21 बैंक खाते, 33 अचल संपत्ति...मां और पत्नी के नाम ट्रेडिंग कंपनी, वर्दी की आड़ लेकर हेड कॉन्स्टेबल के ड्राइवर से करोड़पति बनने की कहानी
इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में हेड कॉन्स्टेबल चालक के पद पर पदस्थ फिरोज खान के पास आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ है. लोकायुक्त के इस ऑपरेशन में इंदौर और उज्जैन की अलग-अलग टीमें कार्रवाई में जुटी हुई हैं.
मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई सामने आई है. इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान के ठिकानों पर छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है. लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की टीम ने देवास स्थित आवास समेत कुल 15 ठिकानों पर सर्चिंग की. 14 अक्टूबर को सुबह 6 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में अब तक 33 अचल संपत्तियों का पता चला है. लोकायुक्त के मुताबिक, फिरोज खान की कुल आय करीब 1 करोड़ 93 लाख रुपये है, जबकि 12 करोड़ 95 लाख रुपये से ज्यादा खर्च का हिसाब मिला है. इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 29 करोड़ 73 लाख रुपये आंकी गई है.
15 ठिकानों पर छापेमारी
दरअसल, लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देशन और डीआईजी मनोज कुमार सिंह और इंदौर लोकायुक्त के एसपी राजेश सहाय के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई. फिरोज खान इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में प्रधान आरक्षक चालक के पद पर पदस्थ है. लोकायुक्त पुलिस ने 14 अक्टूबर को उसके खिलाफ सर्च अभियान शुरू किया. टीम ने देवास के आदर्श नगर स्थित उसके आवास समेत कुल 15 ठिकानों पर छापेमारी की. सर्चिंग के दौरान आरोपी और उससे जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें आय से अधिक संपत्ति का बड़ा खुलासा हुआ.
जांच में आय से अधिक संपत्ति का खुलासा
लोकायुक्त द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, हेड कांस्टेबल फिरोज खान ने अपने वेतन से लगभग ₹75 लाख कमाए. आय के अन्य स्रोतों को मिलाकर उनकी कुल कमाई लगभग ₹1.93 करोड़ आंकी गई है. वहीं जांच में कुल ₹12,95,72,028 का खर्च सामने आया है. लोकायुक्त के अनुसार यह राशि ज्ञात आय से करीब 11 करोड़ 1 लाख 87 हजार 588 रुपये अधिक है. विभाग ने इसे आय के अनुपात में करीब 568 प्रतिशत अधिक बताया है.
33 अचल संपत्ति...मां और पत्नी के नाम ट्रेडिंग कंपनी
तलाशी के दौरान अब तक कुल 33 अचल संपत्तियों का पता चला है. लोकायुक्त के अनुसार, इन संपत्तियों में आरोपी, उसकी पत्नी, मां, परिचित रोशनी वर्मा और साहिल ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर खरीदी गई संपत्तियां शामिल हैं. कुछ संपत्तियों के बेनामी होने का भी संदेह है. जानकारी सामने आई है कि इन अचल संपत्तियों को खरीदने में लगभग 11 करोड़ 57 लाख 49 हजार 818 रुपये खर्च किए गए थे. वहीं इनकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग 29 करोड़ 73 लाख 18 हजार 768 रुपये आंकी गई है.
21 बैंक खाते का खुलासा
लोकायुक्त की कार्रवाई में इंदौर, उज्जैन और देवास के बैंकों में आरोपी और उससे जुड़े लोगों के नाम पर 21 बैंक खातों की जानकारी मिली है. इसके अलावा ट्रक, कार, स्कॉर्पियो, स्कूटी और मोटरसाइकिल समेत लगभग नौ वाहनों के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं. जांच के दौरान साहिल ट्रेडिंग कंपनी, रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट, रोशनी सेल्स एंड सर्विस, महाराजा रियल एस्टेट और ब्लैक हॉर्नेट नाम की कंपनियों और फर्मों का भी पता चला है. लोकायुक्त की टीम इन कंपनियों और फर्मों के बैंक खातों का विवरण जुटा रही है. विभागीय जानकारी के अनुसार, संबंधित बैंक खातों से पैसे निकालने पर रोक लगा दी गई है.
वर्दी की आड़ में हेड कॉन्स्टेबल का ड्राइवर कैसे बना करोड़पति?
लगभग एक साल पहले हेड कांस्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान का तबादला देवास से इंदौर स्थित पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज (PTC) में कर दिया गया था. इंदौर में तैनाती मिलने के बावजूद वे ड्यूटी पर नहीं पहुंचा. उसने मेडिकल और अन्य कारणों का हवाला देते हुए वापस देवास में तबादले की मांग की. इसी बीच, लोकायुक्त की जांच में उनकी अवैध और छिपाई गई संपत्ति का पूरा ब्योरा सामने आया.
जमीन के सौदे से खुला राज
फिरोज के खिलाफ शिकायत सांवेर तहसील के गुरान गांव में हुए एक जमीनी विवाद से जुड़ी है. महेश चौधरी और उनके बेटे गौरव के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. आरोप है कि इसी दौरान, फिरोज ने रोशनी वर्मा के नाम पर लगभग 65 लाख रुपये में 21.75 बीघा जमीन का समझौता करवाया. इसके अलावा महेश चौधरी को उनके परिवार से दूर करने के लिए फिरोज ने एक युवती के साथ उनकी शादी करवाई और देवास के इटावा में उनके रहने के लिए एक घर का इंतजाम भी किया.
इन हरकतों से नाराज होकर, उनके बेटे गौरव ने फिरोज की संपत्ति के बारे में जानकारी जुटाई और लोकायुक्त के महानिदेशक के पास शिकायत दर्ज कराई. कई महीनों तक चली जांच के दौरान कई संपत्तियों और व्यावसायिक गतिविधियों के सबूत सामने आए, जिसके बाद इंदौर और उज्जैन की लोकायुक्त टीमों ने एक साथ छापेमारी की.
इंदौर और उज्जैन की अलग-अलग टीमें शामिल
लोकायुक्त के इस ऑपरेशन में इंदौर और उज्जैन की अलग-अलग टीमें शामिल थीं. देवास में इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में उप पुलिस अधीक्षक सुनील तालान, उप पुलिस अधीक्षक दीपक सेजवार तथा निरीक्षक सचिन पटेरिया, राजेंद्र वर्मा और निरीक्षक प्रतिभा तोमर शामिल थे. वहीं, इंदौर की टीम में उप पुलिस अधीक्षक आनंद चौहान, उप पुलिस अधीक्षक दिनेशचंद्र पटेल और निरीक्षक आशुतोष मिठास सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे. लोकायुक्त के अनुसार, अन्य जगहों पर तलाशी अभियान पूरे हो चुके थे, जबकि देवास और इंदौर के कुछ घरों में यह प्रक्रिया अभी भी चल रही थी. संबंधित संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच आगे भी जारी रहेगी.