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1973 की मशहूर फिल्म 'लोफर' का गीत 'आज मौसम बड़ा बेईमान है' आज के हालात पर सटीक बैठता है, क्योंकि देश में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है. दिल्ली में 18 साल बाद सितंबर में पारा 21 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया और लोग एसी बंद कर ठंड महसूस करने लगे, तो मुरादाबाद में लोग आग तापते दिखे. वहीं दूसरी तरफ, देश का एक हिस्सा यूपी, बिहार, ओडिशा भीषण बारिश और बाढ़ से जूझ रहा है, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक के सैकड़ों इलाके भयंकर सूखे की मार झेल रहे हैं.
इसरो के INSAT-3DS उपग्रह की तस्वीरों ने भी यह साफ कर दिया है कि देश का पारंपरिक मानसून चक्र टूट चुका है और मौसम अब दो चरम छोरों में बंट गया है. इस आर्टिकल में मौसम में बदलाव का विश्लेषण कर रहे हैं.
सिर्फ एक दिन पहले यानी 27 सितंबर 2026 को देश की राजधानी दिल्ली का न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो साल 2001 के बाद सितंबर में दूसरा सबसे कम न्यूनतम तापमान रहा. इससे पहले सितंबर में इससे भी कम तापमान सिर्फ 6 सितंबर 2008 को दर्ज किया गया था, तब पारा 20.8 डिग्री सेल्सियस पर आ गया था. यानी 18 साल बाद सितंबर इतना ठंडा है.
जो लोग दिल्ली और आस-पास रहते हैं, उन्होंने मौसम में अचानक आए इस बदलाव को महसूस भी किया होगा. जो लोग रात में एसी चलाए बगैर सो नहीं पा रहे थे, अचानक उनको एसी बंद करना पड़ा. अचानक गर्मी गायब हो गई और ठंडक का एहसास होने लगा, जबकि कुछ दिनों पहले तक सुपर अलनीनो के इफेक्ट से ठंडक कम पड़ने की रिपोर्ट आ रही थीं और लोग खुद को गर्म मौसम के लिए तैयार कर रहे थे, लेकिन अचानक दिल्ली और उत्तर भारत में हुई बारिश के बाद मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है.
दिल्ली से सिर्फ 160 किलोमीटर दूर यूपी के मुरादाबाद से एक वीडियो सामने आया, जो 27 सितंबर की सुबह का है, जिसमें कुछ लोग आग ताप रहे हैं. यानी इन लोगों को इतनी ठंडक लग रही है कि इनको आग का सहारा लेना पड़ रहा है. सोचिए, सितंबर के महीने में लोगों ने ठंडक दूर भगाने के लिए आग जला ली है.
यह जानना जरूरी है कि इस वक्त कैसे पूरा देश मौसम के बदले पैटर्न से परेशान है. इस वक्त उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा रखी है. लखनऊ, कानपुर, बहराइच, सीतापुर जैसे जिलों में नदियां और जलभराव जनजीवन को प्रभावित कर रहे हैं. वहीं बिहार में भी कोसी और गंडक जैसी नदियां उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है.
लगातार हो रही भारी बारिश के चलते ओडिशा की नदियां उफान पर हैं. स्थिति को संभालने के लिए हीराकुड बांध के कई गेट खोलने पड़े हैं, जिससे बालासोर, जाजपुर और मयूरभंज जैसे जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है और प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ रहा है.
उत्तराखंड में बहुत भारी बारिश से लैंडस्लाइड हो रही है, जिसके कारण प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा. ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम की पहली बर्फबारी भी दर्ज की गई है.
जिस वक्त यूपी, बिहार, ओडिशा भारी बारिश के बाद बाढ़ में बहते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के 265 उप-जिलों में सूखा घोषित कर दिया गया है. इसका मतलब राज्य के कृषि और ग्रामीण प्रशासनिक तंत्र का लगभग 74% यानी तीन-चौथाई हिस्सा इस समय सूखे की चपेट में है. मराठवाड़ा में करीब 45 दिन के सूखे के बाद कम से कम एक-चौथाई खड़ी फसल खराब हो चुकी है.
इससे पहले कर्नाटक ने अगस्त के आखिर से जिलों की तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करना शुरू किया और 22 सितंबर तक अपनी 240 में से 177 तहसीलें सूखा प्रभावित घोषित कर दीं.
ये बहुत बड़े संकट का अल्टीमेटम है, क्योंकि सरकार ऐसे ही किसी इलाके को सूखाग्रस्त घोषित नहीं कर देती. इसके कुछ सख्त वैज्ञानिक और प्रशासनिक नियम होते हैं.
जब किसी क्षेत्र में सामान्य औसत से 25% या उससे ज्यादा कम बारिश दर्ज हो और बारिश के सीजन के बीच में लगातार 21 दिन या उससे ज्यादा समय तक बिना एक भी बूंद गिरे सूखा निकल जाए, जिससे मिट्टी की नमी पूरी तरह खत्म हो जाए, तब सरकार को मजबूरन यह घोषणा करनी पड़ती है कि उस इलाके में पानी और फसल का भारी संकट पैदा हो चुका है.
ये स्थिति बता रही है कि हमारे देश में एक तरफ लोग पानी में डूब रहे हैं, और दूसरी तरफ लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. यह इस बात का प्रमाण है कि हमारा मानसून सिस्टम बिगड़ रहा है और अब इसरो की नई सैटेलाइट तस्वीर इसका प्रमाण दे रही है.
इसरो के INSAT-3DS उपग्रह द्वारा ली गई तस्वीर भारत के मौसम मानचित्र में दिख रहे विभाजन की है, जिसमें देश का एक बड़ा हिस्सा बादलों से ढका हुआ है, जबकि दूसरा हिस्सा यानी राजस्थान और गुजरात का एरिया बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा है. यानी देश के कुछ हिस्सों में बारिश हो रही है और कुछ हिस्सों में बादलों का नामोनिशान मौजूद नहीं है.
पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के ऊपर बादलों का घना जमावड़ा साफ दिखाई दे रहा है, जो यहां सक्रिय मानसूनी हलचल और बारिश का संकेत देता है. इसके अलावा दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के कुछ हिस्सों में बादलों की मोटी परतें छाई हुई हैं. वहीं राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में आसमान काफी हद तक साफ और बादलों से मुक्त नजर आ रहा है, जो मानसून की वापसी और शुष्क मौसम को दिखा रहा है.
इसरो के INSAT-3DS उपग्रह से ली गई इस तस्वीर से संकेत मिल रहे हैं कि भारत में पारंपरिक मानसून चक्र टूट रहा है. पहले मानसून पूरे देश में एक तय पैटर्न और क्रमबद्ध तरीके से आता और जाता था, लेकिन अब यह 'असंतुलित' हो चुका है. देश का एक हिस्सा सूखा या साफ है, तो दूसरा हिस्सा भारी बादलों और अचानक होने वाली मूसलाधार बारिश की चपेट में है. एक्सपर्ट भी बता रहे हैं, हमें अब मौसम की ऐसी मार के लिए हमेशा तैयार रहना होगा.