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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया गया है. वो कनॉट फ्लेस के पास मौजूद सेंट्रल पार्क जाने की कोशिश कर रहे थे. आज सुबह उन्होंने यहां तिरंगा लहराने का ऐलान किया था. उन्होंने यह कदम अपने सहयोगी सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत के बाद तिहाड़ जेल भेजे जाने के विरोध में उठाया है.
CJP ने आज कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रोटेस्ट बुलाया है. नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने तिरंगा यात्रा के लिए कोई परमिशन नहीं दी है. कनॉट प्लेस में सेक्शन 163 लागू है. दिल्ली पुलिस ने साफ कहा है कि कनॉट प्लेस के आस-पास किसी भी तरह का प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी गई है. दिल्ली पुलिस ने इसके पीछे कानून-व्यवस्था और इलाके में शांति बनाए रखने का हवाला दिया है.
#WATCH | Delhi | Visuals from the area around the Central Park where people have started gathering following CJP's call for the ‘Lehra Do Tiranga’ protest. Security forces have been deployed in and around the area to maintain law and order. https://t.co/h7VrHKb7ZP
— ANI (@ANI) October 16, 2026
अभिजीत दीपके के बाद वामपंथी छात्र संगठन अखिल भारतीय छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी डिटेन कर लिया है. नेहा बोरा के नेतृत्व में आइसा (AISA) के कार्यकर्ता मंडी हाउस के पास तिरंगा लेकर इकट्ठा हुए थे और वहां से सेंट्रल पार्क की तरफ मार्च निकाल रहे थे. पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका. इस दौरान नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया.
🚨 Breaking🚨 Delhi Police trying to forcibly detain Neha Bora as she marches again from Mandi House towards the Election Commission. https://t.co/pdqZf1w7hZ
— Neha Bora Team (@NehaAisa) October 16, 2026
अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद कॉकरोच पार्टी के कार्यकर्ता सेंट्रल पार्क के पास जुटे रहे हैं. उनके हाथों में तिरंगा है. इधर सेंट्रल पार्क के गेट पर एक नोटिस लगा है, जिसमें पार्क बंद होने की बात लिखी है.
जैसे ही CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके NCP-SCP के स्पोक्सपर्सन अनीश गवांडे के घर से निकले दिल्ली पुलिस ने उन्हें डिटेन किया. एक पुलिस अफसर ने कहा 'हम आपको प्रिवेंटिव डिटेंशन में रख रहे हैं. कनॉट प्लेस में सेक्शन 163 लागू है. आपको डिटेन किया जा रहा है.'
आज सुबह दीपके ने कहा था, बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं. इतना ही नहीं दीपके ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारियों पर उनके घर की निगरानी करने का आरोप लगाया था. दीपके ने केंद्र सरकार पर दिल्ली को बंधक बनाने का आरोप लगाया है. केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आपने दिल्ली को ठप्प कर दिया. इंटरनेट बंद कर दिया. पूरी दिल्ली में जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दी. सीजेपी संस्थापक ने इसके बावजूद आज CP (कनॉट प्लेस) से 'लहरा दो तिरंगा' अभियान लॉन्च करने का ऐलान किया है.
सीजेपी ने आज कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रोटेस्ट बुलाया है. इस इलाके में BNSS की धारा 163 लागू है. इसका मतलब ये है कि 4 या 4 से ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो सकते.
#WATCH | Delhi | As CJP Founder Abhijeet Dipke leaves from the residence of NCP-SCP spokesperson Anish Gawande, a police official says, "We are placing you under preventive detention. Section 163 is in force in Connaught Place. You are being detained..." CJP has called for ‘Lehra Do Tiranga’ protest at Central Park in Connaught Place today.
— ANI (@ANI) October 16, 2026
आज सुबह दिल्ली पुलिस झंडेवालान स्थित उस बंगले पर गई थी, जहां CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ठहरे हुए थे. पुलिस ने उन्हें उन्हें प्रदर्शन नहीं करने का नोटिस भी दिया था. इस दौरान दीपके की बहस भी हुई थी.
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. वो तिरंगा रैली में हिस्सा लेने के लिए कनॉट फ्लेट के पास मौजूद सेंट्रल पार्क जा रहे थे.
पिछले 6 दिनों के अंदर दीपके को दूसरी बार डिटेन किया गया है. इससे पहले भी 10 अक्टूबर को पुलिस ने उन्हें पकड़ा था, लेकिन अगले ही दिन छोड़ दिया था.
#WATCH | Delhi | CJP Founder Abhijeet Dipke detained by Delhi Police CJP has called for ‘Lehra Do Tiranga’ protest at Central Park in Connaught Place today. Section 163 is in effect in Connaught Place and no permission has been granted by the NDMC for the Tiranga Yatra https://t.co/J7J0IqsUjH
— ANI (@ANI) October 16, 2026
दिल्ली पुलिस की एक टीम अभिजीत दिपके को नोटिस देने के लिए यहां पहुंची है. नोटिस में कहा गया है कि कनॉट प्लेस में धारा 163 लागू है और तिरंगा यात्रा के लिए NDMC से कोई अनुमति नहीं ली गई है. दीपके से कहा गया कि अगर वह फिर भी कनॉट प्लेस गए, तो यह धारा 163 का उल्लंघन होगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
A team of Delhi Police has arrived here to give a notice to Abhijeet Dipke. The notice states that Section 163 is in effect in Connaught Place and there is no permission from NDMC for the Tiranga Yatra; if he still goes ahead to CP, it would be a violation of Section 163 and attract legal action: Delhi Police Sources
— ANI (@ANI) October 16, 2026
शरद पवार की पार्टी ने भी CJP की तिरंगा यात्रा का समर्थन किया है. NCP (शरद गुट) के प्रवक्ता अनीश गवांडे ने उनके आवास पर भी दिल्ली पुलिस के पहुंचने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मुझे अभी पता चला है कि पुलिस यहां आई है. मैं लंच के लिए बाहर गया हुआ था. वे हमारे मेहमान हैं. अनीश गवांडे ने आगे कहा कि मैं उन्हें चाय पिलाऊंगा और पूछूंगा कि वे यहां क्यों आए हैं. पहले मुझे नोटिस पढ़ने दीजिए. उन्होंने कहा कि हम सभी को तिरंगा यात्रा में शामिल होना चाहिए, हम जाएंगे.
सीजेपी की तिरंगा यात्रा के बीच पालिका बाजार को तिरंगा के रंगों से सजा दिया गया है. पूरी मार्केट खुली हुई है और चहल-पहल भी देखने को मिल रही है.
#WATCH | Delhi: Visuals from Palika Bazaar ahead of CJP's ‘Lehra Do Tiranga’ protest at Central Park today https://t.co/6VpxTB3pEr
— ANI (@ANI) October 16, 2026
सीजेपी की प्रस्तावित तिरंगा यात्रा शुरू होने से पहले ही भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवान अभिजीत दीपके के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे. उनके घर के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है.
#WATCH | Delhi Police personnel arrive at the residence of NCP-SCP spokesperson Anish Gawande, where CJP Founder Abhijeet Dipke is staying. Abhijeet Dipke has called for a ‘Lehra Do Tiranga’ protest at Connaught Place’s Central Park today. https://t.co/kCdkGpUDJU
— ANI (@ANI) October 16, 2026
AISA नेता नेहा बोरा के बांग्लादेश वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि नेहा बोरा अभी बच्ची हैं. उनके बयान को बहुत ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए. सौरभ ने कहा कि मेरा मानना है कि हमारे देश में कई महान आदर्श मौजूद हैं. जब हमारे पास शहीद-ए-आजम भगत सिंह हैं, जिन्होंने 23 साल की उम्र में फांसी को गले लगा लिया था, तो हमें किसी और देश से प्रेरणा लेने की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा कि हमें नेपाल या बांग्लादेश में प्रेरणा खोजने की कोई आवश्यकता नहीं है.
#WATCH | Delhi: On BJP's attack over Prashant Bhushan's regime change remark, Delhi AAP president Saurabh Bharadwaj says, "Govts come and go in democracy. That is what democracy is. If just one govt and one individual remain in power, it is called a dictatorship..." On Neha Bora's Bangladesh remark, he says, "Neha Bora is still a child. Her statement should not be magnified much. I believe that there are several tall ideals in our country. When we have Shaheed-E-Azam Bhagat Singh, who chose hanging at the age of 23, what is the need for us to draw inspiration from any other nation? We need not look for inspiration in either Nepal or Bangladesh..."
— ANI (@ANI) October 16, 2026
200 फीट लंबा तिरंगा लेकर AAP के तमाम नेता सड़क पर उतर चुके हैं. इस दौरान आप नेता सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे कहते हैं कि भारत में आप तिरंगा नहीं फहरा सकते. सौरभ ने पूछा कि हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते? क्या हम कुछ गलत कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई इसी बात की तो थी. अंग्रेज कहते थे कि सिर्फ अंग्रेजों का झंडा ही फहराया जाएगा और भारतीय कहते थे कि हम तिरंगा लहरा कर रहेंगे.
#WATCH | Delhi AAP president Saurabh Bharadwaj says, "They say that you cannot wave the Tiranga in India. Why can't we do that? Are we doing something? This was what the fight against the British was. The British used to say that only the British flag would be waved and Indians used to say that we would wave the Tricolour...Security is being tightened to stop the Tiranga...This is foolishness."
— ANI (@ANI) October 16, 2026
यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ बीजेपी आईटी सेल के सदस्य विकास सांकृत्यायन उर्फ विकास पांडे ने साकेत कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है. इस केस में साकेत कोर्ट ने ध्रुव राठी को समन जारी कर दिया है. कोर्ट का नोटिस उनके घर के गेट पर चस्पा कर दिया गया है. बता दें कि यह पूरा विवाद साल 2018 में अपलोड हुए एक वीडियो से जुड़ा है.
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने विरोध-प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. नए नियमों के अनुसार, विरोध-प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकारों को वैध प्रेस आईडी कार्ड अथवा PIB, DIP कार्ड साथ में रखना होगा और उसे दिखाना भी होगा. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा कि पुलिस के पूछने पर शांति से खुद को पत्रकार बताएं. निष्पक्ष रहें, प्रदर्शन में शामिल न हों और वैध पुलिस निर्देशों का पालन करें. टकराव वाले स्थान से सुरक्षित दूरी रखने की सलाह भी दी गई है. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने पत्रकारों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि भीड़ में छोटे कदमों से सावधानी से चलें और प्रदर्शनकारियों, पुलिस व अन्य खतरों के सापेक्ष अपनी स्थिति लगातार जांचते रहें. भीड़ के व्यवहार और आवाज में बदलाव पर नजर रखें, हमेशा एक निकासी मार्ग तय रखें और उसे अपडेट करते रहें. पत्रकारों को धुएं या आंसू गैस में भीड़ के भीतर जाने के बजाय सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलने की सलाह दी गई है. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने साफ कहा कि एक्सक्लूसिव फुटेज का दबाव सुरक्षा पर हावी न हो.
सीजेपी के प्रस्तावित तिरंगा मार्च के खिलाफ दिल्ली के कुछ ट्रेडर्स की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके इस प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई. याचिका में कहा गया था कि इस प्रदर्शन के चलते उनके कारोबार पर गलत असर पड़ रहा है. याचिकाकर्ताओं के वकील जय अनंत की ओर से CJI की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामला रखा गया. वकील ने कहा कि इस प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस के दुकानदारों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सभी लोग समझदारी से काम लेंगे. सीजेआई ने कहा कि छोटी दुकानें चलाने वाले लोग त्यौहार के मौसम में कमाई करते हैं. अगर उनका कारोबार प्रभावित हुआ, तो उनके पूरे परिवार को आर्थिक परेशानी हो सकती है. वहीं, जस्टिस बागची ने कहा कि प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों के साथ-साथ छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी का भी ध्यान रखना जरूरी है. अगर प्रदर्शन के कारण दुकानदारों को आर्थिक नुकसान होता है, तो सुप्रीम कोर्ट अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है. फिलहाल, पहले देखते हैं कि आगे क्या होता है? सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर तुरंत सुनवाई से इंकार कर दिया. कोर्ट 26 या 27 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई करेगा.
राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस के इतिहास के पन्नों को पलटकर देखिए, कई काले अध्याय आपको मिलेंगे. चुनाव आयोग और इस देश की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले राहुल गांधी की कांग्रेस ने चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को किस प्रकार अपनी कठपुतली बनाकर रखा था. 1993 में कांग्रेस सरकार ने चुनाव आयोग में अचानक बदलाव करते हुए रातों-रात 2 नए इलेक्शन कमिश्नर नियुक्त कर दिए थे. मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश की थी, लकिन कांग्रेस ने न केवल नवीन चावला को बचाने का काम किया, बल्कि उन्हें चीफ इलेक्शन कमिश्नर भी बनाया था.
राहुल गांधी के 'हाइड्रोजन बम' वाले बयान पर कटाक्ष करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उनका हाइड्रोजन बम, दिवाली का पटाखा भी नहीं बनेगा. उनका हर मामला झूठ और नाटक था. SIR पर कांग्रेस को घेरते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी ने एक भी औपचारिक अपील दाखिल नही की. राहुल गांधी जवाब दें कि यह वोट चोरी है या काम चोरी.
राजनाथ सिंह ने कहा कि राजनीतिक अवसरवाद के बहाने भारत के विकास को बाधित नहीं किया जा सकता है. राहुल गांधी को अपनी मूर्खता पर आत्ममंथन करना चाहिए. भारत के भविष्य की जिम्मेदारी सबकी बनती है. कांग्रेस के संरक्षण और शासनकाल में तीन सबसे बड़े और अक्षमय अपराध हैं. उनका पहला अक्षम्य अपराध था- 1975 में इंदिरा जी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी. दूसरा अक्षम्य अपराध था- 1984 में सिख भाई-बहनों का नरसंहार और तीसरा अक्षम्य अपराध था- 1990 में रामभक्त कारसेवकों के खून की गंगा बहाने वाले लोगों को समर्थन देकर उनकी सरकार को बचाना और चौथा- आज कांग्रेस द्वारा संविधान, संवैधानिक मुल्यों और संस्थाओं पर चोट पहुंचा कर किया जा रहा है.
रक्षामंत्री ने कहा कि उनकी (राहुल गांधी) लड़ाई चुनाव सुधार, SIR या ज्ञानेश कुमार के लिए नहीं है. उनकी लड़ाई देश के नौजवानों के लिए नहीं है, बल्कि देश में एनार्की यानी अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की साजिश है. जब राजनीतिक स्वार्थ को सत्य और राष्ट्रहित से ऊपर रखा जाता है. लोकतांत्रिक विमर्श तथ्यों और तर्कों के बजाय दुराग्रहों और दुष्प्रचार का शिकार हो जाता है. राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में अराजकता फैलाने, संवैधानिक संस्थानों की साख पर चोट करने या भारत की विकास यात्रा में बाधा डालने का रास्ता नहीं है. सर्वोच्च न्यायालय की कल की टिप्पणी भी इसी का एक संकेत है. कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कानून का सम्मान करना भी आवश्यक है. भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं राजनीतिक स्वार्थों की बलि नहीं चढ़ाई जा सकती हैं.
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में जो पिछले घटनाक्रम हुए हैं, वे कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं. ऐसा लगता है कि कांग्रेस और उनके राजनीतिक सहयोगी प्रत्यक्ष रूप से और अपने समर्थक संगठनों के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र निर्माण कार्यों में लगाने की बजाय, अराजकता फैलाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. देश के नौजवानों को अराजकता का साधन बनाने की कोशिश की जा रही है. बांग्लादेश की तर्ज पर बवाल फैलाना चाहते हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर इसे स्वीकार कर रहे हैं. इनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है.