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चतरा जिले के कुंदा प्रखंड के पिंजनी गांव में स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय का एक जर्जर भवन बीती रात (9 अक्टूबर, 2026) अचानक ढह गया. यह घटना रात के समय होने के कारण एक बड़ा हादसा टल गया, क्योंकि अगर यह भवन दिन में गिरता जब बच्चे स्कूल में पढ़ाई कर रहे होते, तो भारी जानमाल का नुकसान हो सकता था.
स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष
इस दुर्घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष और चिंता का माहौल है. ग्रामीणों ने स्कूल की बदहाल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इस भवन की खस्ताहाल स्थिति को लेकर पहले से ही डर और आशंका बनी हुई थी.
ग्रामीणों ने प्रशासन की ये मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित शिक्षा विभाग से मांग की है कि तुरंत मलबे को हटाया जाए और बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों की शिक्षा बाधित न हो.
विभाग को दी जा चुकी थी सूचना
वहीं, विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि इस जर्जर भवन की जर्जर स्थिति के बारे में विभाग को पहले ही कई बार लिखित व मौखिक सूचना दी जा चुकी थी. हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस खतरनाक भवन के अंदर फिलहाल बच्चों की कक्षाएं नहीं संचालित की जा रही थीं, जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया.
हो सकता था बड़ा हादसा
बता दें कि ये घटना प्रशासनिक लापरवाही पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है. समय रहते जर्जर स्कूलों की मरम्मत, उनके रख-रखाव या सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है. ये घटना तो रात की थी. अगर, दिन में होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था. इस आपदा में जानमाल की भारी क्षति हो सकती थी. भवन के अचानक गिरने से लोगों में भय का माहौल है.
रिपोर्ट: धर्मेंद्र पाठक