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मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर से चर्चा में आ गई है. यहां से कांग्रेस विधायक कुंवर घनश्याम सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं इसको लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका को बीजेपी नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने अधिवक्ता शिवम गौतम के जरिए 17 सितंबर को दायर किया है.
इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में चक्का जाम से जुड़े एक अपराधिक मामले की घनश्याम सिंह ने उपचुनाव के दौरान शपथपत्र में नहीं दी थी. इस आपराधिक मामले को आधार बनाकर दतिया से विधायक घनश्याम सिंह की सदस्यता पर सवाल उठाए गए हैं.
विधायक ने क्या कहा ?
वहीं इस मामले को लेकर कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह से बात की गई तो उन्होंने खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि 1991 से लेकर अब तक इस मामले में उन्हें न तो कोई नोटिस मिला है, न ही उन्हें इसकी कोई जानकारी है. उन्होंने आगे बताया कि जिस समय पुलिस ने धरने से लोगों को हटाया था. उस दौरान न तो कोई मुचलका भरवाया गया और न ही कोई नोटिस जारी किया गया. ऐसे में उनके संज्ञान में यह मामला कभी नहीं आया है.
क्यों खाली हुई थी सीट
दरअसल, 30 जुलाई को हुए दतिया विधानसभा उपचुनाव में घनश्याम सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हराया था. इस विधानसभा सीट पर चुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई थी. राजेंद्र भारती की सदस्यता दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद रद्द हुई थी.
बीजेपी को दी शिकस्त
जब उचुनाव हुए थे, तब भी दतिया विधानसभा सीट काफी चर्चा में रही थी. क्योंकि बीजेपी ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा था. वहीं कांग्रेस पार्टी ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया था. उपचुनाव में घनश्याम सिंह ने आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हराया था. एक बार फिर से हाईकोर्ट में घनश्याम सिंह के खिलाफ याचिका दायर होने पर चर्चा तेज हो गई है.
कौन हैं घनश्याम सिंह?
कुंवर घनश्याम सिंह ने दतिया से विधायक हैं. इनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव रहा है. घनश्याम सिंह ने सन 1993 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर दतिया सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा का सफर तय किया था. उसके बाद उन्होंने 1998 में भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना करना पड़ा. वहीं उन्होंने 1998 में हार के बाद 2003 में दतिया विधानसभा सीट से जोरदार वापसी की और दोबारा विधायक बने थे. इसके अलावा, 2018 में भी विधायक चुने गए. हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन 2026 में फिर से विधायक बने.
(रिपोर्टः मनोज गोस्वामी, दतिया)