भोपाल खुद जिला भी नहीं था, वो तो सीहोर जिले की एक तहसील भर था.
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देश के प्रमुख राज्यों में से एक
1956 में गठित मध्य प्रदेश आज कृषि, बुनियादी ढांचे, पर्यटन और सांस्कृतिक समृद्धि के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में गिना जाता है. अपनी स्थापना के बाद से सात दशकों में इस राज्य ने कई प्रशासनिक और सामाजिक बदलाव देखे हैं, फिर भी यहां की विविधता में एकता और ऐतिहासिक महत्व आज भी बरकरार हैं.