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PAK से फंडिंग, 6 लेयर का नेटवर्क! कैसे युवाओं को फंसाता था शहजाद भट्टी गिरोह? जिसे सरकार ने घोषित किया आतंकी संगठन

शहजाद भट्टी पाकिस्तान का सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और गैंगस्टर है. उस पर ISI के साथ मिलकर भारत में जासूसी और हिंसा का नेटवर्क चलाने का आरोप है. जानिए कौन है शहजाद भट्टी, उसकी क्राइम कुंडली और कैसे चलता था उसका पूरा नेटवर्क.

PAK से फंडिंग, 6 लेयर का नेटवर्क! कैसे युवाओं को फंसाता था शहजाद भट्टी गिरोह? जिसे सरकार ने घोषित किया आतंकी संगठन
Image Credit: शहजाद भट्टी नेटवर्क की क्राइम कुंडली

शहजाद भट्टी... इस वक्त सुरक्षा एजेंसियों से लेकर मीडिया तक इसी नाम की गूंज है. वजह है भारत में उसके सिंडिकेट पर हुआ सबसे बड़ा एक्शन. केंद्र सरकार ने 16 सितंबर को 'शहजाद भट्टी नेटवर्क' (SBN) पर कड़ा शिकंजा कसते हुए इसे UAPA के तहत आतंकी संगठन घोषित कर दिया है, लेकिन कौन है यह शहजाद भट्टी? किस तरह इसने सोशल मीडिया की आड़ में आतंक की नई पौध तैयार की और भारत के लिए मोस्ट-वांटेड खतरा बन गया? आइए जान लेते हैं इस नेटवर्क का पूरा कच्चा-चिट्ठा....

गृह मंत्रालय के मुताबिक, शहजाद भट्टी का गैंग पाकिस्तान से हथियार, बम-गोले और नशीली दवाएं भारत भेज रहा था. यह गिरोह पैसों का लालच देकर भारतीय लड़कों और छोटे अपराधियों को भड़काता था और सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले वीडियो डालता था, ताकि देश का माहौल खराब हो सके. इस नेटवर्क पर देश भर में अब तक 80 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं.

लंबे समय से टारगेट पर था शहजाद भट्टी नेटवर्क

शहजाद भट्टी नेटवर्क लंबे समय से सरकार के टारगेट पर था. अगस्त 2026 में गृह मंत्री अमित शाह ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े इस नेटवर्क को ध्वस्त करने की जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि 15 अगस्त से पहले ISI समर्थित आतंकी समूह 'शहजाद भट्टी नेटवर्क' को खत्म कर दिया गया है. इससे जुड़े 200 से ज्यादा गुर्गों को गिरफ्तार किया गया है. सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर खुद को शरीफ बिजनेसमैन और धर्म का ठेकेदार बताने वाला पाकिस्तानी शहजाद भट्टी भारत के लिए बड़ा सिरदर्द है. नीचे जानिए उसके बारे में..

कौन है शहजाद भट्टी?

शहजाद भट्टी पाकिस्तान के पंजाब का रहने वाला है. उसकी उम्र 45 साल के करीब है. वो पहली बार 2013 में तब चर्चा में आया जब उस पर चोरी और लूट के केस दर्ज हुए थे. बाद में उस पर रेप जैसे संगीन आरोप भी लगे. कहा जाता है कि पुलिस से बचने के लिए वह 2015 के आसपास दुबई (UAE) भाग गया और वहां कबाड़ (स्क्रैप) व डेयरी का धंधा चलाने का दिखावा करने लगा.

2018 में जब टिकटॉक और इंस्टाग्राम का चलन बढ़ा, तो भट्टी ने '333' नाम से वीडियो बनाने शुरू कर दिए. वह धर्म, देश और इंटरनेट के झगड़ों पर बोलकर लाखों फॉलोअर्स जुटाने लगा. आरोप है कि कैमरे पर वह खुद को शरीफ व्यापारी दिखाता था, लेकिन असल में पर्दे के पीछे से पाकिस्तानी एजेंसी ISI के इशारे पर भारत के खिलाफ आतंकी नेटवर्क खड़ा कर रहा था.

जुर्म की दुनिया में एंट्री और फिर देश छोड़कर भागा

शहजाद भट्टी ने अपराध की शुरुआत पाकिस्तान के पंजाब से की, जहां उस पर कई गंभीर मुकदमों की लाइन लग गई. लाहौर के अंडरवर्ल्ड में उसने कुख्यात गैंगस्टर फर्रुख खोखर से हाथ मिलाया. जब पुलिस का फंदा कसने लगा, तो वह पाकिस्तान से भाग निकला. एजेंसियों के मुताबिक, वह लंबे समय तक दुबई और खाड़ी देशों में छिपकर अपना नेटवर्क चलाता रहा, जबकि हाल की जांच में उसके ब्राजील में छिपे होने की खबर मिली है.

'333' ब्रांड के जरिए सोशल मीडिया को भर्ती का अड्डा बनाया

खुद सामने आने के बजाय भट्टी ने इंटरनेट को अपना हथियार बनाया. उसने '333' नाम से वीडियो डालकर लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काना शुरू किया. इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब के जरिए वह भारत के ऐसे लड़कों को ढूंढता था, जो गरीब हों या नशे के आदी हों. फिर उन्हें आसानी से रुपये कमाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाता और उनका ब्रेनवॉश करता था.

NIA के पूर्व स्पेशल डीजीपी अतुलचंद्र कुलकर्णी ने क्या कहा?

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के पूर्व स्पेशल डीजीपी अतुलचंद्र कुलकर्णी ने News18 से बातचीत में इस पूरे ऑपरेशन की परतें खोली थीं. उन्होंने बताया था कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे नौ महीने (नवंबर 2025 से अगस्त 2026) तक शहजाद भट्टी नेटवर्क की एक-एक कड़ी को ट्रैक किया. 14 राज्यों में चले साझा ऑपरेशनों में 253 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और 200 से ज्यादा गुर्गों को गिरफ्तार कर इस सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया. कुलकर्णी के अनुसार, यह पाकिस्तान समर्थित टेरर-गैंगस्टर सिंडिकेट सोशल मीडिया के जरिये भारतीय युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें हिंसा, अपराध और जासूसी के दलदल में धकेल रहा था.

तीन खास मददगार और 15 गुर्गे, ऐसे चलता था पूरा खेल

जांच एजेंसियों के मुताबिक, शहजाद भट्टी इस गिरोह का बॉस है, जो सीधे पाकिस्तानी एजेंसी ISI के इशारे पर काम करता है. गिरोह को चलाने के लिए उसके तीन सबसे खास मददगार हैं.

1. शनि टाइगर: इसका काम हथियारों का इंतजाम करना और नए लड़कों का ब्रेनवॉश करना है.

2. जफर सुपारी: इसका काम सोशल मीडिया पर एक्टिव रहकर भारत के लड़कों को गिरोह में फंसाना है.

3. फारुख खोखर: इसका काम हथियारों की सप्लाई करना और गैंग के बीच तालमेल बैठाना.

इन तीन के नीचे 15 ऐसे शातिर गुर्गे हैं, जिन्हें अलग-अलग काम सौंपे गए हैं जैसे हथियार पहुंचाना, टारगेट की जासूसी (रेकी) करना और नए लड़कों को जोड़ना.

6 लेयर मॉडल के जरिए दहशत फैलाने का खेल

शहजाद भट्टी का गैंग कोई एक बड़ा धमाका करने के बजाय छोटी-मोटी वारदातें करके दहशत फैलाना था. इसके लिए उसने बाकायदा 6 स्टेप्स का एक पक्का प्लान बना रखा था. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि देश को खतरे में डालने वाले इतने खतरनाक काम के लिए वह यहां के लड़कों को सिर्फ दो से दस हजार रुपये जैसी मामूली रकम थमा देता था.

आसान शिकार की तलाश: ऐसे लड़कों को चुनना जो बेरोजगार हों, नशे की गिरफ्त में हों या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हों.

फर्जी सिम का जुगाड़: किसी अनजान या जरूरतमंद व्यक्ति को 2,000 से 5,000 रुपये का लालच देकर उसके नाम पर सिम कार्ड हासिल करना.

बाजार से कैमरे खरीदना: स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक दुकानों से सस्ते और सामान्य सीसीटीवी कैमरे जुटाना.

ठिकाने पर नजर: जिस जगह को निशाना बनाना होता, उसके ठीक सामने या आसपास छिपकर ये कैमरे फिट करना.

सीमा पार लाइव फीड: उस सिम से इंटरनेट जोड़कर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को कैमरों का सीधा (लाइव) एक्सेस देना, ताकि वे वहां बैठकर पल-पल की निगरानी कर सकें.

हमले को अंजाम: रेकी पूरी होते ही लड़कों के हाथ में हथियार थमाकर वारदात करवाना.

भारत में 3 हमलों से खुली भट्टी के आतंकी नेटवर्क की पोल

जालंधर में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के घर पर ग्रेनेड फिंकवाना हो, सिरसा के महिला थाने पर हमला या फिर अंबाला में खड़ी कार में ब्लास्ट... इन तीनों वारदातों ने शुरुआत में पुलिस को काफी उलझाया, लेकिन जांच एजेंसियों ने जब एक-एक सुराग जोड़ना शुरू किया, तो सबके तार एक ही जगह जाकर जुड़े. पैटर्न बिल्कुल साफ था, पाकिस्तान में बैठे आका, वॉट्सऐप और टेलीग्राम के ग्रुप और पैसों के लालच में मोहरा बने भारत के स्थानीय लड़के. NIA की जांच में यह साफ हो गई कि भट्टी सात समंदर पार बैठकर मोबाइल के जरिए भारत में खून-खराबे का खेल चला रहा था. अब सरकार ने बिना देर किए एक्शन लिया और उसके पूरे सिंडिकेट पर आतंकी संगठन का ठप्पा लगाकर ताला जड़ दिया.

शहजाद भट्टी के गुनाहों की क्राइम कुंडली

16 मार्च 2025: जालंधर में यूट्यूबर रॉजर संधू के घर पर ग्रेनेड से हमला करवाया. इस पूरी साजिश के पीछे भट्टी का हाथ निकला और NIA ने अपनी चार्जशीट में इसका नाम दर्ज किया.

25 नवंबर 2025: गुरदासपुर सिटी थाने पर हैंड ग्रेनेड फेंकने वाले पकड़े गए, तो उन्होंने साफ कबूला कि वे भट्टी के इशारे पर ही काम कर रहे थे.

22 फरवरी 2026: पंजाब में दो पुलिसकर्मियों की चुन-चुनकर हत्या (टारगेट किलिंग) की गई. जांच एजेंसियों ने इसमें भट्टी से जुड़े TTH (TTH) नेटवर्क का हाथ पाया.

5 अप्रैल 2026: गुजरात से दबोचा गया विक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की सीधे शहजाद भट्टी के टच में निकला.

5 मई 2026: जालंधर में BSF हेडक्वार्टर के बाहर IED ब्लास्ट हुआ. पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया कि ऑर्डर सीधे भट्टी ने दिया था.

मई 2026: पुलिस ने 'ऑपरेशन गैंग बस्ट' चलाकर पंजाब समेत कई राज्यों में भट्टी के ऑनलाइन नेटवर्क की धज्जियां उड़ाईं और 300 से ज्यादा संदिग्धों को धर दबोचा.

24 मई 2026: पंजाब में एक और पुलिसवाले की टारगेट किलिंग में भट्टी के ही नेटवर्क का नाम सामने आया.

28 मई 2026: पंजाब और दिल्ली के अस्पतालों, सियासी दफ्तरों और संवेदनशील ठिकानों पर हमले की बड़ी साजिश का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें इसका सिंडिकेट शामिल था.

16 जून 2026: दिल्ली पुलिस ने एक इंटरनेशनल हथियार और ड्रग सिंडिकेट पकड़ा, जिसके तार सीधे भट्टी से जुड़े थे.

26 जून 2026: जालंधर में जासूसी के एक बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ. तीन जासूस पकड़े गए, जो सीधे शहजाद भट्टी को भारत की जानकारियां भेज रहे थे.

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About the Author

Bhoopendra Rai

Bhoopendra Rai

पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
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