नवरात्रि ब्रह्मोत्सव: तिरुपति बालाजी के दरबार में नेपाल से आए भक्तों ने बाढ़ की आपदा में जान गंवाने वालों के लिए की प्रार्थना; जानिए पांचवें दिन की महिमा
तिरुमाला की पहाड़ी पर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के मंदिर में नवरात्रि ब्रह्मोत्सवम की धूम मची है. ज़ी मीडिया भगवान के इस उत्सव की व्यापक कवरेज कर रहा है. इस कड़ी में नेपाल से आए तमाम श्रद्धालुओं ने भगवान की इस सेवा के लिए ज़ी मीडिया का आभार प्रकट किया.
तिरुपति बालाजी के धाम में चल रहे नवरात्रि ब्रह्मोत्सवम का आज पांचवा दिन है. यह उत्सव 12 अक्टूबर से शुरू हुआ है और 20 अक्टूबर तक चलेगा. इस पावन नवरात्र ब्रह्मोत्सवम के लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं. उत्सव के पांचवे दिन ज़ी मीडिया ने नेपाल से आए श्रद्धालुओं से बात करके उनके दिलों में उमड़ रहे भक्ति भाव को दुनिया के सामने रखा. ज़ी मीडिया से बातचीत में आए तीर्थयात्रियों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए पूरी मानवजाति की खुशहाली और सुरक्षा की प्रार्थना की.
ज़ी मीडिया संवाददाता गिरी ने इन भक्तों से उत्सव के दौरान टीटीडी की तैयारियों और इंतजामों का जायजा भी लिया. उन भक्तों के समूह से हुई बातचीत के कुछ अंश आपको बताते हैं.
ज़ी मीडिया का आभार
संपत कुमार रामानुज ने बताया कि वो तिरुमाला में विराजमान भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के चरणों में माथा टेककर उनका आशीर्वाद लेने आए हैं. मैं यहां आए लाखों श्रद्धालुओं को भी प्रणाम करता हूं. ज़ी न्यूज़ का आभार प्रकट करता हूं जो आप इस उत्सव को दुनियातक पहुंचा रहे हैं. इन्हीं भक्तों में शामिल एक महिला ने कहा कि वो बैकुंठनाथ स्वामी के श्रीचरणों में प्रणाम करके हुए सबकी सुख-शांति और खुशहाल जीवन की प्रार्थना करने आई हैं.
नेपाल की आपदा में मारे गए लोगों के लिए प्रार्थना
ज़ी मीडिया संवादताता के सवाल पूछने पर पता चला कि इनमें से कुछ लोग हाल ही में नेपाल में आई आपदा में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने आए हैं. नेपाल से ही आईं भगवान वेंकटेश्वर की एक महिला भक्त ने यह भी कहा कि बीते कुछ समय में नेपाल में काफी आपदा आई है. कई लोग मारे गए. एक ही घर के कई-कई लोग खत्म हो गए. कई लोग लापता हैं. जिनकी जान बच गई उनका घर और सामान टूट गया. इसलिए वह धरती का पालन-पोषण करने वाले भगवान श्री हरि विष्णु के वेंकटेश्वर स्वामी अवतार के धाम में आकर मृतकों की आत्मा की शांति और लोगों के जीवन की रक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना कर रही हैं.
एक अन्य महिला ने बताया कि उन्हें तिरुमाला में आकर बहुत अच्छा लग रहा है. यह जगह साक्षात बैकुंठ है. यहां आकर हमे परमसुख मिला है. मैं यहां भगवान की मौजूदगी और कृपा को महसूस कर रही हूं. उन्होंने ये भी कहा, 'नेपाल में भी यहां की तरह ऐसे ही बैकुंठ है मुक्तिनाथ हैं. आराध्य देव पशुपथिनाथ हैं. सीता मैया का जन्म स्थान है. बुद्ध का स्थल है. आप सभी नेपाल का भ्रमण करिए आपको भक्तिभाव में डूबने का आनंद मिलेगा.'
उन्हें भरोसा है कि उनकी प्रार्थना भगवान सुनेंगे और सबके ऊपर अपनी कृपा बनाए रखेंगे.
पांचवे दिन की महिमा
ब्रह्मोत्सव के पांचवें दिन सुबह 'मोहिनी अवतारोत्सव' मनाया जाता है, जो भगवान के 'मोहिनी' अवतार की याद में आयोजित होता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने मिलकर 'क्षीरसागर मंथन' किया था, जिससे अमृत समेत कई अन्य पवित्र वस्तुएं प्राप्त हुईं. अमृत के लिए देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ. तब भगवान विष्णु ने 'मोहिनी' (एक अत्यंत सुंदर स्त्री) का रूप धारण किया और देवताओं के लिए अमृत प्राप्त किया.
इस दिन भगवान को मोहिनी के रूप में सजाया जाता है और उन्हें एक पालकी में बिठाकर शोभायात्रा निकाली जाती है. इस शोभायात्रा में भगवान कृष्ण को भी शामिल किया जाता है. ये आयोजन क्षीरसागर मंथन के दौरान भगवान विष्णु द्वारा देवताओं की गई सहायता का उत्सव मनाने के लिए किया जाता है.
रात्रि में 'ऊंजल सेवा' (झूला सेवा) के बाद, भगवान और उनकी पत्नियों को 'गरुड़ वाहन' पर विराजमान किया जाता है. इस दिन भगवान को 'महाकांति' और 'सहस्रनाम माला' से सुशोभित किया जाता है.
प्राचीन हिंदू ग्रंथों के अनुसार, पक्षियों के राजा गरुड़ को वेदों का स्वरूप माना गया है, जबकि भगवान विष्णु वेदों के स्वामी हैं. इसलिए, भगवान स्वयं को गरुड़ में देखते हैं. वैष्णव पुराणों में गरुड़ को 'पेरियतिरुवडी' यानी 'प्रथम भक्त' भी कहा गया है.
यही कारण है कि भगवान वेंकटेश्वर ने ब्रह्मोत्सव के सबसे महत्वपूर्ण दिन के लिए गरुड़ को अपना वाहन चुना. सभी वाहनों में 'गरुड़ वाहन' को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर के दर्शन करने आते हैं.