'घर लौटे तो जान का खतरा!': जमीन विवाद में दबंगों के डर से धनबाद रेलवे स्टेशन पर रहने को मजबूर दो बहनें
धनबाद रेलवे स्टेशन पर दो सगी बहनें रहने को मजूबर हैं. उन्होंने बताया कि वह घर नहीं जाएंगी, क्योंकि घर लौटी तो जान का खतरा है, इसलिए स्टेशन पर शरण ली है. दोनों बहनों ने कहा कि जमीन विवाद में हमें घर छोड़ना पड़ा है.
धनबाद के कुमारधुबी इलाके में जमीन विवाद को लेकर दो सगी बहनों ने दबंगों पर मारपीट और जमीन हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है. दोनों बहनें लगातार मिल रही धमकियों और मारपीट की घटनाओं से इतनी भयभीत हैं कि अपने घर लौटने के बजाय परिवार के साथ धनबाद रेलवे स्टेशन पर रहने को मजबूर हैं.
जमीन पर बाउंड्रीवॉल भी करा दी गई
पीड़ित बहनों नैना देवी और सैना देवी के अनुसार, कुमारधुबी के नीचे धौड़ा महावीर स्थान में उनकी नानी के नाम पर करीब 20 डिसमिल जमीन है, जिसे स्थानीय निवासी हरेन्द्र राम, कल्लू यादव, नागेश्वर यादव समेत अन्य लोग पूर्व वार्ड पार्षद इरफान खान के सहयोग से कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं. दोनों बहनों का दावा है कि जमीन पर बाउंड्रीवॉल भी करा दी गई है.
दो दिन पहले भी उनके साथ मारपीट की गई
उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे जमीन पर किए जा रहे निर्माण का विरोध करती हैं या पुलिस से शिकायत करती हैं, तो उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया जाता है. उनका कहना है कि दो दिन पहले भी उनके साथ मारपीट की गई, जिसमें दोनों बहनें घायल हो गईं. इसके बाद उन्होंने धनबाद के SNMMCH में इलाज कराया.
घटना के बाद से वे अपने घर जाने से डर रही
नैना देवी और सैना देवी का कहना है कि घटना के बाद से वे अपने घर जाने से डर रही हैं. घर लौटने पर उनके साथ दोबारा मारपीट करने के साथ जान से मारने की कोशिश की जा सकती है. इसी डर के कारण वे परिवार के साथ धनबाद रेलवे स्टेशन पर शरण लिए हुए हैं.
एसपी के कार्यालय में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई
पीड़ितों ने बताया कि मामले को लेकर वे कुमारधुबी ओपी, चिरकुंडा थाना और निरसा डीएसपी से शिकायत कर चुकी हैं. इसके अलावा ग्रामीण एसपी के कार्यालय में भी आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई गई है. बावजूद इसके अब तक आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है.
घर छोड़ने को मजबूर दो बहनें, धनबाद स्टेशन पर ली शरण
दोनों बहनों ने प्रशासन और पुलिस के वरीय अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जमीन विवाद का समाधान कराने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक उन्हें सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलता, तब तक घर लौटना उनके लिए मुश्किल है.
रिपोर्ट: नितेश मिश्रा