एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद बागेश्वर धाम पहुंची क्रिकेटर क्रांति गौड़, पं. धीरेंद्र शास्त्री से लिया आशीर्वाद
Bageshwar Dham: एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर लौटीं क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने बागेश्वर धाम का दौरा किया. उन्होंने बालाजी मंदिर में मत्था टेका और बागेश्वर महाराज से आशीर्वाद लिया. इस बीच, बाबा बागेश्वर ने वृंदावन की घटना पर चिंता जताई.
एशियन गेम्स में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत और गोल्ड मेडल जीतने में अहम भूमिका निभाने के बाद क्रिकेटर क्रांति गौड़ भारत लौटीं और इसके बाद बागेश्वर धाम गईं. धाम पहुंचने पर उन्होंने सबसे पहले मुख्य बालाजी सरकार मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धापूर्वक सिर झुकाया और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए देश और अपनी टीम की निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना की. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराकर लौटीं देश की होनहार बेटी को अपने बीच पाकर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया और लोगों ने तालियों व जयकारों के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया.
पंडित धीरेंद्र शास्त्री से लिया आशीर्वाद
बालाजी मंदिर जाने के बाद क्रांति गौड़ ने बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान, क्रिकेटर ने अपने ऐतिहासिक खेल सफर और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिले अनुभवों के बारे में बताया. गोल्ड मेडल जीतने पर उन्हें बधाई देते हुए, बाबा बागेश्वर ने उन्हें अंगवस्त्र और प्रसाद भेंट किया और भविष्य में भी वैश्विक मंच पर भारतीय क्रिकेट और देश का मान बढ़ाने के लिए आशीर्वाद दिया.
वृंदावन की घटना पर बाबा बागेश्वर ने जताई चिंता
वहीं बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हाल ही में वृंदावन में घटित घटना पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सनातन धर्म और उसकी संस्कृति पर चारों तरफ से हमले और कुठाराघात किए जा रहे हैं. ऐसे माहौल में श्रद्धालुओं को अत्यधिक सतर्क और सजग रहने की आवश्यकता है.
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
बाबा बागेश्वर ने बागेश्वर धाम आने वाली महिलाओं से खास अपील की है कि वे अकेले न आएं. अगर वे अकेले आती हैं, तो उन्हें अजनबियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, उनके साथ कहीं नहीं जाना चाहिए और धाम में ज्यादा समय तक नहीं रुकना चाहिए. धाम लगभग 5 किलोमीटर के इलाके में फैला हुआ है. मंदिर परिसर और हॉल के अंदर सुरक्षा की ज़िम्मेदारी मैनेजमेंट की है, लेकिन पूरे इलाके में सुरक्षा देना मुमकिन नहीं है. उन्होंने सभी से सतर्क और सावधान रहने, अकेले न आने और अजनबियों पर भरोसा न करने की अपील की. उन्होंने लोगों को समझदारी से काम लेने और दूसरों में भी जागरूकता फैलाने की सलाह दी.
धार्मिक स्थलों पर जाते समय आस्था बनाए रखने के साथ-साथ व्यक्तिगत सावधानी बरतना भी अब बहुत जरूरी हो गया है. पंडित धीरेंद्र शास्त्री के इस संदेश ने न केवल तीर्थ स्थल पर सुरक्षा के नियमों को स्पष्ट किया है, बल्कि श्रद्धालुओं को एक महत्वपूर्ण सीख भी दी है. सतर्क रहकर वे किसी भी अप्रिय घटना से बच सकते हैं.