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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में प्रशासन ने जमीन माफिया और अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. शहर के कोतवाली पुलिस स्टेशन इलाके में मेडिकल कॉलेज के ठीक सामने सरकारी जमीन के लगभग 15 बीघा हिस्से पर बने अवैध निर्माणों को गिरा दिया गया. कब्जा हटाने के इस अभियान के दौरान बुलडोजर का इस्तेमाल करके 36 से 37 अवैध दुकानों को जमींदोज कर दिया गया. प्रशासन के मुताबिक, इस जमीन की बाजार कीमत ₹25 करोड़ से ₹30 करोड़ के बीच आंकी गई है.
सालभर से दिए जा रहे थे नोटिस
SDM आनंद सिंह राजावत ने बताया कि यह जमीन असल में मेडिकल कॉलेज को अलॉट की गई थी और भविष्य में वहां आश्रय स्थल बनाने की योजना है. कब्जा करने वालों को लगभग एक साल से लगातार नोटिस और चेतावनी दी जा रही थी, और तहसीलदार की अदालत से भी आदेश जारी किए गए थे.
अवैध वसूली का हुआ खुलासा
SDM के अनुसार, जानकारी मिली थी कि दुकानों से ₹5,000 से ₹8,000 तक का मासिक किराया वसूला जा रहा था. किराएदारों ने कुछ लोगों द्वारा जबरन वसूली की शिकायत भी की थी. प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के विकल्प तलाशने की बात कही है.
एमपी में जारी है अतिक्रमण के खिलाफ एक्शन
बता दें कि शिवपुरी के अलावा प्रशासन मध्य प्रदेश के कई शहरों में जमीन माफिया और अवैध कब्जा करने वालों के चंगुल से सरकारी जमीन वापस लेने के लिए बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चला रहा है. राजधानी भोपाल में भदभदा रोड पर सुबह-सुबह चलाए गए एक बड़े ऑपरेशन में जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने लगभग 15 एकड़ की अहम सरकारी जमीन को पूरी तरह से कब्जे से मुक्त कराया. इस जमीन पर मैरिज गार्डन, पक्के रेस्टोरेंट और कई दुकानें अवैध रूप से चल रही थीं. इसी तरह, रीवा और इंदौर जैसे बड़े शहरों में सार्वजनिक नालों, चौराहों और मुख्य सड़कों के किनारे किए गए अवैध कब्ज़ों को बुलडोजर से हटाया गया, जिससे आम लोगों को जलभराव और ट्रैफ़िक जाम की पुरानी समस्याओं से बड़ी राहत मिली.
लैंड माफियों में हड़कंप
वहीं अब शिवपुरी प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से शहर में सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करने वाले लैंड माफिया में हड़कंप मच गया है. करोड़ों की कीमती जमीन को वापस लेकर उसे जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए सुरक्षित करना एक सराहनीय कदम है. अवैध वसूली में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने से असामाजिक तत्वों को एक कड़ा संदेश जाता है, जो भविष्य में सरकारी संपत्तियों पर नज़र रख सकते हैं.