SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

पश्चिम बंगाल उपचुनावः मुस्लिमों के गढ़ में BJP को मिली बड़ी जीत, नंदीग्राम और रेजीनगर में हारीं 'दीदी'

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी जीत गई. करीब 65 फीसदी मुस्लिम वोटर्स वाली रेजीनगर सीट पर बीजेपी के प्रदर्शन विपक्ष की चिंताएं बढ़ सकती हैं.

Written By K. Raj Mishra
Published: Oct 09, 2026, 01:21 PM IST | Updated: Oct 09, 2026, 10:11 PM IST
Image Credit: रेजीनगर में बीजेपी को बड़ी जीत की ओर (Photo- PTI)
Join

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी जीत गई. विधानसभा चुनाव के बाद उपचुनाव में बीजेपी का जलवा बरकार है. नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों ही सीटों पर बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की. इनमें से रेजीनगर सीट की चर्चा काफी ज्यादा हो रही है. इस सीट पर बीजेपी के शंकरावह सरकार जीते. AGUP प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद दूसरे नंबर पर रहे. ममता बनर्जी गुट वाली टीएमसी के प्रत्याशी रबीउल आलम चौधरी तीसरे स्थान पर हैं, तो वहीं ममता से बगावत करने वाले गुट का उम्मीदवार छठे स्थान पर है. चौथे पर कांग्रेस और पांचवे नंबर पर सीपीआई का उम्मीदवार है.

सियासी जानकारों के मुताबिक, यहां से बीजेपी का हारना बहुत मुश्किल है. हालांकि, अभी भी मतगणना के 4 राउंड बाकी है. बीजेपी प्रत्याशी की इतनी बड़ी लीड विपक्ष को परेशान कर सकती है, क्योंकि यह सीट मुस्लिम बाहुल्य है. एजीयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर यहां से विधायक रह चुके हैं. इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी की आंधी में भी हुमायूं कबीर ने करीब 59 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. उस वक्त टीएमसी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा था. वहीं, उपचुनाव में हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए. वे करीब 55 हजार से ज्यादा वोटों से पिछड़ चुके हैं.

बीजेपी को मिली बड़ी जीत की वजह

करीब 65 फीसदी मुसलमान वोटर्स वाली सीट पर बीजेपी पर बीजेपी को मिल रहा समर्थन, एक नई सियासत की ओर इशारा कर रहे हैं. सियासी जानकारों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी मुस्लिम वोट कई खेमों में बंट गया और हिंदू वोटर्स की एकजुटता से बीजेपी को फायदा मिला है. 

इस सीट पर हुमायूं कबीर के बेटे के अलावा टीएमसी (ममता गुट) ने रबीउल आलम चौधरी पर भरोसा जताया था. इसके अलावा टीएमसी के बागी गुट के सफीउज्जमां शेख, कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सैयद असद अली भी मैदान में थे.

कन्फ्यूज विपक्ष से बीजेपी को मिला फायदा

हुमायूं कबीर को इस सीट को छोड़ना भारी पड़ गया. पिछले चुनाव से ठीक पहले उन्होंने 'दीदी' का साथ छोड़ा और अपनी अलग पार्टी बनाई थी. सत्ता परिवर्तन की लहर के बीच भी उन्हें बड़ी जीत हासिल हुई थी. लेकिन सीट छोड़ने के फैसले से शायद जनता का दिल टूट गया और यही वजह है कि उनकी तरह उनके बेटे को वो समर्थन हासिल नहीं हुआ. 

उधर दूसरी ओर, दीदी के प्रत्याशी रबीउल आलम चौधरी इस चुनाव में काफी कन्फ्यूज समझ में आए. मैदान में उतरते ही उन्होंने पहले अचानक से नामांकन वापसी की घोषणा कर दी. उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी के नए नाम और नए सिंबल से मतदाताओं को समझाने में काफी दिक्कत हो रही है. बीजेपी ने इसे उनकी हार का डर बताया. उनके इस कदम से ममता बनर्जी की साख को भी डेंट लगा. हालांकि बाद में दीदी के समझाने पर उन्होंने मैदान नहीं छोड़ने का फैसला लिया.

ये भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल उपचुनावः शुभेंदु का जलवा बरकरार! नंदीग्राम-रेजीनगर दोनों सीटों पर BJP प्रत्‍याशियों ने बनाई बढ़त

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES