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राजधानी भोपाल के मिसरोद इलाके में एक सरकारी स्कूल में भारी हंगामा हुआ. यहां के छात्र अपनी ही फिजिक्स टीचर के खिलाफ सड़कों पर उतर आए और जमकर नारेबाजी की. छात्रों का आरोप है कि बबीता मैडम क्लास में पढ़ाने के बजाय उनसे अपने घर के काम करवाती हैं. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि बात न मानने पर टीचर लोहे की रॉड से मारती हैं और फेल करने की धमकी देती हैं. हंगामे की सूचना मिलने पर मिसरोद पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने छात्रों से बातचीत की और कार्रवाई का भरोसा दिलाया. काफी देर तक हंगामा चलता रहा, जिसके बाद जिला शिक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की.
शिक्षिका के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र
दरअसल, सोमवार को नवीन शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के बाहर माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब 11वीं क्लास के दर्जनों छात्र (मैथ्स और बायोलॉजी स्ट्रीम के) बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर आए और तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगाए.छात्रों का आरोप है कि उनकी फिजिक्स टीचर उनसे अपने घर के कांच साफ करवाती थीं और स्कूल का भारी फर्नीचर उठवाती थीं. उन्होंने दावा किया कि अगर वे मना करते या शिकायत करते, तो उन्हें लोहे की रॉड से पीटने की धमकी दी जाती और परीक्षा में फेल करने की चेतावनी दी जाती. इसके अलावा टीचर पर परीक्षा की कॉपियां जांचने के बहाने छात्रों से पैसे मांगने और छात्राओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं.
प्रदर्शन के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने लिया एक्शन
सड़कों पर हुए हंगामे और विरोध-प्रदर्शन से जिला शिक्षा विभाग में हलचल मच गई. हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने तुरंत और सख्त कदम उठाए. शिक्षिका बबीता कुशवाहा का तबादला मिसरोद स्कूल में पढ़ाने की जिम्मेदारी से हटाकर 'राज्य-स्तरीय सेवा संकल्प अभियान' में करने का आदेश जारी किया गया. वहीं अभी गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल बरखेड़ा में तैनात रेणुका श्रीवास्तव को तुरंत मिसरोद स्कूल में शैक्षणिक कामकाज संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह आदेश 5 अक्टूबर से लागू हुआ.
टीचर की मनमानी और स्टूडेंट्स के साथ गलत बर्ताव के खिलाफ 'जेन अल्फा' का यह कड़ा विरोध साफ दिखाता है कि आज की युवा पीढ़ी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और अन्याय को चुपचाप सहने के मूड में नहीं है. स्टूडेंट्स के गंभीर आरोपों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी का सख्त रुख और टीचर का तुरंत ट्रांसफर, स्कूल में प्रशासनिक जवाबदेही को दर्शाता है.