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जेपीएससी घोटाला मामले में CID ने पांच आरोपियों के खिलाफ दाखिल की पहली चार्जशीट

जेपीएससी परीक्षा घोटाला मामले में CID ने 5 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की है. इनमें तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल एजेंसी के निदेशक और घोटाले के मास्टरमाइंड रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर और किंगपिन अभय कुमार तिवारी और एजेंसी कर्मी मो. उस्मान और मो. एबाद शामिल हैं.

Edited ByRanjana Kumari
Published: Oct 22, 2026, 11:05 AM IST|Updated: Oct 22, 2026, 11:23 AM IST
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जेपीएससी घोटाला मामले में CID ने पांच आरोपियों के खिलाफ दाखिल की पहली चार्जशीट
Image Credit: जेपीएससी घोटाला मामला (फाइल फोटो)

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    Ranjana Kumari

    Ranjana Kumari

    रंजना कुमारी Zee Bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-Editor अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. बिहार के सिवान जिले के जीरादेई से ताल्लुक रखने वाली रंजना स्थानीय और जमीनी मुद्दों पर गहरी पकड़ रखती हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वे मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और देश-दुनिया की अहम रूटीन खबरों को प्रमुखता से कवर करती हैं. Zee Media का हिस्सा बनने से पहले रंजना ने न्यूज इंडिया 24x7 में भी डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. एकेडमिक की बात करें तो रंजना GJU से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं.
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    झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में ओएमआर शीट की हेराफेरी, गोपनीय आंकड़ों में सेंधमारी और मेधा की सौदेबाजी से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग ने कानूनी शिकंजा कस दिया है. सीआईडी ने 90 दिनों की वैधानिक अवधि समाप्त होने से ठीक पहले रांची की अदालत में बुधवार की शाम पांच मुख्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है.

    बचे हुए आरोपियों के खिलाफ भी जल्द होगी कार्रवाई

    जांच एजेंसी की इस समयबद्ध कार्रवाई के कारण अब गिरफ्तार अभियुक्तों के लिए 'डिफॉल्ट बेल' पाने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है. साथ ही, सीआईडी इस मामले में बचे हुए अन्य आरोपियों और लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ जल्द ही दूसरी पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है. इस पहली चार्जशीट में जिन पांच मुख्य आरोपियों को नामजद किया गया है, उनमें तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल एजेंसी के निदेशक व इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड रामवीर सिंह उर्फ आरवी सिंह, मार्केटिंग मैनेजर व किंगपिन अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी, तथा एजेंसी कर्मी मो. उस्मान और मो. एबाद शामिल हैं

    अयोग्य अभ्यर्थियों को गारंटी, रेट कार्ड किया गया था तय

    सीआईडी द्वारा अदालत को सौंपी गई केस डायरी और जांच रिपोर्ट ने आयोग की गोपनीयता और पूरी परीक्षा प्रणाली को तार-तार करने वाले एक संगठित 'मेधा सिंडिकेट' का पर्दाफाश किया है. जांच में सामने आया है कि अयोग्य अभ्यर्थियों को सफलता की गारंटी देने के लिए बाकायदा एक 'रेट कार्ड' तय किया गया था. प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए 5 लाख रुपए, मुख्य परीक्षा व इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के लिए 10 से 15 लाख रुपए और अंतिम चयन के लिए 60 से 70 लाख रुपए तक की भारी-भरकम रकम वसूली जा रही थी.

    जानबूझकर खाली छोड़ी जाती थी ओएमआर शीट

    अभ्यर्थियों से सुरक्षा के तौर पर उनके मूल शैक्षणिक दस्तावेज, कोरे चेक और सादे कागजात ऐंठ लिए जाते थे. फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री की रिपोर्ट और जब्त डिजिटल उपकरणों की पड़ताल से यह साबित हुआ है कि ओएमआर शीटों को जानबूझकर खाली छोड़ दिया जाता था, जिन्हें बाद में स्कैनिंग और बैकएंड सर्वर में सीधे फेरबदल करके भर दिया जाता था.

    यह भी पढ़ें: झारखंड सरकार का बड़ा तोहफा, 100 आदिवासी छात्रों को JPSC की मिलेगी मुफ्त कोचिंग, रहना-खाना भी होगा फ्री

    संलिप्त चेहरों को बेनकाब करने के लिए जांच जारी

    इसके अलावा, गोपनीय आंसर-की को आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले ही व्हाट्सएप के जरिए लीक किया गया, जिसके एवज में तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक और उनके परिजनों के लिए दिल्ली और बेंगलुरु की हवाई टिकटें बुक कराई गई थीं. सीआईडी ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ-साथ 'झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023' की कड़ी धाराओं के तहत केस दर्किया है. इस मामले में पहली आधिकारिक सुनवाई के लिए अदालत ने 26 अक्टूबर 2026 की तिथि तय की है और सीआईडी के स्तर पर अन्य संलिप्त चेहरों को बेनकाब करने के लिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है.

    -आईएएनएस

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    JPSC