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कल रांची का JSCA स्टेडियम न केवल चौकों-छक्कों की गूंज से सराबोर था, बल्कि वहां की हवाओं में झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों की सोंधी खुशबू भी महक रही थी. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं (दीदियों) को इस बार मैच के दौरान स्टेडियम में फूड स्टॉल लगाने का ऐतिहासिक अवसर मिला. स्टेडियम में मैच देखने आए दर्शकों, खेल अधिकारियों और वीआईपी मेहमानों के लिए दीदियों ने अपने हाथों से तैयार शुद्ध और पारंपरिक झारखंडी व्यंजन परोसे. पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर स्थानीय व्यंजनों को इस तरह लाइव मैच के दौरान परोसा गया, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा. मेन्यू में छाए रहे धुसका, पीठा और मड़ुआ की रोटी दीदियों के स्टॉल पर झारखंड की संस्कृति की छाप छोड़ रही थी.
उनके द्वारा परोसे गए मेन्यू में मुख्य रूप से शामिल थे:
• धुसका और चना-आलू की सब्जी: झारखंड का यह सबसे लोकप्रिय पारंपरिक नाश्ता दर्शकों की पहली पसंद बना रहा.
• चावल का पीठा: भाप में पके हुए इस पारंपरिक पकवान की शुद्धता और स्वाद को लोगों ने बेहद पसंद किया.
• मड़ुआ (रागी) की रोटी: सेहत और स्वाद से भरपूर मड़ुआ की रोटी ने फिटनेस के शौकीनों को खूब आकर्षित किया.
• चिलका रोटी और लिट्टी-चोखा: चिलका और सोंधे स्वाद से भरपूर लिट्टी-चोखा खाने के लिए भी लोगों की लंबी कतारें देखी गईं.
सभी लोगों ने की सराहना
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल मैच के दौरान जैसे ही दर्शकों ने इन स्टॉलों का रुख किया, दीदियों के व्यवहार और खाने के बेमिसाल स्वाद ने सबका दिल जीत लिया. स्टेडियम के विभिन्न स्टैंड्स से आए क्रिकेट प्रेमियों ने कहा कि अमूमन स्टेडियमों में केवल फास्ट फूड मिलता है, लेकिन रांची में घर जैसा पारंपरिक और शुद्ध खाना मिलना एक बेहद सुखद अनुभव है.
महिला सशक्तिकरण और स्थानीय कला को मिला वैश्विक मंच
JSLPS की दीदियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मैच के मंच पर इस तरह की सफलता हासिल करना राज्य के ग्रामीण विकास के लिए एक मील का पत्थर है. इससे न केवल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि 'ब्रांड पलाश' और स्थानीय खाद्य संस्कृति को एक अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी मिल रही है.
स्टेडियम प्रशासन (JSCA) और राज्य सरकार के इस साझा प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि झारखंड की ग्रामीण महिलाओं में हुनर की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें एक सही मंच की जरूरत थी.
रिपोर्ट: कामराल जलीली