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केंद्र सरकार के खनिज संशोधन कानून यानी MMDR कानून के खिलाफ झारखंड में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है. इसी कड़ी में 8 सितंबर, 2026 दिन बुधवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर CPI-ML की ओर से महाधरना आयोजित किया गया. इस दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और MMDR कानून को वापस लेने की मांग की.
धरना को संबोधित करते हुए आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार MMDR कानून के जरिए झारखंड के खनिज संसाधनों पर अपना नियंत्रण बढ़ाना चाहती है. उनका कहना था कि इस कानून से झारखंड के विकास की गति प्रभावित होगी. इसका लाभ बड़े पूंजीपतियों को पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
पूर्व विधायक विनोद सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खान और खनिज संशोधन बिल को हंगामे के बीच पर्याप्त चर्चा के पारित कर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी बीजेपी सरकार जनता के सवालों पर घिरती है, तब बहुमत का इस्तेमाल कर महत्वपूर्ण विधेयकों को इसी तरह पारित किया जाता है.
विनोद सिंह ने कहा कि जिन राज्यों में खनिज संपदा मौजूद है, वहां के विकास में स्थानीय हिस्सेदारी बेहद महत्वपूर्ण है. झारखंड की खनिज संपदा से राज्य को मिलने वाले राजस्व और सेस का उपयोग प्रदेश के विकास में होना चाहिए. उन्होंने कहा कि MMDR कानून का सीधा असर झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्य पर पड़ेगा. वहीं, सिंदरी विधायक ने भी इस कानून के झारखंड से सीधे जुड़े होने की बात कही.
आंदोलनकारियों का कहना है कि झारखंड से निकलने वाले खान और खनिज पर सेस और राजस्व के जरिए राज्य के विकास में भागीदारी सुनिश्चित की जाती है. ऐसे में कानून में बदलाव से राज्य के हित और अधिकार प्रभावित होने की आशंका है. CPI-ML नेताओं ने केंद्र सरकार से MMDR कानून पर पुनर्विचार करने और झारखंड के खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार और हिस्सेदारी को सुरक्षित रखने की मांग की. धरना के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई.
रिपोर्ट: नितेश मिश्रा