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एक तरफ जहां राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ माहौल गर्म है, इसी बीच केरलम विधानसभा ने उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव पास कर दिया है. यह देश की पहली राज्य विधानसभा हैं जिसने केंद्र सरकार से कुमार को उनके पद से हटाने की मांग करने वाला प्रस्ताव पास किया है. मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के जरिए यह प्रस्ताव 140 सदस्यीय विधानसभा में पेश किया गया. वोटिंग के दौरान 102 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किए. साथ ही 35 सदस्यों वाली वामपंथी पार्टी ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया, हालांकि, भाजपा के तीन सदस्यों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया.
इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करने के अलावा, प्रस्ताव में SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं को दूर करके मतदान के अधिकारों को बहाल करने की मांग की गई है. साथ ही कथित तौर पर गलत तरीके से वोटिंग से वंचित किए गए सभी पात्र वोटर्स के वोट के अधिकारों को तुरंत बहाल करने की भी मांग की गई है.
प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया में भी बदलाव की मांग की गई है. प्रस्ताव में बताया गया कि CEC की सलेक्शन कमेटी में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए, जिससे संस्था की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता को यकीनी बनाया जा सके.
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने प्रस्ताव को लेकर कहा,'किसी भी संस्था को हमारे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. हमारा रुख साफ है. वोटिंग के हक की हिफाजत होनी चाहिए. संविधान का पालन होना चाहिए. लोकतंत्र की जीत होनी चाहिए. केरलम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए मजबूती के साथ खड़ा है.'

दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली में कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन होना था. हालांकि, प्रशासन ने पहले ही सख्ती अपनाते हुए मुख्य चेहरों को डिटेल कर लिया था. साथ ही जंतर-मंतर के आसपास जबरदस्त सुरक्षा के इंतेजाम कर दिये थे. इस दौरान भी बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारियों का डिटेन किया गया.
इसके अलावा कांग्रेस भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जबरदरस्त तरीके से आवाज उठा रही है. 6 अक्तूबर को कांग्रेस ने संसद से चुनाव आयुक्त तक मार्च तक किया. हालांकि, उन्हें रास्ते में ही रोक लिया. जिसके सभी नेता वहीं प्रदर्शन करने लगे. देर रात तक चलने वाला यह प्रदर्शन तब खत्म हुआ, जब तक राहुल गांधी-प्रियंका गांधी को हिरासत में नहीं ले लिया गया.
इसके अगले दिन कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की, लेकिन यहां पर भी जबरदस्त सुरक्षाबलों की तैनाती थी. सुरक्षाबलों ने विपक्षी नेताओं को प्रदर्शन नहीं करने दिया और अधिकतर नेताओं को फिर से हिरासत में ले लिया. अगले दिन फिर से कांग्रेस ने राजघाट तक मार्च किया और महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी.