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बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हमला मामले में पुलिस की जांच लगातार जारी है. इस प्रकरण में 3 शूटर्स समेत 7 लोगों की गिरफ्तारी अभी तक हुई है, जिसमें 2 महिलाएं भी शामिल हैं. पुलिस की जांच के दौरान एक बड़ा और अहम खुलासा हुआ है. ये खुलासा हमले में इस्तेमाल हुए हथियारों की सप्लाई के सिंडिकेट्स से जुड़ा हुआ है.
बताया जाता है कि आरोपियों को हथियार पंजाब के अमृतसर से सप्लाई किए गए थे. पुलिस सूत्रों का दावा है कि आरोपियों ने डेड लेटर बॉक्स के जरिए ये हथियार हासिल किए थे. ऐसे में सवाल है कि आखिर 'डेड लेटर बॉक्स' क्या होता है और मुंबई तक हथियार कैसे पहुंचे?
जांच में पाया गया कि हमले में इस्तेमाल किए जाने वाले हथियर 'डेड लेटर बॉक्स' के जरिए हासिल किए गए. बता दें कि डेड लेटर बॉक्स पहले से तय की गई एक जगह होती है, जहां पर कोई शख्स पहले हथियार छिपाकर रख देता है. इसके बाद यहां पर दूसरा कोई शख्स पहुंचता है और हथियार उठा लेता है.
इस पूरी प्रकिया में केवल जगह के बारे में जानकारी होती है, एक-दूसरे को जो हथियार देते हैं उनकी खबर नहीं होती है. बताया गया कि एक्टर पर किए गए हमले में इस्तेमाल हुए हथियार अमृतसर की एक जगह पर रखे गए थे.
12000 किमी. दूर टाइगर का 'सुपारी किलर'! #TigerShroff #Police | @arzoosai https://t.co/fkAV4s4jg6
— Zee News (@ZeeNews) October 21, 2026
पुलिस ने मंगलवार को चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें दो महिलाएं शामिल हैं. इनकी पहचान कुणाल-सुमित हरियाणा के निवासी तथा राधा-बबीता उत्तर प्रदेश के तौर पर हुई है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इनको गिरफ्तार किया है.
दिल्ली से गिरफ्तार किए गए इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने हथियार का इंतजाम करने और उन्हें पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. आरोप है कि कुणाल और सुमित ने हथियारों का इंतजाम किया और राधा-बबीता मुंबई के दादर गईं, जहां पर शूटर्स को बंदूकें सौंप दीं.
Major revelation regarding the syndicate that supplied weapons for the shooting incident involving Tiger Shroff. The weapons were obtained via a 'dead letter box'. A 'dead letter box' refers to a location where weapons have been pre-placed by someone. Weapons were left at a location in Amritsar: Sources
— ANI (@ANI) October 21, 2026
गौरतलब है कि हथियार किस जगह पर रखें, इसकी जानकारी अनिल पंडित ने दी थी. हालांकि, कुणाल और सुमित को ये नहीं पता था कि आखिर हथियार रखे किसने थे. इस काम के लिए दोनों को 70 से 80 हजार रुपये मिले थे. इन्हीं पैसों से करीब 10,000 से 12,000 उन्होंने दो महिलाओं (बबीता और राधा) को दिए, जिन्होंने ये हथियार मुंबई तक पहुंचाए थे.
पुलिस सूत्रों ने कहा कि कुणाल इसी साल जुलाई के महीने में जेल से बाहर आया था. बताया जाता है कि उसके एक दोस्त ने अनिल पंडित से उसकी जान पहचान कराई. इसी पहचान के बाद से दोनों इंक्रिप्टेड ऐप जरिए संपर्क में रहे. लगभग दो हफ्ते पहले ही अनिल पंडित की ओर से कुणाल को अमृतसर से हथियार उठाकर फिर मुंबई पहुंचाने का टास्क मिला. बाद में कुणाल ने हथियार पहुंचाने के लिए कुरियर के तौर पर अपनी प्रेमिका का इस्तेमाल किया.
गौरतलब है कि स्पेशल सेल की एनडीआर टीम ने कुणाल, सुमित राधा और बबीता को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बीएनएसएस (BNSS) की धारा 35(1)(b) के तहत कलंदरा बनाकर कोर्ट में पेश किया.इसको कोर्ट ने मंजूर कर लिया. बाद में मुंबई पुलिस ने आरोपियों की तीन दिन ट्रांजिट रिमांड मांगी थी, जिसको कोर्ट ने ग्रांट कर दिया.