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झारखंड की राजधानी रांची में 'रैट फीवर' यानी लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) का कहर तेजी से बढ़ रहा है. पिछले एक महीने में राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में 130 मरीज सामने आए हैं. सिर्फ रानी चिल्ड्रेंस हॉस्पिटल में ही 120 से ज्यादा मरीज भर्ती कराए जा चुके हैं. डॉक्टरों के अनुसार, 5 से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों में इस संक्रमण का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है. कई बच्चों में इंफेक्शन फेफड़ों और दिमाग तक पहुंच जाने के कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती करने की नौबत आ रही है. रांची जिला सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार ने इस बीमारी को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है.
रैट फीवर क्या है?
डॉक्टरों के मुताबिक, रैट फीवर एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है. यह लेप्टोसिरा नाम के बैक्टीरिया से फैलता है. रैट फीवर इंसानों और कई जानवरों को संक्रमित कर सकता है. इस संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है.
इस बैक्टीरिया की उत्पत्ति कब हुई?
यह बीमारी हजारों साल पुरानी है. कहा जाता है कि 18वीं शताब्दी में यूरेशिया से काले और भूरे चूहों के यूरोप पहुंचने पर यह बीमारी वहां तेजी से फैली. जर्मन डॉक्टर एडोल्फ वेइल ने साल 1886 में पहली बार इंसानों में इस बीमारी के लक्षणों की स्पष्ट पहचान की. हालांकि, इस बीमारी को फैलाने वाले मुख्य बैक्टीरिया (लेप्टोस्पाइरा) की खोज जापानी मूल के प्रसिद्ध जीवाणुविज्ञानी हिदेयो नोगुची ने साल 1917 में की थी. वहीं, जापानी वैज्ञानिक रयोकिची इनादा ने साल 1915 में पहली बार सिद्ध किया कि यह बैक्टीरिया ही 'वेल्स डिजीज' (रैट फीवर का गंभीर रूप) का असली कारण है.
रैट फीवर कैसे फैलता है?
डॉक्टरों के मुताबिक, रैट फीवर एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो इन्फेक्टेड जानवरों (खासकर चूहों) के पेशाब से पानी या मिट्टी के जरिए फैलता है. यह बैक्टीरिया स्किन के कट या घाव, आंख, नाक या मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है. बारिश और बाढ़ के दौरान इसका रिस्क सबसे ज्यादा होता है. हालांकि, संक्रमित व्यक्ति को छूने, हाथ मिलाने या उसके साथ खाना खाने से संक्रमण नहीं फैलता है.
रैट फीवर के लक्षण?
लेप्टोस्पायरोसिस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं. इसमें अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, उल्टी और आंखों में लालिमा जैसी शिकायत हो सकती है. बीमारी गंभीर होने पर किडनी और लिवर पर असर, सांस लेने में परेशानी तथा अन्य जटिलताएं हो सकती हैं.
रैट फीवर से बचाव के उपाय
अगर तेज बुखार के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. गंदे पानी में घूमने से बचें. चोट लगी हो तो उसे ठीक से ढंके. बंद जूते और मोजे पहन कर चलें. मधुमेह से पीड़ित लोगों के मामले में यह सावधानी खास तौर पर महत्वपूर्ण है. पालतू जानवरों को जल्दी से जल्दी टीका लगवाएं, क्योंकि वे संक्रमण के संभावित वाहक हो सकते हैं. जो लोग रैट फीवर या लेप्टोस्पायरोसिस के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आते-जाते हैं, उन्हें तालाब में तैरने से बचना चाहिए. केवल सीलबंद पानी पीना चाहिए.