सागर शराबकांड का आरोपी फरार, फिर भी बैंक से निकाल रहा लाखों...खेती के लोन से चला रहा था ठेका
Sagar News: सागर शराब कांड का मुख्य आरोपी मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर खेती के लिए लिए गए लोन से शराब का ठेका चला रहा था. हालांकि पुलिस रिकॉर्ड में लोधी को फरार बताया गया है, लेकिन उसका बैंक अकाउंट अभी भी चालू है, जिससे कई सवाल उठते हैं.
मध्य प्रदेश के सागर जिले में 25 लोगों की जान लेने वाले चर्चित जहरीली शराबकांड का मुख्य आरोपी मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर पुलिस के लिए आधिकारिक रूप से फरार चल रहा है. उसकी गिरफ़्तारी पर इनाम घोषित होने के बावजूद उसके बैंक अकाउंट से पैसों का लेन-देन जारी है. FIR दर्ज होने और इनाम घोषित किए जाने के बाद भी 11, 14 और 15 सितंबर को आरोपी के अकाउंट से तीन सेल्फ-चेक के जरिए ₹7.95 लाख निकाले गए, जिससे पुलिस और बैंक की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
फरार आरोपी के बैंक खाते से निकले लाखों
पुलिस रिकॉर्ड में फरार चल रहे आरोपी के निजी बैंक की बंडा शाखा वाले खाते से 11 सितंबर को 1 लाख, 14 सितंबर को 6.70 लाख और 15 सितंबर को 25 हजार रुपये सेल्फ चेक के जरिए निकाले गए. सवाल यह है कि जब आरोपी फरार है तो उसके सेल्फ चेक लेकर बैंक कौन पहुंचा और भुगतान कैसे हो गया. जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी मनीष शराब कारोबार के लिए किसान गोल्ड कार्ड खाते का इस्तेमाल कर रहा था. यह खाता खेती के लिए लोन देने के लिए होता है. खाते की लिमिट 8.50 लाख रुपये थी, लेकिन 6 महीने में इससे करीब 2 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है. बैंक स्टेटमेंट में खेती से जुड़ा सिर्फ 4,082 रुपये का फसल बीमा का खर्च दर्ज है, जबकि आबकारी विभाग और शराब कारोबार से जुड़े लाखों रुपये के लेन-देन मिले हैं.
हम जांच कराएंगे- सागर एसपी
इस मामले पर सागर एसपी ने कहा कि, हम इसकी जांच करेंगे कि ऐसा कैसे हुआ. खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिली है. हम जांच कराएंगे कि एफआईआर और इनाम के बाद भी ऐसा कैसे हुआ?
2 करोड़ का लेन-देन कैसे हुआ?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8.50 लाख की लिमिट वाले किसान खाते से 6 महीने में 2 करोड़ का लेन-देन कैसे हुआ. 2 मार्च को खाते में सिर्फ 460 रुपये थे. उसी दिन 4.50 लाख रुपये नकद जमा किए गए. मार्च में ही 3 बार में कुल 15.50 लाख रुपये जमा हुए. मार्च से 16 सितंबर के बीच इस खाते से 1.98 करोड़ निकले और 1.90 करोड़ जमा हुए. खेती पर सिर्फ 4,082 रुपये का फसल बीमा कटा है, जबकि आबकारी विभाग को 18.47 लाख और सरकारी खाते में 30.47 लाख रुपये भेजे गए हैं.
इनाम घोषित होने के बाद भी जारी रहा लेन-देन
4 सितंबर को खाते में 25.31 लाख रुपये आए और एक घंटे में ही 8.50 लाख रुपये दूसरे खातों में भेज दिए गए. 5 सितंबर को 90 हजार और 7 सितंबर को 15.88 लाख रुपये ट्रांसफर हुए. इसके बाद खाते में सिर्फ 570 रुपये बचे. 6 सितंबर को एफआईआर दर्ज हुई, अगले दिन 15.88 लाख रुपये निकाल लिए गए. 9 सितंबर को इनाम घोषित होने के बाद भी 11, 14 और 15 सितंबर को सेल्फ चेक से 7.95 लाख रुपये निकाले गए. इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ऐसे कैसा हो रहा है.