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इंदौर के जाने-माने बिजनेसमैन और अग्रवाल कोल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार अग्रवाल ने हुरुन इंडिया की 2026 की अमीर लोगों की लिस्ट में एक बार फिर मध्य प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. यह लगातार पांचवां साल है, जब वे राज्य के सबसे अमीर व्यक्ति बने हैं. हालांकि, देश के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में उनकी रैंक 365 पर आ गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है इनका कारोबार और कहां-कहां से कमाई करते हैं.
एक साल में बढ़ी 700 करोड़ रुपये की संपत्ति
इस लिस्ट के अनुसार, विनोद अग्रवाल की कुल संपत्ति 10,200 करोड़ रुपये दर्ज की गई है, जो बीते वर्ष (2025) की 9,500 करोड़ रुपये की संपत्ति से 700 करोड़ रुपये अधिक है. इस बड़ी उपलब्धि के बाद, विनोद कुमार अग्रवाल ने कहा कि उनका विजन है कि इंदौर के और भी उद्यमी इस लिस्ट में शामिल हों, जिससे राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर शहर की पहचान बढ़े. इंदौर लगातार तरक्की कर रहा है और नए उद्यमियों व व्यवसायों के लिए यहां कई मौके हैं. वे रियल एस्टेट के जरिए शहर के विकास में योगदान दे रहे हैं. वे ऐसे प्रोजेक्ट्स बना रहे हैं जिनसे व्यापार के अवसर पैदा होते हैं और इंदौर को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहचान मिलती है.
कौन हैं विनोद अग्रवाल और क्या है कारोबार?
विनोद अग्रवाल मूल रूप से इंदौर के ही रहने वाले हैं. वे अग्रवाल कोल कॉर्पोरेशन के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. यह कंपनी बाहर से कोयला मंगवाने और उसे देश में बेचने का काम करती है. इस मामले में यह देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. कंपनी का नेटवर्क देश के 20 से ज्यादा बंदरगाहों पर फैला हुआ है और हर साल इसका कारोबार 14,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है. कंपनी का मुख्य काम तीन चीजों से जुड़ा है- कोयला बाहर से लाना, उसे बेचना और उसे सही जगह तक पहुंचाना. देश के कई बड़े पावर प्लांट और सीमेंट फैक्ट्रियों को कोयला इन्हीं की कंपनी से जाता है. कोयले के अलावा अब विनोद अग्रवाल दूसरे बिजनेस में भी हाथ आजमा रहे हैं. पिछले कुछ सालों से वे इंदौर में रियल एस्टेट यानी प्रॉपर्टी के कारोबार में भी काफी एक्टिव हो गए हैं.
कहां-कहां से करते हैं कमाई
रिपोर्ट्स के अनुसार, विनोद अग्रवाल का बिजनेस सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि समय के साथ उन्होंने अपने बिजनेस को अलग-अलग क्षेत्रों में फैलाया है.
हुरुन क्या है?
हुरुन एक ग्लोबल रिसर्च कंपनी है जो दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट बनाती है. इसकी शुरुआत 1999 में यूके के रूपर्ट होगेवर्फ़ ने की थी. इस संस्था का नाम रूपर्ट के चीनी नाम 'हुरुन' पर रखा गया है. यह मुख्य रूप से दुनिया भर के अमीर लोगों की रिच लिस्ट बनाने और आर्थिक रिसर्च करने के लिए जानी जाती है. इसने 2012 में भारत में काम करना शुरू किया और अब यह देश के 1,000 सबसे अमीर लोगों की लिस्ट जारी करती है.
पिछले कुछ सालों में क्यों चर्चा में है?
पिछले कुछ सालों में हुरुन रिच लिस्ट ने बहुत ज्यादा ध्यान खींचा है, इसकी कई वजहें हैं. पहली वजह ये है कि हुरुन की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में अमीर लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. जहां 2020 में ₹1,000 करोड़ से ज्यादा की नेट वर्थ वाले लगभग 200 लोग थे, वहीं अब यह संख्या 350 से ज़्यादा हो गई है, जिससे यह लिस्ट हर साल चर्चा का विषय बन जाती है. दूसरी बात, जहां पहले इस लिस्ट में सिर्फ मुंबई और दिल्ली के जाने-माने नाम शामिल होते थे, वहीं अब हुरुन इंदौर, भोपाल, सूरत और नागपुर जैसे शहरों के अरबपतियों को भी सामने ला रहा है, जिससे लोकल लेवल पर इसकी चर्चा बहुत बढ़ गई है.
तीसरी वजह यह है कि हुरुन अब 'अंडर-35' और 'यंग रिच' लिस्ट जारी करता है, जिसमें Zerodha, Zepto और OYO जैसे स्टार्टअप्स के युवा फाउंडर्स शामिल होते हैं, इससे युवाओं के बीच काफी चर्चा हुई है. चौथी बात यह है कि यह लिस्ट अक्सर विवादों की वजह से वायरल हो जाती है. उदाहरण के लिए, पिछले साल गौतम अडानी की संपत्ति में आए बड़े उतार-चढ़ाव की जानकारी सबसे पहले हुरुन ने ही दी थी.