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राजधानी भोपाल के बागसेवनिया पुलिस स्टेशन इलाके से शिक्षा की गरिमा को शर्मसार करने वाली एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां होमवर्क पूरा न होने जैसी मामूली बात पर एक कोचिंग टीचर ने इंसानियत की सारी हदें पार करते हुए 5वीं कक्षा के एक मासूम छात्र के साथ बेरहमी से मारपीट की. बताया जा रहा है कि जब बच्चा कोचिंग से घर लौटा, तो उसके गाल और कान पर गंभीर चोट के निशान थे. बच्चे की हालत देखकर परिवार वाले हैरान रह गए. बिना देर किए बच्चे की मां बागसेवनिया पुलिस स्टेशन पहुंची और शिकायत दर्ज कराई. शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी टीचर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है.
होमवर्क नहीं किया तो 5वीं के छात्र को बेरहमी से पीटा
जानकारी के अनुसार, पीड़ित बच्चा बागसेवनिया में कृष्णा आर्केड के सामने स्थित एडिक्शन क्लासेस में ट्यूशन पढ़ने गया था. वहां के टीचर राहुल गौर ने बच्चे द्वारा होमवर्क न किए जाने पर आपा खो दिया और उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी. जब बच्चा रोते हुए घर लौटा, तो घरवालों ने उसके चेहरे और कानों पर थप्पड़ और घूंसों के गहरे लाल निशान देखे. बच्चे से घटना के बारे में सुनकर परिवार वाले गुस्से से भर गए.
टीचर पर FIR दर्ज
मासूम छात्र की मां तुरंत बच्चे को बागसेवनिया पुलिस स्टेशन ले गईं और आरोपी टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. मां की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने आरोपी कोचिंग टीचर राहुल गौर के खिलाफ मामला (FIR) दर्ज कर लिया है. इस घटना से स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है और इसने कोचिंग संस्थानों में बच्चों की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पहले भी आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
पहले भी कई बार शिक्षकों द्वारा छात्रों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं. इससे पहले भोपाल के एक सरकारी स्कूल में एक साइंस टीचर पर मारपीट का आरोप लगने के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. शिवपुरी जिले के कैलाश इलाके के उकवाल गांव में एक प्राइमरी स्कूल टीचर पर चौथी कक्षा के 8 साल के छात्र को छड़ी से पीटने का आरोप लगा था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया.
वहीं अब भोपाल की इस हालिया घटना ने कोचिंग संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शिक्षा का मकसद मार्गदर्शन और ज्ञान देना है, न कि डर और हिंसा का माहौल बनाना. आरोपी टीचर के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से यह साफ संदेश जाता है कि बच्चों के साथ किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.