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'ब्लैकमेल करने वाला आदमी': पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग के इस बयान पर निशिकांत दुबे ने ठोका मानहानि-आपराधिक मानहानि का केस

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व वित्त सचिव के बीच बदजुबानी अब कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गई है. दोनों एक-दूसरे की पोल खोल रहे हैं. कोई पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता. अब देखना है कि अदालत इस मामले में क्या फैसला देता है.

Written By Sunil Mishra
Published: Sep 29, 2026, 01:52 PM IST | Updated: Sep 29, 2026, 01:58 PM IST
Image Credit: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग पर मानहानि और आपराधिक मानहानि का केस किया है. (File Photo)
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केंद्र सरकार ने जब इस साल की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी किए थे, तब पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने उसे गलत ठहराया था. उनके इस बयान पर विवाद भी हुआ था. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर से उनकी आलोचना की गई तो दोनों में विवाद पैदा हो गया था. जुबानी जंग इस कदर आगे बढ़ी कि बात अब मानहानि और आपराधिक मानहानि के मुकदमे तक पहुंच चुकी है. निशिकांत दुबे ने सुभाष चंद्र गर्ग के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में 2 करोड़ रुपये के मानहानि और पटियाला हाउस कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज किया है.

मानहानि के इस मुकदमे में आरोप है कि पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सांसद निशिकांत दुबे को 'ब्लैकमेल करने वाला' व्यक्ति करार दिया था. सुभाष चंद्र गर्ग ने आरोप लगाया था कि निशिकांत दुबे एक सिफारिश लेकर उनके पास आए थे, जब वे वित्त सचिव थे. सिफारिश में एलआईसी के चेयरमैन पर दबाव डालने की बात कही गई थी. गर्ग का आरोप था कि निशिकांत दुबे एलआईसी, तबादलों और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े केसों में उनका दखल चाहते थे.

दीवानी मानहानि और आपराधिक मानहानि में अंतर

आधारदीवानी मानहानिआपराधिक मानहानि
कानूनी प्रकृतिसिविल विवादआपराधिक अपराध
कानून/प्रक्रियासिविल प्रक्रिया के तहत कार्रवाईभारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356
मुख्य उद्देश्यप्रतिष्ठा को हुई क्षति के लिए हर्जाना प्राप्त करनाआरोपी को दंडित करना
मुकदमा/शिकायतजिसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची, वह अदालत में दावा करता हैपीड़ित की ओर से मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत
सजाजेल की सजा नहीं2 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों संभव
माफीमाफी मांगी जा सकती हैमामले की परिस्थितियों के अनुसार माफी का पहलू अलग हो सकता है
पुलिस की भूमिकासामान्यतः सिविल मामला होने के कारण पुलिस सीधे गिरफ्तारी नहीं करतीगैर-संज्ञेय और जमानती अपराध; पुलिस सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकती
नतीजामुख्यतः आर्थिक क्षतिपूर्ति/अन्य सिविल राहतदोष सिद्ध होने पर आपराधिक दंड

सुभाष चंद्र गर्ग के इस बयान पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कड़ी आपत्ति जाहिर की थी. दुबे का आरोप था कि गर्ग के ये आरोप झूठे, दुर्भावनापूर्ण और उनकी छवि खराब करने वाले हैं. इसी को आधार बनाकर उन्होंने मानहानि का मुकदमा दायर किया है.

निशिकांत दुबे की ओर से मानहानि और आपराधिक मुकदमा दायर करने पर सुभाष चंद्र गर्ग ने अपनी बात रखी है. उनका कहना है, "मैंने निशिकांत दुबे के मानहानि के नोटिस का जवाब दे दिया है. 26 सितंबर को आपके वकील अमित अवस्थी को अपना जवाब भेजा है. मैं इसे सबकी जानकारी के लिए यहां पोस्ट कर रहा हूं."

फिलहाल यह मामला कोर्ट में है और दोनों पक्षों की तरफ से अपने-अपने दावे पेश किए जा रहे हैं.

इनपुट: आईएएनएस

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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