App

2 से ज्यादा बच्चे होने पर अब चुनाव लड़ने में कोई पाबंदी नहीं! SC ने कही ये बात

भारत में लगातार जन्म दर घट रही है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने 2 से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून पर टिप्पणी करते हुए इसे अप्रासंगिक बताया. कोर्ट ने कहा है कि अब इस तरह के कानून प्रासंगिक नहीं रह गए हैं

2 से ज्यादा बच्चे होने पर अब चुनाव लड़ने में कोई पाबंदी नहीं! SC ने कही ये बात

Supreme Court Of India: सुप्रीम कोर्ट ने 2 से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून पर अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि भारत में लगातार घट रही जन्म दर के चलते 2 बच्चों की सीमा तय करने वाले कानून अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं. अदालत ने इस कानून पर दोबारा विचार करने की जरूरत पर जोर दिया और इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया.    

कोर्ट ने कहा कि भारत में प्रजनन दर लगातार घट रही है. ऐसे में इन कानूनों का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है. इनकी फिर से समीक्षा की रूरत है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट अब उन पुराने फैसलों पर दोबारा विचार करेगा, जिनमें 2 बच्चों की सीमा तय करने वाले कानूनों को संवैधानिक रूप से सही ठहराया गया था.

2 से ज्यादा बच्चे होने पर नहीं लड़ सकते चुनाव? 


सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के काकोडा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव की अयोग्यता को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की. उन्हें तीसरे बच्चे के जन्म के चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया था. मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के जावेद बनाम हरियाणा सरकार मामले में दिए गए फैसले को आगे समीक्षा के बड़ी बेंच के पास भेज दिया है. उस फैसले में तीन जजों की पीठ ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के उस प्रावधान को सही ठहराया था, जिसके तहत 2 से अधिक जीवित बच्चे होने पर व्यक्ति पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता था.

घटती आबादी ने बिगाड़ी स्थिति


जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने इस पर फैसला सुनाते बहुए कहा कि जिस कानून के तहत 2 से अधिक बच्चे होने पर लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने या सजा का प्रावधान है अब वे घटती जन्म दर के चलते अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं. इस कानून का मकसद देश में बढ़ती जनसंख्या को रोकना था, लेकिन पिछले कुछ समय से स्थिति बदली है और देश में आबादी से जुड़े हालात काफी बदले हैं.  

नियम-कानून में बदलाव जरूरी


कोर्ट ने घटती आबादी पर चिंता जताते हुए कहा कि साल 2003 में भारत की कुल प्रजनन दर यानी टोटल फर्टिलिटी रेट 3 थी, जो अब घटकर केवल 1.9 रह गई है. एक जनसंख्या की पीढ़ी को अपनी दूसरी पीढ़ी स्थिर रखने के लिए जन्म दर 2.1 होनी चाहिए. ऐसे में कोर्ट ने कहा कि अगर फर्टिलिटी रेट घटता रहा, तो आने वाले समय में देश में बुजुर्गों की आबादी बढ़ेगी और काम करने वालों की संख्या में भारी गिरावट होने लगेगी. ऐसे में जनसंख्या रोकने के लिए बनाए गए नियम-कानूनों को जारी रखना सही फैसला नहीं होगा.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Arvind Singh

Arvind Singh

अरविन्द सिंह ज़ी न्यूज़ में सीनियर जर्नलिस्ट हैं. पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव है. वह मुख्यत: सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्टिंग करते हैं. इसके अलावा देशभर में कोर्ट से आने वाली बड़ी ख़बरों पर भी उनकी नज़र रहती है. कानून की जटिल, तकनीकी खबरों को सरल अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है, इन्होंने जामिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. 
Read More