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आज से करीब 8 से 9 महीने पहले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग बीमार हो गए थे, जबकि कई लोगों की जान भी चली गई थी. मामला सामने आने के बाद आनन-फानन में कुछ अधिकारियों को हटाया गया. वहीं क्षेत्र के पानी के सैंपल भी लिए गए, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया था.
इस दौरान मामले को लेकर जमकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई. इतना ही नहीं सियासी हलचल भी देखने को मिली. इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए एक जांच दल का गठन किया गया. वहीं, इस पूरे मामले को लेकर इंदौर के अधिवक्ता रितेश ईनाणी ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी.
पानी की व्यवस्था में काफी सुधार
इसको लेकर भागीरथपुरा के ताजा हाल जानने के लिए ZEE MEDIA की टीम इलाके में पहुंची. जहां स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया. इलाके की महिलाओं से लेकर अन्य लोगों ने बताया कि अब पहले की तुलना में स्थिति काफी सामान्य है. इलाके में पानी की व्यवस्था में काफी सुधार किया गया है. लोगों को साफ-स्वच्छ पानी मिल रहा है.
अब स्थिति काफी बदल चुकी है
वहीं अन्य स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में ड्रेनेज लाइन और नर्मदा पाइपलाइन का काम भी किया गया है. नर्मदा लाइन दुरुस्त होने के बाद अब घर-घर तक साफ पानी पहुंच रहा है. इसके बाद Zee Media की टीम इलाके के सरकारी संजीवनी क्लिनिक पहुंची. जहां पर मौजूद डॉक्टर फुज़ेल अहमद ने बताया कि उस समय के हालात की तुलना में अब स्थिति काफी बदल चुकी है. क्लिनिक में सामान्य मरीज ही इलाज के लिए आ रहे हैं.
60 फीसदी एरिया का नेटवर्क बदल चुके
इसके अलावा, इंदौर नगर निगम के जल कार्य प्रभारी बबलू शर्मा ने कहा कि वो बहुत बड़ी दुखद घटना थी. घटना के बाद लगभग 60 फीसदी एरिया का जो नेटवर्क था, उसे हम बदल चुके हैं. उस गटना के होने से पहले ही पूरे भागीरथपुरा की लाइनों, सीवरेज और नर्मदा की लाइनों के सारे टेंडर जारी हो चुके थे. उस घटना के बाद वहां एक भी टेंडर नहीं हुआ है. वहां लगभग पूरे काम हो चुके हैं.
अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे
आगे मिली जानकारी के मुताबिक, काम पूरा होने के बाद हमारे अधिकारी लगातार उसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं. इसके अलावा, लगातार दौरे भी कर रहे हैं. वहीं निगम आयुक्त से लेकर पार्षद तक सभी अधिकारी इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं. इतना ही नहीं पार्षद कमल वाघेला दिन-रात आम जनता के संपर्क में हैं. उस घटना के बाद से नगर निगम की टीम उस काम को और ज्यादा मुस्तैदी से कर रही है, जिसके रिजल्ट काफी अच्छे देखने को मिल रहे हैं.
सभी लाइनें बदली जा रही हैं
वहीं बबलू शर्मा का कहना है कि हम इंदौर में ऐसे सभी नेटवर्क, जो काफी पुराने हो चुके हैं, उन्हें बदलने का काम कर रहे हैं. चाहे नर्मदा की बात हो, अमृत 2.0 के अंतर्गत 2,157 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 1,500 किलोमीटर लंबी लाइनें पूरे शहर में बदली जा रही हैं.
तेजी से बदलने का काम हो रहा
इसके अलावा, ऐसी लाइनों को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है, जो टूटी-फूटी और पुरानी हो चुकी हैं. इसी तरह सीवरेज के ऐसे नेटवर्क, जहां सीवरेज की व्यवस्था नहीं है, जहां नेटवर्क काफी पुराना हो चुका है या फिर घनी बसाहट के कारण लाइनें ओवरलोड हो गई हैं, उन सभी को तेजी से बदलने का काम किया जा रहा है.
कब हुआ था दुषित जल कांड?
तारीख 25 दिसंबर 2025 को घरों में पीने वाले पानी का रंग हल्का पीला और गंध बदला लग रहा था. लेकिन पानी ज्यादा कड़वा और जहरीला हो गया था. यही पानी पीने से 27 दिसंबर से कई लोगों को उल्टी दस्त हुई, जिससे लोगों की मौत होने लगी. इस दूषित पानी कांड में लगभग 2400 लोग बीमार हो गए थे, जबकि 36 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी.
क्यों हुआ था भागीरथपुरा कांड
शुरुआती जांच में पता चला था कि नर्मदा की मेन पेयजल पाइपलाइन के पास ही बनी पुलिस चौकी के शौचालय/वाशरूम का गंदा व सीवेज का पानी रिसकर मिल गया था. प्रशासन की लापरवाही के चलते पुरानी और खराब पाइपलाइन को बदलने के टेंडर समेत अन्य प्रक्रियाओं में देरी हो गई, इसकी जानकारी अधिकारियों को पहले थी. लेकिन उसके बावजूद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. इसी वजह से भागीरथपुरा में इतने लोगों की मौत हुई थी.