'हम पर कोई दबाव नहीं बना सकता', राहुल गांधी को 'सुप्रीम' फटकार; ज्ञानेश कुमार को भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सीईसी ज्ञानेश कुमार और दो अन्य आयुक्तों को नोटिस जारी किया. साथ ही नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को फटकार लगाई. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को तमाम वीडियोज सुरक्षित रखने का आदेश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एसआईआर में गड़बड़ी को लेकर इंडिया ब्लॉक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की. सबसे बड़ी अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा दो अन्य आयुक्तों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने SIR प्रकिया के खिलाफ दिग्विजय सिंह और असदुद्दीन ओवैसी की अलग से दायर याचिका पर भी चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया. वहीं, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपनी मंशा जाहिर करनी होगी.
राहुल गांधी को कोर्ट ने लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के मार्च को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि हम पर कोई दबाव नहीं बना सकता. इस तरह के प्रयास बहुत कमजोर हैं और इनसे कोर्ट पर कोई असर नहीं पड़ता. राहुल गांधी के मार्च के दौरान नारेबाजी , हंगामे,पत्रकार के साथ बदसलूकी के आरोपों वाली याचिका पर कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है.
'हमें सब पता है अंदर-बाहर क्या हो रहा है'
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि कोर्ट के बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के अंदर क्या कहा जा रहा है, हमें सब पता है. हम जमीनी हकीकत से अनजान नहीं हैं और हमें हर चीज की जानकारी रहती है. राहुल गांधी का सीधे नाम लिए बिना CJI ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं. लेकिन एक याचिकाकर्ता के तरीकों को लेकर हम सवाल पूछना चाहते हैं. दरअसल, कई वकीलों ने राहुल गांधी के सु्प्रीम कोर्ट में आने के तरीके को लेकर आपत्ति उठाई है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस प्रदर्शनस्थल से जुड़े सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखे. साथ ही, प्राइवेट पर्सन भी फुटेज सुरक्षित रखें ताकि आगे चलकर वो सबूत के तौर पर काम आ सकें.
प्रदर्शन के दौरान BNSS की धारा 172 और 163 लगाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है.
महिला पत्रकार की गिरफ्तारी पर 'सुप्रीम रोक'
वहीं, महिला पत्रकार पर हमले और यौन शोषण के आरोपों पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. केंद्र की ओर से दलील देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह पता लगाना मुश्किल है कि प्रदर्शन स्थल पर कौन रील मेकर है, कौन जर्नलिस्ट. पर इस बात पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि किसी भी महिला के साथ अभद्रता नहीं होनी चाहिए. इनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से महिला पत्रकारों पर किए गए हमले के आरोपों की सुनवाई और जांच के लिए एक समिति का गठन कर सकता है.
कोर्ट ने वकील इंदिरा जयसिंह को शिकायतकर्ता महिला पत्रकारों के नाम और SIT में शामिल होने के लिए रिटायर्ड जजों और पुलिस अधिकारियों के नाम मांगे हैं. इंदिरा जय सिंह ने कहा कि ACP विवेक भगत की ओर से जिस महिला पत्रकार के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया है. उसको गिरफ्तारी से संरक्षण का आदेश दे.
इस पर तुषार मेहता ने कहा कि वो जांच में सहयोग करें. हम आश्वस्त करते हैं कि उनको अभी गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. जांच में जो भी नतीजा निकलेगा, वो कोर्ट को बताया जाएगा. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला पत्रकार को गिरफ्तार न किया जाए.
जंतर-मंतर डीनोटिफाई मामले में क्या बोला कोर्ट?
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से जंतर-मंतर को प्रदर्शन की सूची के हटाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की कुछ मौखिक टिप्पणियों की वजह से लिया गया, या फिर सरकार ने सोच समझकर लिया है? इस पर SG मेहता ने कहा कि सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस निर्णय का आधार नहीं है. इस मसले पर कमेटी का गठन बहुत पहले ही कर दिया गया था. कमेटी ने एक रिपोर्ट दी है. उस आधार पर यह फैसला लिया गया है.