नेताजी की नई मुसीबतः चुनावी हलफनामे में नहीं दी सही जानकारी तो जनता दर्ज करा सकेगी केस, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
कर्नाटक निवासी राजकुमार माडकी की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देता है, तो जनता भी उसके खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकती है.
नेताओं के चुनावी हलफनामे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 अक्टूबर) को एक बड़ा फैसला दिया है. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देता है या बातों को छुपाता है, तो जनता भी उसके खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकती है. कोर्ट ने कहा कि ऐसे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ चुनाव आयोग ही शिकायत दर्ज कराए या इलेक्शन कमीशन से मंजूरी मांगी जाए, ये आवश्यक नहीं है. अदालत ने साफ कहा कि ऐसे मामलों में सीआरपीसी की धारा 195 की पाबंदी लागू नहीं होगी.
झूठी शिकायत करने पर भी होगी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33A के तहत जनप्रतिनिधियों को अपना चुनावी हलफनामा देना अनिवार्य है. कोर्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की ओर से चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने से संबंधित मामलों में शिकायत दर्ज कराने के लिए भारतीय नागरिकों को केवल चुनाव आयोग पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. वे खुद भी शिकायत दर्ज कराने के अधिकार रखते हैं. वहीं, अगर उम्मीदवार को परेशान करने के उद्देश्य से झूठी शिकायत दर्ज कराई गई है, तो मजिस्ट्रेट या अन्य सक्षम अधिकारी तथ्यों की जांच करके झूठी शिकायत दर्द कराने वाले के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है.
राजकुमार माडकी की अपील पर आया फैसला
कोर्ट ने यह फैसला कर्नाटक निवासी राजकुमार माडकी की अपील पर सुनाया है. बता दें कि राजकुमार माडकी ने बीदर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक शैलेंद्र बेलदाले पर वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में अपने आवासीय पते के संबंध में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया था. राजकुमार ने अपनी याचिका में कहा कि शैलेंद्र बेलदाले ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RoP Act) की धारा 125-A के तहत दंडनीय अपराध किया है.
चुनावी हलफनामे को लेकर क्या कहता है कानून?
भारत में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33A के तहत जनप्रतिनिधियों को अपना चुनावी हलफनामा देना होता है. इसी एक्ट की धारा 125ए कहती है कि अगर कोई जनप्रतिनिधि अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देता है, जानकारी छिपाता है या अनिवार्य विवरण नहीं देता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की जा सकती है. दोषी पाए जाने पर संबंधित उम्मीदवार को 6 महीने तक की जेल, जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है.
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