एक देश, एक डिग्री...फिर MP में MBBS इंटर्न डॉक्टरों से भेदभाव क्यों? जानिए किस राज्य में कितना मिलता है स्टाइपेंड
मध्य प्रदेश में MBBS इंटर्न डॉक्टर ₹14,337 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग पर आंदोलन कर रहे हैं. पुलिस कार्रवाई के बाद विवाद बढ़ गया है. सरकार बातचीत से समाधान का भरोसा दे रही है, लेकिन डॉक्टर लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं.
मध्य प्रदेश में MBBS इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने का आंदोलन अब सिर्फ एक मांग तक सीमित नहीं रह गया है. यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि एक ही देश में, एक ही NEET परीक्षा पास करके मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों के स्टाइपेंड में इतना बड़ा अंतर क्यों है? भोपाल के कमला पार्क के पास इंटर्न डॉक्टर दूसरे दिन मंगलवार को भी सड़क पर बैठे हैं. उनका कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, वे यहां से नहीं हटेंगे. उधर, एडिशनल कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासन इंटर्न डॉक्टरों से बातचीत कर रहा है, ताकि सड़क खाली कराई जा सके.
इंटर्न डॉक्टरों के काम बंद करने का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है. भोपाल के हमीदिया अस्पताल, इंदौर के एमवाय अस्पताल समेत कई मेडिकल कॉलेजों में OPD सेवाएं प्रभावित हुई हैं. फिलहाल सीनियर डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. अब इस आंदोलन में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन यानी JDA भी खुलकर सामने आ गया है. इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज की निंदा करते हुए JDA ने OPD और elective OT सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है. हालांकि, इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है.
आखिर डॉक्टरों की मांग क्या है?
1. मौजूदा स्टाइपेंड ₹14,337 से बढ़ाकर ₹30 हजार प्रति महीना किया जाए.
2. सरकार से मांगों पर आधिकारिक बातचीत और लिखित आदेश चाहते हैं.
3. स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल इंटर्न डॉक्टर से बातचीत करें.
3. लाठीचार्ज-वाटर कैनन का आदेश देने वाले आधिकारियों पर कार्रवाई हो.
...स्टाइपेंड में इतना अंतर क्यों ?
MBBS इंटर्न्स का कहना है कि जब देशभर में MBBS की पढ़ाई और NEET की परीक्षा एक ही व्यवस्था के तहत होती है. लेकिन इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाला स्टाइपेंड राज्य सरकारों के नियमों के आधार पर अलग-अलग है. आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में MBBS इंटर्न को करीब ₹44 हजार महीना मिलता है. ओडिशा में यह लगभग ₹43 हजार और असम में ₹36 हजार है. वहीं मध्य प्रदेश में यह ₹14,337 है. यानी पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में मिलने वाला स्टाइपेंड में लगभग लगभग 30000 रुपए का अंतर है. हाल ही में उत्तर प्रदेश में MBBS इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25000 रुपए किया गया है.
₹14,337 का पूरा गणित क्या कहता है?
अब इसे रोज के काम के हिसाब से समझिए. मध्य प्रदेश में ₹14,337 का मासिक स्टाइपेंड अगर 30 दिनों के हिसाब से देखें, तो लगभग ₹478 प्रतिदिन बैठता है. अगर मान लीजिए, रोजाना 10 घंटे काम का औसत होता है तो यह लगभग ₹48 प्रति घंटा होता है. लेकिन यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. अगर कोई डॉक्टर 24 घंटे ड्यूटी करता है, तो ₹14,337 स्टाइपेंड के हिसाब से उसे ₹19.91 प्रति घंटा स्टाइपेंड मिलता है. जबकि बंगाल, ओड़िशा, यूपी, बिहार समेत अन्य राज्यों में कहीं ज्यादा बैठता है. ऐसे में सवाल यही उठता है कि इन इंटर्न्स डॉक्टर का स्टाइपेंड कितना होना चाहिए. आइए आपको देशभर के अलग-अलग राज्यों के स्टाईपेंड के बारे में बताते हैं.
किस राज्य में कितना स्टाइपेंड?
1. पश्चिम बंगालः ₹44,000
2. ओडिशाः ₹43,000
3. असमः ₹36,000
4. दिल्लीः ₹30,000
5. कर्नाटकः ₹30,000
6. तेलंगानाः ₹29,700
7. तमिलनाडुः ₹27,300
8. बिहारः ₹27,000
9. उत्तर प्रदेशः ₹25,000
10. झारखंडः ₹25,000
11. पंजाबः ₹22,000
12. गुजरातः ₹18,200
13. महाराष्ट्रः ₹18,000
14. राजस्थानः ₹18,000
15. मध्य प्रदेशः ₹14,337
16. जम्मू-कश्मीरः ₹12,300
15-20 दिन का मांगा था समय
अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग स्टाईपेंड को लेकर एमपी में MBBS इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर पहले भी सरकार के सामने जा चुके हैं. उनका दावा है कि 1 अगस्त से 5 अगस्त तक उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन किया था. इसके बाद सरकार ने 15 से 20 दिन का समय मांगा था. इसको लेकर डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने करीब डेढ़ महीने तक इंतजार किया, लेकिन मांग पर कोई फैसला नहीं किया गया. वहीं इसका असर रतलाम में भी देखने को मिला है. जहां पर इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया है.
रतलाम में भी छात्रों का प्रदर्शन
रतलाम के छात्रों का कहना है कि जब GMC भोपाल में कई कॉलेजेस के छात्र वहां गए थे, इसमें रतलाम के 20-25 छात्र पहुंचे. जब उनके उपर उन्होंने लाठीचार्ज किया, वो वहां से सीएम हाउस तक जा रहे थे. बीच में उनके ऊपर लाठीचार्ज किया गया है. उनके ऊपर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया है, जो कि काफी गलत था.
सरकार क्या कह रही है?
सरकार की तरफ से कहा गया है कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी हाल ही में की गई थी. इस पर बीजेपी नेताओं का कहना है कि स्टाइपेंड की मांग कर रहे MBBS के छात्रों का स्टाइपेंड अभी छह महीने पहले, मार्च 2026 में बढ़ाया गया था. अभी छह महीने ही हुए हैं और स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹14,337 किया गया है. अगर PG की बात करें तो सरकारी कॉलेजों में PG डॉक्टरों को ₹77 हजार से लेकर ₹88 हजार के बीच स्टाइपेंड दिया जा रहा है. इसके अलावा, मेडिकल की सीटों में भी पांच गुना बढ़ोतरी की गई है.
सकारात्मक बातचीत हुई- डिप्टी सीएम
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि सकारात्मक बातचीत हुई है और बातचीत अभी जारी है और मुख्यमंत्री जी से लगातार हम लोग टच में हैं और इसका सकारात्मक परिणाम निकलेगा. जब बातचीत अंतिम रूप लेगी, तब फिर आपको ब्रीफ करेंगे. दो ही बातों पर गंभीरता से चर्चा हुई है. दोनों पर सकारात्मक बातचीत हुई है और उन लोगों ने इससे संतोष व्यक्त किया है और अभी फिर हम लोग शाम को बैठेंगे. उनके प्रतिनिधि यहां पर आए थे और अभी आवश्यकता पड़ने पर हम लोग उनसे मिलेंगे. इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बात की थी. उन्होंने मुख्यमंत्री के लौटने पर स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा करने की बात कही. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जब तक लिखित आदेश नहीं मिलता, आंदोलन खत्म नहीं होगा.
विवाद की शुरुआत वाटर कैनन से कैसे हुई?
इस पूरे आंदोलन ने उस समय और जोर पकड़ लिया, जब सोमवार को CM हाउस की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया. इस दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया. डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया. पुलिस का कहना है कि धक्कामुक्की के बाद वाटर कैनन चलाया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वाटर कैनन मामले में जांच के निर्देश दिए हैं.
कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल
वहीं कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस ने कहा कि भोपाल की राजधानी में यह हृदय विदारक घटना हुई है. जिस तरीके से जूनियर डॉक्टर्स को सोमवार शाम को मारा गया, वाटर कैनन चलाए गए. कितनी निर्दयी BJP सरकार है. बेचारे वो अपने स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं. उनकी बात को अच्छे से सुना जाए. उसकी जगह आप लाठी-डंडे चला रहे हैं. आप उनको मार रहे हैं. कांग्रेस नेता ने कहा कि अरे मोहन यादव जी, कम से कम उनकी बात को सुना जाए. आपके लोग उनकी बात सुन नहीं रहे और उन पर लाठी-डंडे पड़वा रहे हैं. इतनी निर्दयी सरकार नहीं होना चाहिए.