SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

साबरमती जेल में लॉरेंस पर '200 खोली' वाला पहरा: 7.5x11 की कालकोठरी में बंद हुआ गैंगस्टर, रंगदारी नेटवर्क ध्वस्त

लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल की बेहद हाई सिक्योरिटी वाले ब्लॉक में शिफ्ट किया गया है, जहां कुख्यात बदमाशों को रखा जाता है. इस ब्लॉक में 2008 बम धमाके का आरोपी भी बंद है.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 27, 2026, 07:45 AM IST | Updated: Oct 27, 2026, 08:02 AM IST
Image Credit: लॉरेंस बिश्नोई कई वर्षों से साबरमती जेल में कैद है.
Join

कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के '200 खोली' नाम के हाई सिक्योरिटी ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया है. इस ब्लॉक में 200 खतरनाक कैदियों को रखा गया है, जिन पर जघन्य अपराध और आतंकवाद के आरोप हैं.TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह से अलग-थलग रखने और एक सेल से दूसरे सेल में जाने से रोकने के लिए, इस ब्लॉक को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, जिनमें से हर हिस्से में 50 कैदी रखे जा सकते हैं. उसके सेल का आकार लगभग 7.5x11 फुट है. यह कदम बिश्नोई के पर कतरने की एक सिक्योरिटी प्लानिंग का हिस्सा है.

लॉरेंस को उस ब्लॉक में रखा गया है, जहां 2008 के धमाकों के दोषी भी बंद है. 2023-2024 से पहले, लॉरेंस अक्सर रंगदारी के लिए कॉल करता था, अपना नेटवर्क चलाने के लिए धमकी भरे ऑडियो और वीडियो मैसेज भेजता था. यहां तक कि अलग-अलग जेलों से इंटरव्यू भी देता था. लेकिन जांचकर्ताओं के मुताबिक, पिछले दो सालों में उसकी तरफ से कोई भी सीधी कॉल या बातचीत नहीं हुई है.

पिछले दो सालों में, जांचकर्ताओं को लॉरेंस बिश्नोई की ओर से कोई भी सीधी कॉल या बातचीत देखने को नहीं मिली है.

क्या है '200 खोली'?

साबरमती जेल के अंदर '200 खोली' बेहद सेफ (मैक्सिमम-सिक्योरिटी) वाला इलाका है. यहां 2008 के सीरियल धमाकों और अन्य गंभीर मामलों के दोषी बंद हैं. आम तौर पर, यह ब्लॉक उन कैदियों के लिए है, जिन्हें गंभीर अपराधों का दोषी ठहराया गया है और जिन्हें BNSS की धारा 303 के प्रावधानों के तहत जेल से बाहर जाने की इजाजत नहीं है.

ड्रग्स वाली 'सुई' से सियासत हिली...हाथ में धंसी हुई थी सिरिंज, खाली पड़े मैदान में मिला शख्स का शव, पंजाब में बवाल

पहले दस खोली में था कैद

इससे पहले, लॉरेंस को 'दस खोली' में रखा गया था, जो एक छोटी और बेहद सुरक्षित जगह है, जहां केवल 10 कैदी ही रह सकते हैं. उससे पहले, वह तिहाड़ जेल और पंजाब की अलग-अलग जेलों में था. इन जेलों में रहने के दौरान, लॉरेंस की कुछ कॉल रिकॉर्डिंग सामने आई थीं, जिनमें वह कॉल सेंटर मालिकों को धमकी दे रहा था. यहां तक कि गैंगस्टर शहजाद भट्टी के साथ भी उसकी बातचीत का एक कथित ऑडियो सामने आया था.

जेल में कैसे कटता है लॉरेंस का दिन?

बाहरी दुनिया से किसी भी तरह के कॉन्टैक्ट या डिजिटल पहुंच के बिना, लॉरेंस अब चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी में, अकेले रहता है. बताया जाता है कि अपनी कोठरी के अंदर वह एक अनुशासित और संयमित जीवन जीता है. सुबह का समय ध्यान (मेडिटेशन) में बिताता है. नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है, व्रत रखता है और पूरी तरह से शाकाहारी भोजन करता है. बाहरी दुनिया से उसका इकलौता संपर्क वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालती सुनवाई में शामिल होना और अपने वकील के साथ कानूनी रणनीति पर बात करना है.

तमिलनाडु की जेल में हुआ खेल: गार्ड पर हमला कर आधी रात फरार हुए 17 कैदी, पोस्ट बनाकर खोजबीन जारी

लॉरेंस जेल में, फिर भी चल रहा गैंग

हालांकि, साबरमती जेल में बंद होने के बावजूद, उसका सिंडिकेट एक डिसेंट्रलाइज्ड कमांड चेन से दुनिया भर में काम कर रहा है. उसके सबसे भरोसेमंद साथियों की एक 'शैडो कैबिनेट' विदेशों में सुरक्षित ठिकानों से इसके रोजमर्रा के कामकाज को चलाती है.

इस मेन ग्रुप अहम सदस्य नए लोगों को भर्ती करने, काम सौंपने और लॉजिस्टिक्स का काम देखते हैं, साथ ही वे आपस में स्क्रीनशॉट भी शेयर करते हैं. इसके अलावा एक और पैरलर ग्रुप है, जो प्लानिंग, फंडिंग और टारगेट चुनने का काम करता है. FBI के 'ऑपरेशन हार्डबॉल' के बाद से, इनमें से ज्यादातर लोग अंडरग्राउंड हो गए हैं.  इसमें मुख्य सरगना गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा भी शामिल हैं. 
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES