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Indian Union Muslim League Supports Al Hammami: पाप करने वाले को दंड न देना और उसका पक्ष लेना, स्वयं पाप करने के समान है. जो व्यक्ति हिंसक और क्रूर लोगों का समर्थन करता है, वह उनकी बर्बरता में बराबर का भागीदार होता है. दुर्भाग्य से हमारे देश में भी ऐसे कट्टरपंथियों की भरमार है जो आतंकियों के पक्ष में भी पूरे आत्मविश्वास के साथ नैरेटिव गढ़ लेते हैं. केरल में कांग्रेस के साथ सरकार चला रही इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का नाम ऐसे ही जहरीली कट्टरपंथी सोच वाले संगठनों में शामिल है.
34 हजार फीट की ऊंचाई पर फ्लाई दुबई का विमान हाईजैक करने की साजिश रचने वाला को-पायलट हमाम अल-हम्मामी दुनिया के लिए आतंकवादी है. लेकिन इनके लिए सिर्फ पीड़ित है. उड़ते विमान में भारतीय पायलट पर हमला करने वाले हम्मामी को हीरो साबित करने की कोशिश हो रही है. और ये सब तब हो रहा है, जब इस हमलावर को लेकर लगातार नए-नए और डराने वाले खुलासे हो रहे हैं. आज भी कई बड़े खुलासे हुए हैं.
हम्मामी ने कितनी खतरनाक आतंकी साजिश रची थी, उसकी सोच कितनी कट्टर थी और उसके दिमाग में कितनी जहरीली नफरत भरी हुई थी, इसका खुलासा हम्मामी से UAE की एजेंसी की पूछताछ में हुआ है. इजरायल का दावा है कि पूछताछ में हम्मामी ने बेहद डराने वाली जानकारी दी.
एयरक्राफ्ट को हाईजैक करने की साजिश करनेवाले हम्मामी ने फ्लाई दुबई एयरलाइंस में नौकरी सिर्फ और सिर्फ इसलिए ज्वॉइन की थी क्योंकि उसे विमान को क्रैश करके बड़ी तबाही मचानी थी. यानी उसे पायलट इसलिए नहीं बनना था कि वो विमान उड़ाने का रिकॉर्ड बनाए. वो पायलट इसलिए बनना चाहता था क्योंकि वो विमान क्रैश कराए.
उसने दुबई की सरकारी एयरलाइन में नौकरी मिलने से पहले ही आतंकी हमले की योजना बना ली थी. यानी हम्मामी ने बहुत सोच समझकर इस आतंकी साजिश की प्लानिंग की थी. ये किसी क्षणिक आवेश में हुई घटना नहीं थी. ये सोची-समझी आतंकी साजिश थी.
अपने दिमाग में इजरायल पर आतंकी अटैक की प्लानिंग करने के बाद हम्मामी ने फ्लाई दुबई में नौकरी की क्योंकि फ्लाई दुबई डायरेक्ट तेल अवीव के लिए उडान भरती है. ऐसे में फ्लाई दुबई की फ्लाइट को हाईजैक कर वो इजरायली नागरिकों को निशाना बना सकता था. नौकरी मिलने के बाद हम्मामी किसी स्लीपर सेल की तरह बेहद शातिराना तरीके से इंतजार करता रहा. कब इजरायल वाली फ्लाइट के कॉकपिट में उसकी ड्यूटी लगे और वो अपनी साजिश को अंजाम दे.
30 सितंबर को पहली बार नहीं था जब आतंकी वायरस से संक्रमित हमाम-अल-हम्मामी ने प्लेन क्रैश की साजिश की. उसने पहले भी तेल अवीव के लिए एक फ़्लाइट उड़ाई थी. तब भी उसका इरादा प्लेन को हाईजैक कर इजरायल में क्रैश कराने का था. लेकिन उसने इरादा बदल दिया क्योंकि प्लेन में सवार कोई पैसेंजर उसकी जान-पहचान का था. सोचिए ये कितनी जहरीली मानवता विरोधी सोच है कि जिसके लिए अपना एक जानने वाला महत्वपूर्ण है. लेकिन सैकड़ों निर्दोष आम लोगों का जीवन इनके लिए कोई मूल्य नहीं रखता.
हम्मामी ने कॉकपिट में मुख्य पायलट स्मित मच्छार की हत्या करने के बाद एयरक्राफ्ट को तेल अवीव के पास बेन-गुरियन एयरपोर्ट पर क्रैश करने की साजिश की थी. वो किसी भी सूरत में विमान को इजरायल के किसी एयरपोर्ट या किसी गगनचुंबी इमारत से टकराना चाहता था. उसके अंदर इजरायल विरोध वाली जहरीली सोच इतनी हावी थी कि वो विमान में सवार यात्रियों के साथ ही इजरायल के एयरपोर्ट पर मौजूद आम नागरिकों और अधिकारियों को भी मारना चाहता था.
इन खुलासों से साफ है 30 सितंबर को जो हुआ वो एक दिन की प्लानिंग नहीं थी. हम्मामी को जैसे ही मौका मिला तो उसने 174 यात्रियों की जान को दांव पर लगा दिया. हालांकि कैप्टन स्मित मच्छार के साहस के सामने उसकी साजिश नाकाम हो गई. लेकिन इस नाकाम साजिश ने उन लोगों के चेहरे से नकाब उतार दिया जो मानवता, इंसानियत, करुणा और सद्भाव जैसे शब्दों की आड़ में अपनी विषैली सोच को छिपाते हैं.
महाभारत के शांति पर्व में महात्मा विदुर ने कहा है कि जो मनुष्य अधर्मी, क्रूर और हिंसक लोगों का साथ देता है या उनके कुकृत्यों को सही ठहराता है, वह बुद्धिहीन है, क्योंकि आग की रक्षा करने वाला स्वयं जल जाता है.
आज ऐसे ही नफरत की कट्टरपंथी आग से कुछ लोग अपना राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रहे हैं. आप हैरान होंगे ये जानकर कि हमारे अपने देश में एक ऐसा वर्ग है जो हम्मामी को निर्दोष बताने वाले इंटरनेशनल कट्टरपंथी नैरेटिव का प्रचार-प्रसार कर रहा है.
सोचिए, जिस घटना को पूरी दुनिया आतंकी वारदात कह रही है. जांच में हर रोज इस नाकाम आतंकी साजिश को लेकर नए-नए खुलासे हो रहे हैं. उसे भारत में बैठे विशेष सलेक्टिव सोच वाले लोग राजनीतिक साजिश बता रहे हैं. किसकी साजिश, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की साजिश. चुनावी फायदे के लिए की गई साजिश. इस कुतर्क श्रृंखला पर विस्तार से चर्चा करेंगे, लेकिन पहले समझते हैं कि ऐसा कहनेवाले, लिखनेवाले और सोचनेवाले लोग हैं कौन.
आतंकी पायलट..मुस्लिम लीग के लिए 'पीड़ित'! ओमानी पायलट पर नया खुलासा..बड़ा खुलासा. प्लेन क्रैश करने के लिए ही पायलट बना हम्मामी?
— Zee News (@ZeeNews) October 5, 2026
ये पोस्टर और रिपोर्ट छपी है केरल की पत्रिका चंद्रिका में. ये राजनीतिक या साहित्यिक मैगजीन नहीं है. ये केरल की पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की मैगजीन है. यानी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के कर्ताधर्ता जो सोचते हैं वो इस मैगजीन में छपता है.
हम पार्टी का नाम फिर से आपको बताते हैं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग. नाम में खास शब्द मुस्लिम लीग जुड़ा है. एक मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना थे. उस मुस्लिम लीग ने देश का बंटवारा कराया था. अब जो इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग केरल में राजनीति करती है उसकी सोच उसके नाम से प्रतिबिंबित होती है. ये केरल में कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा है. विधानसभा में इसके 22 सदस्य हैं. राज्य सरकार में 5 मंत्री भी हैं.
केरल की सरकार में शामिल पार्टी ये कह रही है कि हम्मामी ने एयरक्राफ्ट को हाईजैक करने की साजिश नहीं की. मतलब हम्मामी निर्दोष है. चुनाव जीतने के लिए नेतन्याहू ने ये साजिश रची. अपनी इस कपोल कल्पना को साबित करने के लिए कुछ घटनाओं को एक साथ जोड़कर शाब्दिक जाल बुनकर एक कुतर्क गढ़ा गया. पहले इनके कुतर्क को समझिए:
27 सितंबर को नेतन्याहू ने मोसाद के अधिकारियों के साथ बैठक की. 29 सितंबर को नेतन्याहू ने टीवी प्रसारण में कहा कि इजरायल के सामने गंभीर खतरा है. 30 सितंबर को प्लेन हाईजैक वाली साजिश हुई.
सोचिए, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग में कितने तेजस्वी और उर्वर बुद्धि वाले नेता हैं. कुछ घटनाओं को जोड़ा और अपनी मनमानी साजिश वाली थ्योरी गढ़ दी. इनके लिए UAE की ओर से इस घटना को आतंकी वारदात बताना न्यूनतम महत्व भी नहीं रखता है. तमाम जांच एजेंसियां भी इसे आतंकी घटना मान रही हैं. लेकिन IUML के नेता सभी एजेंसियों की जांच को, उनकी सामूहिक क्षमता को शून्य मानते हैं. दरअसल वो शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर गाड़ कर अपनी मनमानी थ्योरी को ही प्रचारित करेंगे क्योंकि इन्हें सच से मतलब नहीं है.
इनका मानवता से कोई वास्ता नहीं. इन्हें मतलब सिर्फ और सिर्फ अपने वोट बैंक से है. उस वोट बैंक से जो कट्टरपंथ के नॉन वॉशेबल रंग में पूरी तरह रंगी हुई है. इनके लिए इजरायल के नागरिक मनुष्य नहीं सिर्फ दुश्मन हैं. इसलिए ये अहिंसा और सार्वभौमिक सद्भाव की धरती भारतभूमि में रहते हुए भी खूनी साजिश रचनेवाले हम्मामी के बचाव में कुतर्क गढ़ रहे हैं. ये पहली बार नहीं है जब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने अपने कट्टरपंथी DNA का प्रदर्शन किया हो.
अप्रैल 2025 में कासरगोड में IUML के नेता ने कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर सोशल मीडिया पर एक भड़काऊ पोस्ट लिखी थी. अक्टूबर 2023 में IUML ने केरल के कोझिकोड में 'फिलिस्तीन एकजुटता रैली' की थी, मंच से IUML के नेताओं ने इजरायल पर खूनी हमला करनेवाले हमास के आतंकियों की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से की थी. केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने IUML पर चुनावी फायदे के लिए जमात-ए-इस्लामी और PFI से जुड़े SDPI जैसे कट्टरपंथी संगठनों के साथ राजनीतिक गठबंधन का आरोप लगाया था.
2003 में माराड में खूनी हिंसा में 9 लोगों की हत्या हुई थी. इस हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए और दोषी ठहराए गए 80 से ज्यादा लोग IUML से जुड़े थे. हमने आपको सिर्फ चुनिंदा घटनाएं बताई हैं. अब सोचिए जिस पार्टी के नेता पहलगाम में आतंकियों की गोली के शिकार निर्दोष नागरिकों की मौत को राजनीतिक साजिश बता सकते हैं. जो हमास के आतंकियों को स्वतंत्रता सेनानी बता सकते हैं. उनके लिए कट्टरपंथी हमाम अल हम्मामी ही नायक हो सकता है. अफसोस यही है कि ऐसे लोग हमारे देश में हैं. और ऐसे लोगों के समर्थक भी हमारे देश में हैं.
भारतीय ज्ञान परंपरा में कहा गया है कि हर व्यक्ति को सोच-समझ कर अपने मित्र चुनने चाहिए. क्योंकि संगति का असर भी हमारे व्यक्तित्व हमारी सोच पर पड़ता है. IUML कांग्रेस की साझीदार है. अब कांग्रेस के नेता भी IUML की कट्टरपंथी सोच वाले वायरस से संक्रमित हो रहे हैं.
वैचारिक मित्रता का यही सूत्र कट्टरपंथियों को आपस में जोड़ता है. हम्मामी को निर्दोष माननेवाली सोच केरल के कट्टरपंथियों को वैश्विक अतिवादियों की जमात से जोड़ती है. इस जमात का अगुआ है पाकिस्तान. तर्क और विज्ञान को तिलांजली दे चुके पाकिस्तानी कैसे हम्मामी को निर्दोष बताने के लिए साजिश वाली थ्योरी को आगे बढ़ा रहे हैं उसे आप बहुत गौर से जानिए.
सोचिए जो आदमी डिप्लोमेट रहा है, वो कैसे-कैसे तर्क दे रहा है. मतलब अगर आतंकी साजिश नाकाम हो गई, किसी निर्दोष की अकाल मृत्यु नहीं हुई तो पाकिस्तानी इसे आतंकी साजिश मानेंगे ही नहीं. अगर आतंकी साजिश कामयाब हो गई होती तो अब्दुल बासित जैसे लोग स्टूडियो में बैठकर हम्मामी के पाप पर पर्दा डालने के लिए कुछ और कुतर्क गढ़ रहे होते.
सोचिए कैसी घृणित सोच वाले लोग इस धरती पर हैं. ऐसे लोगों की पहचान कीजिए. बौद्धिक अतिवादियों का यही नेटवर्क हम्मामी जैसे कट्टरपंथियों को वैचारिक खुराक देता है. उन्हें यकीन दिलाता है कि तुम्हारे हर पाप को विरोध का मुलम्मा पहनाकर उसे महिमामंडित करेंगे. ये मानवता के अपराधी हैं. ऐसे विषैले विचारवालों का उनके कट्टरपंथी नैरेटिव का विरोध भी जरूरी है क्योंकि हमारी चुप्पी उनके साहस को बढ़ाती है.