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MP में उच्च शिक्षा विभाग में शिकायतों का ढेर, एक हफ्ते में निपटाने के निर्देश, जानिए कितने अटके हैं मामले

MP News: मध्य प्रदेश में विश्वविद्यालयों और क्षेत्रीय कार्यालयों में कुल 156 शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं. इसे लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने इन सभी शिकायतों का सात दिनों के भीतर समाधान करने के निर्देश जारी किए हैं.

MP में उच्च शिक्षा विभाग में शिकायतों का ढेर, एक हफ्ते में निपटाने के निर्देश, जानिए कितने अटके हैं मामले
Image Credit: MP में उच्च शिक्षा विभाग में शिकायतों का ढेर- (Photo Ai)

मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने के लिए विश्वविद्यालयों और क्षेत्रीय कार्यालयों में लंबित शिकायतों के मामले में सख्त रुख अपनाया है. विभाग ने पाया है कि अलग-अलग स्तरों पर कुल 156 शिकायतें लंबे समय से अनसुलझी पड़ी हैं. केंद्र सरकार की कड़ी निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता की जरूरत को ध्यान में रखते हुए, उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित संस्थानों को इन शिकायतों का समाधान सिर्फ सात दिनों के भीतर करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं.

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में सबसे ज्यादा शिकायतें पेंडिंग
जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, यूनिवर्सिटी लेवल पर कुल 80 शिकायतें पेंडिंग हैं, जबकि क्षेत्रीय कार्यालयों में 76 शिकायतें पेंडिंग हैं. खास संस्थानों की बात करें तो बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी (भोपाल) में सबसे ज्यादा (24) शिकायतें पेंडिंग हैं, वहीं जबकि संभागवार सूची में जबलपुर संभाग 27 शिकायतों के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है. इसके अलावा शिकायतों के वर्गीकरण के आधार पर लेवल 1 पर 85, लेवल 2 पर 15, लेवल 3 पर 36 और लेवल 4 पर 20 शिकायतें पेंडिंग हैं.

एक हफ्ते में निपटाने के निर्देश
इस स्थिति को देखते हुए 8 अक्टूबर को उच्च शिक्षा आयुक्त की मंजूरी से एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया. इसमें निर्देश दिया गया कि सभी लंबित मामलों को तय समय-सीमा के भीतर अच्छी गुणवत्ता के साथ निपटाया जाए और रिपोर्ट सौंपी जाए. यानी अनिवार्य रूप से सात दिनों के भीतर समाधान किया जाए.

प्रशासनिक लापरवाही!
उच्च शिक्षा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों का लंबित रहना साफ तौर पर प्रशासनिक सुस्ती और लापरवाही को दर्शाता है. हालांकि, केंद्र सरकार की निगरानी के दबाव में शुरू किया गया सात दिनों के भीतर शिकायतों के समाधान का कदम सराहनीय है, लेकिन भविष्य में भी छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करना उतना ही जरूरी है, ताकि उन्हें सरकारी दफ़्तरों के बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी से बचाया जा सके.

ठेकेदारों ने अपनी मांगों को लेकर खोला मोर्चा
इस बीच, मध्य प्रदेश में कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्टर्स ने कई मुद्दों और मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है. सिविल कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें कई अहम मांगें रखी गई हैं. इन मांगों में मशीनरी के मालिकाना हक की अनिवार्य शर्त को खत्म करना, सभी कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए प्राइस एस्केलेशन क्लॉज़ लागू करना, रॉयल्टी और पेमेंट की प्रक्रियाओं को आसान बनाना और बिटुमेन की कीमत में बदलाव के समायोजन की समय-सीमा को 30 दिसंबर, 2026 तक बढ़ाना शामिल है. इसके अलावा उन्होंने SBD (स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट) नियमों की समीक्षा करने और अपनी शिकायतों के समाधान के लिए एक स्थायी समन्वय समिति बनाने की भी मांग की है.

 

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Ranjana Kahar

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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