गर्मी को Bye-Bye... पहाड़ों पर गिरी बर्फ ने कर दिया ठंड का ऐलान, दिल्ली-NCR को घेरने के बाद जमकर बरसे बादल
अक्टूबर का महीना आधा बीत चुका है. यह वक्त मानसून की विदाई का माना जाता है, लेकिन देशभर में मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं. 15 अक्टूबर को मौसम ने एक बार फिर अचानक यू-टर्न मारा है, जिससे उत्तर भारत में गुलाबी ठंड की एंट्री हो चुकी है.
15 अक्टूबर यानी आज दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत पूरे NCR में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया. सुबह की शुरुआत तेज धूप के साथ हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते आसमान में घने काले बादल छा गए. तेज हवाओं ने अचानक दस्तक दी और झमाझम बारिश होने लगी. उधर पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बर्फबारी हो रही है. मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटे के लिए दिल्ली-एनसीआर में मध्यम बारिश का अलर्ट दिया है.
15 अक्टूबर को पहाड़ी राज्य हिमाचल में हल्की बर्फबारी हुई. अटल टनल, लाहौल-स्पीति, रोहतांग और धौलाधार की पहाड़ियों पर स्नोफॉल दर्ज किया गया है. कुकुमसेरी में तो पारा गिरकर माइनस 0.4°C तक पहुंच गया था, जबकि धर्मशाला में मिनिमम टेम्परेचर 6°C रिकॉर्ड हुआ. ऊना, कुल्लू, शिमला और कांगड़ा समेत कई जिलों में थंडरस्टॉर्म का येलो अलर्ट है. मतलब यह कि यहां आंधी-तूफान, बिजली चमकने और बादलों की गर्जना के साथ बारिश हो सकती है.
क्यों बिगड़ा मौसम का मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तर भारत में एक ताकतवर पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव हुआ है. जिसके चलते उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में तेज आंधी-तूफान, बारिश और कहीं-कहीं ओले गिरने के हालात बने हुए हैं.
मौसम विभाग ने क्या बताया?
भारतीय मौसम विभाग ने 15 अक्टूबर को एक बड़ा अपडेट दिया है. जिसमें बताया गया है, गर्मी के बाद जून से सितंबर तक जो मानसून पूरे देश में बारिश कराता है, वह 15 अक्टूबर को पूरे भारत से पूरी तरह विदा हो चुका है. यानी अब उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत में इस मानसूनी बारिश का दौर खत्म हो चुका है.
जैसे ही मुख्य मानसून गया, ठीक उसी दिन दक्षिण भारत में 'उत्तर-पूर्वी मानसून' जिसे लौटता मानसून भी कहते हैं एक्टिव हो गया है. इसके आते ही तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल में बारिश का नया दौर शुरू हो गया है.
दिल्ली में ठंड की दस्तक
गुरुवार को दिल्ली में मिनिमम टेम्परेचर 23.3°C रहा, जो नॉर्मल से थोड़ा ज्यादा था, लेकिन बारिश के बाद अब पारे में सीधी गिरावट आएगी. शुक्रवार यानी 16 अक्टूबर को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश के साथ बिजली कड़कने की संभावना है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में दिल्ली का मिनिमम टेम्परेचर 17°C से 19°C के आसपास पहुंच सकता है, जिससे सुबह-शाम अच्छी-खासी ठंड महसूस होने लगेगी.
कश्मीर और लद्दाख की चोटियां बर्फ से ढकीं
जोजिला पास और कश्मीर की ऊंची चोटियों पर बर्फ की चादर बिछ गई है. घाटी के मैदानी इलाकों में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है. उत्तराखंड के चमोली और औली के ऊंचाई वाले इलाकों में भी जमकर बर्फ गिरी है, इसी वजह से पूरे राज्य में ठिठुरन बढ़ चुकी है.
वेस्टर्न यूपी में ऑरेंज अलर्ट, आंधी का खतरा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 30 जिलों और दिल्ली से सटे इलाकों में मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. यहां देर शाम तक 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ जगहों पर हवा के झोंके 60-65 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है.
पंजाब, हरियाणा से लेकर साउथ तक कैसा रहेगा हाल?
पंजाब और हरियाणा: इन दोनों राज्यों में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है. 15 और 16 अक्टूबर को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बारिश और ओलावृष्टि की पूरी संभावना है. इसी वजह से खेतों में कटी पड़ी फसलों को लेकर किसानों की चिंता भी बढ़ चुकी है.
अल नीनो ने कैसे बढ़ाई टेंशन?
मौसम में आए बदलाव के बीच एक हैरान करने वाली खबर भी है, क्योंकि विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की नई चेतावनी से अल नीनो को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. अल नीनो प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म होने की एक मौसमी परिघटना है. यह हवाओं के रुख और बारिश के सामान्य चक्र को डिस्टर्ब कर देती है, जिससे भारत ही नहीं दुनिया भर के मौसम में बड़ा उलटफेर होता है.
असर कब और कैसे होगा?
इसका असर दिसंबर से फरवरी 2027 तक रह सकता है. इस दौरान यह पीक पर रहेगा. इसका मतलब यह है कि भारत में इस बार सर्दियां कम ठंडी रहेंगी. पहाड़ों पर बर्फबारी घटेगी और सर्दियों की बारिश में भारी कमी आ सकती है.
ऐसा होने से गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों को नुकसान पहुंचेगा. उधर पहाड़ों पर बर्फ कम पिघलने से नदियों और जलाशयों में पानी घटेगा, जिससे गर्मियों में पेयजल संकट गहरा सकता है. यह भी कहा जा रहा है कि 2027 की शुरुआत में रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ सकती है. कुल मिलाकर यह लंबा खिंचने वाला अल नीनो खेती, पानी और अर्थव्यवस्था के लिए दोहरा झटका दे सकता है.
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