दुर्गा पूजा 2026: धनबाद में दिखेगी अंडमान के आदिवासियों की झलक, ईको-फ्रेंडली पंडाल और भव्य विसर्जन रहेगा मुख्य आकर्षण
Dhanbad News: धनबाद के झारखंड मैदान में दुर्गा पूजा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. इस बार करीब 35 लाख रुपये की लागत से ईको-फ्रेंडली पंडाल तैयार किया जा रहा है. पंडाल में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आदिवासियों के जीवन, संस्कृति और पारंपरिक आवास को दर्शाया जाएगा.
Dhanbad News: दुर्गा पूजा को लेकर धनबाद के झारखंड मैदान में तैयारियां अंतिम चरण में हैं. यहां कारीगर पंडाल को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं. इस बार पंडाल को ईको-फ्रेंडली थीम पर तैयार किया जा रहा है. इसमें अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में रहने वाले आदिवासियों के जीवन, संस्कृति और पारंपरिक आवास को दर्शाने का प्रयास किया गया है. करीब 35 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस पंडाल में प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं, आकर्षक लाइटिंग भी श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण होगी.
40 कारीगर पिछले दो महीने से जुटे हुए हैं
पंडाल के निर्माण में पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के करीब 40 कारीगर पिछले दो महीने से जुटे हुए हैं. बांस, पत्तियों और लकड़ी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से पंडाल तैयार किया जा रहा है. झारखंड मैदान का दुर्गा पूजा पंडाल हर साल अपनी अनूठी थीम के कारण खास पहचान बनाता है. इसे देखने के लिए धनबाद के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. पूजा समिति के महासचिव के मुताबिक, इस बार पंडाल के माध्यम से अंडमान-निकोबार के आदिवासियों के रहन-सहन और जीवनशैली को प्रदर्शित किया जा रहा है. इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की भी कोशिश की गई है.
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दुर्गा पूजा का विसर्जन भव्य बनाने की तैयारी
इस बार झारखंड मैदान की दुर्गा पूजा का विसर्जन भी भव्य बनाने की तैयारी है. विसर्जन के दौरान नागपुर की महिलाएं ढोल बजाती नजर आएंगी. इसके अलावा बंगाल का छऊ नृत्य और केरल व बनारस से आने वाले कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मनोरंजन करेंगे. वहीं, सैकड़ों महिलाएं हाथों में तलवार लेकर और सिर पर साफा बांधकर आकर्षण का केंद्र बनेंगी. सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक प्रस्तुतियों के जरिए विसर्जन को यादगार बनाने की योजना है.
धनबाद में ईको-फ्रेंडली दुर्गा पूजा पंडाल
कुल मिलाकर, झारखंड मैदान का दुर्गा पूजा पंडाल इस बार अपनी अनूठी थीम, ईको-फ्रेंडली निर्माण और भव्य सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए श्रद्धालुओं को एक अलग अनुभव देने के लिए तैयार है. प्राकृतिक सामग्रियों से निर्मित यह पंडाल जहां आदिवासी संस्कृति की झलक पेश करेगा, वहीं इसकी आकर्षक सजावट और भव्य विसर्जन समारोह लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है.
रिपोर्ट: नितेश कुमार मिश्रा